दुनिया भर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भले ही अक्टूबर 2026 में कुल मिलाकर गिरावट आई हो, लेकिन चीनी और कुछ वनस्पति तेलों की बढ़ती कीमतें चिंता बढ़ा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी लगातार चौथे महीने महंगी हुई और एक साल में इसके दाम 28.8 फीसदी बढ़ गए। वहीं, सोयाबीन तेल की कीमतें 2022 के अंत के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक, ब्राजील में बारिश से गन्ने की कटाई और पेराई प्रभावित हुई है। इसके अलावा भारत सहित प्रमुख उत्पादक देशों में चीनी उत्पादन को लेकर चिंताओं ने भी कीमतों में तेजी बढ़ाई है।
एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक अक्टूबर में औसतन 133.9 अंक रहा। यह सितंबर के संशोधित स्तर से 1.6 अंक यानी 1.2 फीसदी कम है। हालांकि, पिछले साल अक्टूबर की तुलना में यह अब भी 5.9 फीसदी अधिक है। मार्च 2022 में दर्ज अपने सर्वोच्च स्तर से यह सूचकांक 16.4 फीसदी नीचे है।
यह सूचकांक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार होने वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हर महीने होने वाले बदलाव को मापता है।
गेहूं और मक्के के दाम घटे, चावल महंगा हुआ
एफएओ का अनाज मूल्य सूचकांक सितंबर की तुलना में अक्टूबर में 4.5 फीसदी गिर गया। लगातार चार महीने की बढ़ोतरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में कमी आई। इसकी प्रमुख वजह वैश्विक मांग का कमजोर रहना और अर्जेंटीना में उत्पादन की बेहतर संभावनाएं हैं। काला सागर क्षेत्र से निर्यात संबंधी बाधाएं कम होने की उम्मीद ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। हालांकि, वहां परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था में जारी रुकावटों के कारण गिरावट सीमित रही।
सितंबर में तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के बाद मक्के की कीमतों में भी कमी आई। अमेरिका में फसल कटाई के कारण बाजार में आपूर्ति बढ़ने और दक्षिण अमेरिका के प्रमुख निर्यातक देशों में पर्याप्त उत्पादन की उम्मीद ने कीमतों को नीचे लाने में भूमिका निभाई।
इसके विपरीत, अक्टूबर में चावल मूल्य सूचकांक 1.6 फीसदी बढ़ गया। चावल निर्यात करने वाले कुछ देशों में कटाई में देरी, प्रतिकूल मौसम और बढ़ती लागत इसकी प्रमुख वजहें रहीं।
सोयाबीन और सूरजमुखी तेल महंगे
वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक में अक्टूबर के दौरान 0.3 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई। सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने रेपसीड तेल की कीमतों में गिरावट की भरपाई कर दी।
सोयाबीन तेल की कीमतें 2022 के अंत के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। जैव ईंधन क्षेत्र से मजबूत मांग और दक्षिण अमेरिका में मौसमी रूप से आपूर्ति घटने से कीमतों में तेजी आई। वहीं, काला सागर क्षेत्र से सूरजमुखी तेल का निर्यात सीमित रहने के कारण इसकी कीमतों में भी उछाल आया।
मांस और डेयरी उत्पादों की कीमतें घटीं
अक्टूबर में मांस मूल्य सूचकांक सितंबर की तुलना में 1.2 फीसदी गिर गया। सूअर, भेड़ और गोमांस की कीमतों में कमी आई, जबकि मुर्गे के मांस की कीमतें लगभग स्थिर रहीं।
डेयरी मूल्य सूचकांक में भी 1.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पर्याप्त आपूर्ति और कमजोर मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्खन और पनीर की कीमतें घटीं। हालांकि, दूध पाउडर की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही।
चीनी की कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी
चीनी मूल्य सूचकांक अक्टूबर में सितंबर की तुलना में 6.6 फीसदी बढ़ गया। पिछले एक साल में इसमें 28.8 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह दिसंबर 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
ब्राजील के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र सेंटर-साउथ में बारिश के कारण गन्ने की कटाई और पेराई प्रभावित हुई। इसके अलावा भारत, यूरोपीय संघ और थाईलैंड में 2026-27 के दौरान चीनी उत्पादन की संभावनाओं को लेकर चिंताओं ने भी कीमतों में तेजी को बढ़ावा दिया।
दुनिया में अनाज उत्पादन दूसरे सर्वोच्च स्तर पर रहने का अनुमान
एफएओ के नए आकलन के मुताबिक, 2026 में वैश्विक अनाज उत्पादन 2,999 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह 2025 के रिकॉर्ड उत्पादन से कम होगा, लेकिन अब तक का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादन होगा। गेहूं के उत्पादन में सबसे अधिक गिरावट की आशंका है, जबकि मोटे अनाज के उत्पादन में मामूली कमी आ सकती है।
चार सीजन में पहली बार चावल उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान है। इसका उत्पादन 2.5 फीसदी घटकर 552 मिलियन टन रह सकता है। इसकी वजह उत्पादकों को मिलने वाला कम मुनाफा और अल नीनो से जुड़ी प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां हैं।
2026-27 में वैश्विक अनाज खपत 0.2 फीसदी बढ़कर 2,971 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वहीं, वैश्विक अनाज भंडार में 1.8 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय अनाज व्यापार 3.3 फीसदी घटकर 507.7 मिलियन टन रहने का अनुमान है। गेहूं के व्यापार में 8.6 फीसदी की गिरावट इसकी प्रमुख वजह होगी।
41 देशों को खाद्य सहायता की जरूरत
एफएओ की नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 41 देशों और क्षेत्रों को अब भी बाहरी खाद्य सहायता की जरूरत है। इनमें 31 देश अफ्रीका में हैं।
कम आय और खाद्य की कमी से जूझ रहे देशों में 2026 का कुल अनाज उत्पादन लगभग 126.5 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह 2025 के उत्पादन और पिछले पांच वर्षों के औसत से करीब 2 फीसदी अधिक है। इस वृद्धि में एशिया, खासकर पश्चिम एशिया में उत्पादन की बेहतर स्थिति की प्रमुख भूमिका है।
एफएओ के मुताबिक, गंभीर खाद्य असुरक्षा की सबसे बड़ी वजहें अब भी युद्ध, संघर्ष और असुरक्षा हैं। इसके साथ ही शक्तिशाली अल नीनो से जुड़ी मौसमी घटनाएं कई क्षेत्रों में हालात बिगाड़ रही हैं। आशंका है कि इसका असर 2027 तक कृषि उत्पादन पर बना रहेगा, जिससे खाद्य असुरक्षा और बढ़ सकती है।