कार्यशाला में आए विशेषज्ञों ने साल बोरर प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया Joy Macwan
जंगल

साल बोरर के प्रभावी और स्थायी समाधान के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता: विशेषज्ञ

अमरकंटक के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में आयोजित हुई कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साल बोरर के बढ़ते प्रकोप पर जताई चिंता

Bhagirath

मध्य प्रदेश के साल वनों में साल बोरर कीट के बढ़ते प्रकोप, उसके वैज्ञानिक प्रबंधन और साल वनों के संरक्षण की दिशा में रणनीति बनाने के उद्देश्य से अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में 17 अगस्त को उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) के कुलपति, वन विभाग के प्रधान मुख्य वनसंरक्षक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य वनसंरक्षक, वनसंरक्षक, वन मंडलाधिकारी एवं शोध संस्थाओं के वैज्ञानिक और वन समितियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) ने कहा कि साल वन मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा हैं और इनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव का समयबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर उपलब्ध अनुभवों को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ते हुए प्रभावी एवं दीर्घकालिक प्रबंधन रणनीति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर आईजीएनटीयू के कुलपति अवधेश कुमार शुक्ला, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते तथा विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने साल बोरर कीट के बढ़ते प्रकोप पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके प्रभावी एवं स्थायी समाधान के लिए वन विभाग, वैज्ञानिक संस्थानों, विश्वविद्यालय तथा स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

जनप्रतिनिधियों ने साल वनों को केवल वन संपदा के रूप में नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता एवं स्थानीय समुदायों के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन के रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उद्घाटन सत्र के बाद कार्यशाला का तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। तकनीकी सत्र में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने साल बोरर कीट के प्रकोप, उसके कारणों, पहचान, निगरानी, प्रभाव एवं प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार एवं अनुभव साझा किए।

तकनीकी सत्र में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साल वनों के संरक्षण, कीट प्रकोप की वैज्ञानिक निगरानी तथा प्रभावित क्षेत्रों में समयबद्ध हस्तक्षेप की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

तकनीकी सत्र के दौरान वन मंडलाधिकारी, डिंडोरी एवं अनूपपुर द्वारा प्रस्तुतियों के माध्यम से वर्तमान में साल बोरर कीट से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, प्रकोप के विस्तार तथा नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान एवं राज्य वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा साल बोरर कीट की जैविकी, जीवनचक्र, प्रकोप की पहचान, निगरानी तथा एकीकृत कीट प्रबंधन की वैज्ञानिक पद्धतियों पर विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियां दी गईं। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि साल बोरर कीट से उत्पन्न चुनौती के समाधान के लिए केवल उपचारात्मक उपायों के बजाय पूर्व चेतावनी प्रणाली, नियमित निगरानी, प्रभावित वृक्षों की वैज्ञानिक पहचान, क्षेत्रवार डाटा संकलन तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समेकित प्रबंधन रणनीति विकसित करना आवश्यक है।

तकनीकी सत्र के अंत में डिंडोरी के विधायक ओंकार सिंह मरकाम ने वन संरक्षण को व्यापक पर्यावरणीय संतुलन एवं जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। तकनीकी सत्र के बाद वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा डिंडोरी वन मंडल के करंजिया परिक्षेत्र अंतर्गत साल बोरर से प्रभावित वन क्षेत्रों का भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।

क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान उन्होंने प्रभावित साल वृक्षों, कीट प्रकोप की स्थिति तथा क्षेत्र में किए जा रहे प्रबंधन कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान साल बोरर कीट की पहचान, प्रभावित वृक्षों के प्रबंधन, नियमित निगरानी तथा भविष्य में प्रकोप के विस्तार को नियंत्रित करने के संबंध में क्षेत्रीय वन अमले को आवश्यक तकनीकी एवं प्रबंधन संबंधी दिशानिर्देश जारी किए गए।