साल बोरर कीड़ों की माला बनाकर वन विभाग को बेच रहे हैं आदिवासी। फोटो: सुरेंद्र जाटव 
जंगल

डिंडोरी में साल बोरर प्रभावित 1.5 लाख पेड़ कटेंगे, वन विभाग ने केंद्र से मांगी अनुमति

डिंडोरी जिले में वन विभाग ने अब तक 14.70 लाख साल बोरर कीट खरीदे, ट्रैप ट्री विधि से पकड़े जा रहे हैं कीड़े

Bhagirath

सारांश

  • वन विभाग 2 रुपए प्रति कीड़े की दर से आदिवासियों को कर रहा है भुगतान, स्थानीय लोग कीड़ों की माला बनाकर ले जा रहे हैं बेचने

  • पूर्व करंजिया में साल बोरर का सबसे अधिक प्रकोप है। करीब 90 प्रतिशत कीड़े पूर्व करंजिया से पकड़े गए हैं

  • अमरकंटक में 24,000 साल बोरर प्रभावित पेड़ हैं जिनके कटने की आशंका है। यहां भी ट्रैप ट्री विधि से कीड़े पकड़े जा रहे हैं

मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में लगभग 1.5 लाख साल के पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग ने केंद्र से अनुमति मांगी है। इन पेड़ों पर साल बोरर कीट का गंभीर प्रभाव है। इन दिनों डिंडोरी सहित अनूपपुर जिले के अमरकंटक क्षेत्र में साल के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाने वाले साल बोरर कीट पकड़ने का अभियान चल रहा है। इन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय कीड़ों की माला बनाकर वन विभाग को बेच रहे हैं।  

डाउन टू अर्थ ने दिसंबर 2025 में इन इलाकों को दौरा कर पाया था कि साल बोरर कीट इलाकों में तेजी से पनप रहा है और यह महामारी की स्थिति पैदा कर सकता है। पिछले वर्ष अधिक बारिश और आर्द्रता से पैदा हुई अनुकूल परिस्थितियों ने इन कीड़ों को पनपने में मदद की थी, जिसका असर कुछ महीने बाद दिखने लगा था। उस वक्त साल बोरर लार्वा अवस्था में पेड़ों के अंदर मौजूद था। डाउन टू अर्थ को अपनी यात्रा के दौरान ऐसे पेड़ बड़ी संख्या में दिखे जिनके तने के चारों और बुरादा फैला था। यह संक्रमण का प्रमाण था।

वन विभाग ट्रैप ट्री विधि से पकड़ रहा है साल बोरर कीट। फोटो: सुरेंद्र जाटव

डाउन टू अर्थ को दिसंबर 2025 में डिंडोरी के डीएफओ पुनीत सोनकर ने बताया था कि साल बोरर का प्रभाव इस साल (2025 में) अधिक है। इसका पहला संकेत गांव से मिलता है। पास के गांवों में कीटों की संख्या बढ़ने लगती है। कीट घरों की लाइट के पास इकट्ठा होने लगते हैं। उनके अनुसार, इसका एक प्राकृतिक चक्र है जो लगभग 30 वर्षों का होता है। 1997 में इसका प्रभाव बहुत अधिक था। उन्होंने कहा था कि 30 वर्षों बाद 2026–27 में इसके बढ़ने की आशंका है।

यह आशंका सच साबित हो रही है। मॉनसून की सीजन शुरू होते ही ये कीड़े वयस्क होकर पेड़ों से निकलने लगे हैं और इन्हें नियंत्रित करने के लिए ट्रैप ट्री विधि अपनाई जा रही है। डिंडोरी वन विभाग में सब डिवीजनल ऑफिसर (एसडीओ) सुरेंद्र जाटव ने डाउन टू अर्थ को बताया कि 21 जुलाई 2026 तक 14.70 लाख कीड़े पकड़े जा चुके हैं। वन विभाग दो रुपए प्रति कीड़े की दर इनकी खरीद कर रहा है। इस लिहाज से देखें तो वन विभाग 29.40 लाख रुपए का भुगतान कीड़े खरीदने में कर चुका है।

वन विभाग दो रुपए प्रति कीड़े की दर से कर रहा है भुगतान

जाटव का कहना है कि कीड़ों को पकड़ने के लिए तीन रेंज में ट्रैप ट्री विधि अपनाई जा रहा है। ये तीन रेंज हैं-पूर्व करंजिया, पश्चिमी करंजिया और दक्षिण समनापुर। पूर्व करंजिया में इनका सबसे अधिक प्रकोप है। करीब 90 प्रतिशत कीड़े पूर्व करंजिया से पकड़े गए हैं। उनका कहना है कि 1,47,380 साल के पेड़ कीट से प्रभावित मिले हैं। इन पेड़ों की कटाई के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी गई है। संभवत: अगस्त में कटाई की अनुमति आने की उम्मीद है। उसके बाद सितंबर या अक्टूबर में पेड़ों की कटाई शुरू की जाएगी। उनका कहना है ये पेड़ टी1 से टी6 श्रेणी के हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इस काम में आदिवासियों का पूरा सहयोग मिल रहा है क्योंकि उन्हें रोजगार मिल रहा है और वे भी जंगल को बचाना चाहते हैं। वन विभाग ने कीड़ों को खरीदने के लिए पांच कलेक्शन सेंटर बनाए हैं। कीड़े पकड़ने वालों को कार्ड जारी किए गए हैं। 21 जुलाई तक 14,17,915 कीड़ों को खरीदा जा चुका है। उनका अनुमान है कि यह आंकड़ा करीब 25 लाख तक जा सकता है।

अमरकंटक के वरिष्ठ पत्रकार धनंजय तिवारी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि यहां 24,000 साल बोरर प्रभावित पेड़ हैं जिनके कटने की आशंका है। यहां भी ट्रैप ट्री विधि से कीड़े पकड़े जा रहे हैं। कल ही यानी 21 जुलाई को 6,000 कीड़ों को जलाया गया है। जबकि करीब 15,000 कीड़ों को खरीदा गया है। उनका कहना है कि वन समिति और वन सुरक्षा समिति के माध्यम से कीड़े पकड़े जा रहे हैं।