उत्तराखंड के देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर सात मोड़ क्षेत्र में प्रस्तावित 4,369 पेड़ों की कटाई के मामले में केंद्रीय अधिकारप्राप्त समिति (सीईसी) ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से वैकल्पिक रास्तों की संभावनाएं तलाशने को कहा है। इनमें संवेदनशील हिस्से में पूरी तरह एलिवेटेड हाईवे बनाने का विकल्प भी शामिल है।
सीईसी ने एनएचएआई को इन सभी वैकल्पिक संरचनात्मक अलाइनमेंट का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट समिति के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश 9 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई की कार्यवाही में दर्ज है, जिसे सीईसी ने 21 सितंबर को जारी किया।
बता दें कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका (सिविल) संख्या 202/1995 से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया की ओर से आवेदन संख्या 1699/2026 पेश किया गया था. आवेदन पर डॉक्टर विजयपाल बघेल ने सीईसी के समक्ष पक्ष रखा।
ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने सीईसी से भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश सड़क के मौजूदा अलाइनमेंट को पूरी तरह अलग रखने की मांग की। संगठन का कहना है कि मौजूदा प्रस्ताव के तहत 4,369 पेड़ों की कटाई शामिल है।
आवेदन में इन पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक संरचनात्मक समाधान अपनाने की मांग की गई थी। इसमें संवेदनशील हिस्से के ऊपर पूरी तरह खंभों पर बना एलिवेटेड हाईवे तैयार करने का विकल्प भी रखा गया, ताकि परियोजना को ‘जीरो ट्री फेलिंग’ मॉडल पर लागू किया जा सके।
सीईसी के समक्ष पेश आवेदन में पर्यावरणीय प्रभाव, हाथी गलियारे के संभावित विखंडन और पेड़ों के प्रतिरोपण की तकनीक की विफलता से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए।
संगठन ने समिति से यह भी मांग की कि मामले से जुड़े 25 आरटीआई आवेदनों से संबंधित सभी दस्तावेज भी सीईसी के सामने रखे जाएं।
सुनवाई के दौरान एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर उपस्थित हुए। उन्होंने सीईसी के सामने सुप्रीम कोर्ट का 21 जुलाई 2026 का आदेश और उत्तराखंड हाईकोर्ट का 18 मार्च 2026 का आदेश प्रस्तुत किया।
उत्तराखंड वन विभाग की ओर से भी एक अधिकारी सुनवाई में मौजूद रहा और उसने मामले में विभाग का पक्ष सीईसी के सामने रखा।
इसके बाद सीईसी ने एनएचएआई को निर्देश दिया कि वह मौजूदा प्रस्ताव के अलावा अन्य सभी वैकल्पिक संरचनात्मक अलाइनमेंट की संभावनाओं का अध्ययन करें। समिति ने विशेष रूप से पूरी तरह एलिवेटेड संरचना को भी इन विकल्पों में शामिल किया है।
एनएचएआई को इन विकल्पों पर अपनी रिपोर्ट सीईसी के सामने प्रस्तुत करनी होगी।