दुनिया में लगभग 269 करोड़ लोग स्वस्थ आहार खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
खान-पान

विश्व खाद्य दिवस: क्या पूरा हो पाएगा भुखमरी समाप्त करने का सपना?

दुनिया में 64.5 करोड़ लोग भूखे, 269 करोड़ स्वस्थ भोजन से वंचित, 13% भोजन की बर्बादी, 70% ताजा पानी खेती में इस्तेमाल होता है।

Dayanidhi

  • साल 2025 में दुनिया के करीब 64.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित रहे, जबकि करोड़ों लोग पौष्टिक भोजन से वंचित हैं।

  • दुनिया में लगभग 269 करोड़ लोग स्वस्थ आहार खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं।

  • वैश्विक स्तर पर करीब 13 प्रतिशत भोजन खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले नष्ट हो जाता है, जबकि 19 प्रतिशत बर्बाद होता है।

  • दुनिया के मीठे पानी के कुल उपयोग का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कृषि में खर्च होता है, इसलिए जल संरक्षण जरूरी है।

  • दूषित भोजन से हर साल लगभग 60 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं और 4.2 लाख लोगों की मौत होती है।

भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, खुशहाली और बेहतर भविष्य की नींव है। इसके बावजूद दुनिया में लाखों लोग भूखे सोने को मजबूर हैं। कहीं भोजन की कमी है, तो कहीं पौष्टिक आहार लोगों की पहुंच से बाहर है। इसी गंभीर चुनौती के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। साल 2026 की थीम आज नवाचार, कल पोषण’ है। यह संदेश देता है कि आज अपनाए गए नए विचार और बेहतर तरीके आने वाली पीढ़ियों की थाली को पौष्टिक बना सकते हैं।

भूख नहीं, भोजन तक पहुंच है बड़ी चुनौती

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के नेतृत्व में मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस भूख, खाद्य सुरक्षा और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर गौर करता है। हैरानी की बात है कि दुनिया में पर्याप्त भोजन पैदा होने के बावजूद हर व्यक्ति तक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है। साल 2025 में लगभग 64.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित थे, जबकि करीब 269 करोड़ लोग स्वस्थ आहार खरीदने में सक्षम नहीं थे। संघर्ष, महंगाई, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

तकनीक के साथ परंपरागत ज्ञान भी जरूरी

इस साल की थीम केवल आधुनिक मशीनों या डिजिटल तकनीक तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य खेती को बेहतर बनाने वाले हर उपयोगी विचार को प्रोत्साहित करना है। मोबाइल फोन के जरिए किसानों को मौसम और फसलों की जानकारी देना, बेहतर बीज विकसित करना, पानी की बचत करने वाली सिंचाई अपनाना और खेती में वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करना इसके अहम उदाहरण हैं।

इसके साथ ही किसानों का पारंपरिक ज्ञान, सहकारी समितियां, सामुदायिक भागीदारी और भूमि तथा जल संरक्षण की पुरानी पद्धतियां भी महत्वपूर्ण हैं। जब आधुनिक विज्ञान और स्थानीय अनुभव साथ आते हैं, तो खेती अधिक टिकाऊ बन सकती है और किसानों की आमदनी में सुधार हो सकता है।

किसान, महिलाएं और युवा बदलाव के वाहक

खाद्य सुरक्षा की चर्चा किसानों के बिना अधूरी है। मछुआरे, पशुपालक और वन संसाधनों पर निर्भर समुदाय भी हमारी भोजन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। महिलाओं और आदिवासी समुदायों के पास खेती, बीज संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का पीढ़ियों से संचित अनुभव है। लेकिन संसाधनों, तकनीक, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता तक उनकी पहुंच अब भी सीमित है।

एक ही आकार के खेतों पर महिलाओं द्वारा संचालित कृषि में भूमि उत्पादकता पुरुषों द्वारा संचालित कृषि की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत कम पाई गई है। इस अंतर के पीछे संसाधनों और अवसरों की असमान उपलब्धता प्रमुख कारणों में शामिल है। महिलाओं को बराबर अवसर देना न केवल न्याय का सवाल है, बल्कि खाद्य उत्पादन बढ़ाने का भी प्रभावी तरीका है। वहीं, दुनिया में 15 से 24 वर्ष की उम्र के लगभग 1.3 अरब लोग कृषि और खाद्य प्रणालियों से जुड़े हैं। युवाओं की ऊर्जा, तकनीकी समझ और नए विचार इस क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।

भोजन की बर्बादी रोकना भी है समाधान

खाद्य सुरक्षा के लिए अधिक उत्पादन करना ही काफी नहीं है, बल्कि उत्पादित भोजन को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, दुनिया में पैदा होने वाले लगभग 13 प्रतिशत भोजन का नुकसान खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले हो जाता है। इसके अलावा करीब 19 प्रतिशत भोजन खुदरा दुकानों और उपभोक्ताओं के स्तर पर बर्बाद होता है।

बेहतर भंडारण, शीतगृह, परिवहन और खाद्य प्रसंस्करण से इस नुकसान को कम किया जा सकता है। घरों में भी जरूरत के अनुसार भोजन बनाना और बचा हुआ खाना सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। आखिरकार, बचाया गया भोजन भी किसी की भूख मिटाने में योगदान दे सकता है।

जल और मिट्टी बचाना समय की मांग

खेती दुनिया में मीठे पानी के कुल उपयोग का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करती है। ऐसे में ड्रिप इरीगेशन, वर्षा जल संचयन और पानी का समझदारी से उपयोग बेहद जरूरी है। दूसरी ओर, मानवीय गतिविधियों से क्षतिग्रस्त भूमि का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि भूमि है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, पेड़ लगाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग भविष्य की खाद्य जरूरतों के लिए आवश्यक है।

सुरक्षित भोजन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दूषित भोजन के कारण हर साल लगभग 60 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं और करीब 4.2 लाख लोगों की मौत होती है। इसलिए स्वच्छता, खाद्य गुणवत्ता और प्रभावी नियमों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

शून्य भुखमरी का सपना

एफएओ की स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को हुई थी। इसी स्थापना दिवस की याद में विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य-2 वर्ष 2030 तक भुखमरी समाप्त करने, बेहतर पोषण सुनिश्चित करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का संकल्प रखता है।

इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकारों, किसानों, कारोबारियों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भोजन का सम्मान, बर्बादी पर रोक और खेती में नवाचार केवल विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत हैं। आज उठाया गया हर छोटा कदम कल किसी की थाली में पौष्टिक भोजन और जीवन में नई उम्मीद ला सकता है। क्योंकि बेहतर भविष्य की शुरुआत हमारी आज की थाली और आज के फैसलों से होती है।