भारत वैश्विक नारियल उत्पादन में 30.37 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है।
देश में करीब 21.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती होती है और सालाना 2,137.362 करोड़ नारियल का उत्पादन होता है।
नारियल खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों से करीब 3 करोड़ लोग जुड़े हैं, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं।
सरकार ने नारियल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए बजट 2026-27 में नारियल प्रोत्साहन योजना की घोषणा की।
उच्च मूल्य वाली कृषि के लिए 350 करोड़ रुपये के आवंटन में नारियल के साथ काजू और कोको भी शामिल हैं।
नारियल केवल खाने-पीने की चीज नहीं है, बल्कि यह खेती, रोजगार, पोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल दो सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नारियल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़े किसानों तथा लोगों की आजीविका को सामने लाना है। साल 2026 में अंतरराष्ट्रीय नारियल समुदाय ने विश्व नारियल दिवस की थीम “अनिश्चितता के समय में नारियल : खाद्य, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” रखी है।
नारियल पानी को लेकर बढ़ी लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में नारियल पानी एक लोकप्रिय प्राकृतिक पेय के रूप में सामने आया है। खासकर गर्मी के मौसम और व्यायाम के बाद लोग इसे पसंद करते हैं। नारियल पानी में पानी के साथ प्राकृतिक रूप से पोटैशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट पाए जाते हैं। ये शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि नारियल पानी हर स्थिति में सादे पानी से बेहतर है। रोजमर्रा की सामान्य प्यास और शरीर में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए सादा पानी आज भी सबसे आसान और अच्छा विकल्प है। नारियल पानी का फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति इसे कब, क्यों और कितनी मात्रा में पी रहा है।
खेल या लंबे समय तक शारीरिक मेहनत के दौरान शरीर से पसीने के साथ पानी और कुछ खनिज बाहर निकलते हैं। ऐसे समय में इलेक्ट्रोलाइट वाला पेय उपयोगी हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में इसकी जरूरत एक जैसी नहीं होती। इसलिए नारियल पानी को स्वास्थ्य के लिए जरूरी पेय मानना सही नहीं होगा।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नारियल उत्पादक
कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के द्वारा 17 मार्च, 2026 में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, नारियल उत्पादन में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वैश्विक नारियल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 30.37 प्रतिशत है। दुनिया में नारियल की खेती करीब 1.239 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। इसमें भारत का हिस्सा लगभग 21.65 लाख हेक्टेयर है।
देश में हर साल करीब 2,137.362 करोड़ नारियल का उत्पादन होता है। औसत उत्पादकता लगभग 9,871 नारियल प्रति हेक्टेयर है। इससे पता चलता है कि नारियल भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
तीन करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी
नारियल की खेती से केवल किसान ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में दूसरे लोग भी जुड़े हैं। करीब तीन करोड़ लोग नारियल पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं। इनमें लगभग एक करोड़ किसान शामिल हैं। खेती के अलावा नारियल से जुड़े प्रसंस्करण, व्यापार, परिवहन और अन्य गतिविधियों से भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है।
इस वजह से नारियल की उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय को मजबूत करना सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण विषय है।
नारियल उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में नारियल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नारियल प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। योजना का उद्देश्य नारियल के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है। इसके तहत पुराने और कम उत्पादन देने वाले पेड़ों को हटाकर नए पौधे और बेहतर किस्मों के पौधे लगाने जैसे उपाय किए जाएंगे।
यह योजना देश के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में उत्पादन को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम करेगी। यह पहल उच्च मूल्य वाली कृषि के लिए घोषित 350 करोड़ रुपये के व्यापक आवंटन का हिस्सा है, जिसमें नारियल के साथ काजू और कोको भी शामिल हैं।
हालांकि योजना के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए धनराशि के आवंटन और उपयोग का अंतिम विवरण अभी तय नहीं हुआ है। सरकार के अनुसार योजना अभी तैयार किए जाने की प्रक्रिया में है।
स्वास्थ्य से आगे नारियल का महत्व
विश्व नारियल दिवस हमें याद दिलाता है कि नारियल का महत्व केवल नारियल पानी या भोजन तक सीमित नहीं है। यह लाखों किसानों के लिए आय का साधन और करोड़ों लोगों के लिए रोजगार का आधार है। साथ ही, नारियल का उपयोग तेल, खाद्य पदार्थों और कई रोजमर्रा की वस्तुओं में किया जाता है।
ऐसे समय में जब कृषि क्षेत्र मौसम, बाजार और अन्य अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है, नारियल खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि साल 2026 की विश्व नारियल दिवस की थीम नारियल को सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि खाद्य, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखने पर जोर देती है।