नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी पीठ ने 16 फरवरी 2026 को पुरी में एक शैक्षणिक संस्थान द्वारा वन भूमि और जलाशय पर कथित अतिक्रमण की शिकायत पर ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (ओएसपीसीबी) और ओडिशा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (ओएसईआईएए) सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। सभी को एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
एनजीटी में दायर आवेदन में आरोप लगाया गया है कि बैरीपुर स्थित राधाबल्लव हायर सेकेंडरी स्कूल ने ग्राम्य जंगल (गांव का वन) के रूप में वर्गीकृत भूमि पर अवैध अतिक्रमण और बिना अनुमति निर्माण किया है। यह भूमि पुरी जिले के बैरीपुर में स्थित है और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की है।
आवेदन के अनुसार, वन भूमि पर पहले से कई स्थायी भवन मौजूद हैं। इसके अलावा दो से अधिक अतिरिक्त हॉल/भवनों का निर्माण सक्रिय रूप से जारी है, जिससे कथित अवैधता और पर्यावरणीय क्षति और बढ़ रही है। आरोप है कि संस्थान ने किसी भी प्राधिकरण की अनुमति लिए बिना वन भूमि और जलाशय पर कब्जा कर निर्माण किया, जो पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन है।
राजस्व निरीक्षक ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट तहसीलदार, गोप को सौंपी थी और तहसीलदार ने इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए कलेक्टर, पुरी को अग्रेषित किया था, लेकिन शिकायत के अनुसार प्रतिवादी संख्या 4 (कलेक्टर, पुरी) द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
आवेदन में कहा गया है कि उक्त भूमि पर गैर-वन गतिविधियां करने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है। आवेदक ने संबंधित प्राधिकरणों को कई बार अभ्यावेदन दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
200 पेड़ काटने की शिकायत
एनजीटी ने 19 फरवरी 2026 को पंजाब के पठानकोट जिले के कोट गांव में 200 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले पर संज्ञान लिया।
आवेदक ललित कुमार ने अपनी याचिका में कहा है कि वे गांव कोट में स्थित कृषि भूमि के मालिक हैं, जहां 200 से अधिक परिपक्व पेड़ खड़े थे। उनका आरोप है कि 31 मार्च से 6 अप्रैल 2025 के बीच कुछ निजी व्यक्तियों ने अवैध रूप से पेड़ों को काटकर हटा दिया।
आवेदक ने यह भी कहा कि घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग को दी गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही वन अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया।
आवेदक के वकील ने अपने दावे के समर्थन में दाखिल तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। उन्होंने उपग्रह चित्रों का भी उल्लेख किया, जिनसे हरित क्षेत्र के नुकसान की सीमा दिखाई देती है। संबंधित प्राधिकरणों से शिकायत किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
ट्रिब्यूनल ने वन संरक्षण प्रभाग (एफपीडी), मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ हिल्स), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) सहित अन्य को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।