भोजन की बर्बादी से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 10 प्रतिशत तक योगदान और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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105 करोड़ टन भोजन बर्बाद, 67.3 करोड़ लोग भूखे, खाद्य संकट और पर्यावरण पर बढ़ता दबाव

विश्व सफाई दिवस: खाने की बर्बादी रोकने से साफ शहर, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर खाद्य व्यवस्था की ओर बढ़ेगा दुनिया का कदम

Dayanidhi

  • विश्व सफाई दिवस 2026 में भोजन की बर्बादी रोकने और साफ, टिकाऊ शहर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

  • दुनिया में हर साल करीब 105 करोड़ मीट्रिक टन भोजन बर्बाद होता है, जो उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का 19 प्रतिशत है।

  • वर्ष 2024 में करीब 67.3 करोड़ लोग भूख से प्रभावित रहे, जबकि 2.3 अरब लोग खाद्य असुरक्षा का सामना करते रहे।

  • भोजन की बर्बादी से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 10 प्रतिशत तक योगदान और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता है।

  • घर, बाजार, होटल और स्थानीय निकाय मिलकर भोजन की बर्बादी घटाएं, जैविक कचरे का उपयोग बढ़ाएं और टिकाऊ शहर बनाएं।

हर साल 20 सितंबर को विश्व सफाई दिवस यानी वर्ल्ड क्लीनअप डे मनाया जाता है। साल 2026 में इस दिवस का मुख्य विषय भोजन की बर्बादी पर केंद्रित है। “साफ प्लेटों से साफ शहरों तक” की थीम के जरिए लोगों का ध्यान इस बात पर दिलाया जा रहा है कि भोजन की बर्बादी केवल घर की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शहरों, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा से भी है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया में हर दिन एक अरब से अधिक भोजन बर्बाद हो जाते हैं। दूसरी ओर, करोड़ों लोग पर्याप्त भोजन और पोषण से वंचित हैं। ऐसे में भोजन की बर्बादी का आंकड़ा केवल कचरे की मात्रा नहीं बताता, बल्कि संसाधनों और मानवीय जरूरतों के बीच मौजूद बड़ी असमानता को भी सामने लाता है।

एक साल में 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024 के अनुसार, साल 2022 में दुनिया भर में करीब 105 करोड़ मीट्रिक टन भोजन बर्बाद हुआ। इसमें घरों, होटल-रेस्तरां और खुदरा क्षेत्र से निकलने वाला भोजन शामिल है। यह उस समय उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कुल भोजन का लगभग 19 प्रतिशत था।

भोजन की बर्बादी का सबसे बड़ा हिस्सा घरों से जुड़ा है। इसके अलावा होटल, रेस्तरां, दुकानों और अन्य खाद्य सेवाओं में भी बड़ी मात्रा में भोजन कूड़े में चला जाता है। इसका मतलब है कि भोजन की बर्बादी कम करने के लिए केवल सरकारों ही नहीं, बल्कि आम लोगों, कारोबारियों और स्थानीय निकायों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है।

भूख और बर्बादी साथ-साथ

दुनिया में भोजन की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद भूख की समस्या बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, 2024 में करीब 67.3 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे थे। वहीं लगभग 2.3 अरब लोग मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित थे।

ये आंकड़े बताते हैं कि भोजन की बर्बादी और खाद्य असुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े मुद्दे हैं। हालांकि बर्बाद भोजन को सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन भोजन की बर्बादी रोकना उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित कर सकता है।

पर्यावरण पर भी पड़ता है असर

भोजन की बर्बादी का असर कूड़ेदान तक सीमित नहीं रहता। भोजन पैदा करने में जमीन, पानी, ऊर्जा, श्रम और परिवहन जैसे संसाधनों का इस्तेमाल होता है। जब भोजन बर्बाद होता है तो इन संसाधनों का भी एक हिस्सा बेकार चला जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, खाद्य हानि और बर्बादी से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 10 प्रतिशत तक का योगदान हो सकता है। इसके अलावा, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल करीब 1 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है।

समाधान घर और शहर दोनों स्तरों पर

भोजन की बर्बादी रोकने की शुरुआत घर से की जा सकती है। जरूरत के अनुसार भोजन खरीदना, बचा हुआ भोजन सुरक्षित रखना और उसका दोबारा उपयोग करना छोटे लेकिन प्रभावी कदम हैं। होटल और रेस्तरां भी भोजन की मात्रा का बेहतर अनुमान लगाकर और अतिरिक्त भोजन के उचित प्रबंधन के जरिए बर्बादी घटा सकते हैं।

शहरों में स्थानीय निकायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खाद्य कचरे को अलग-अलग एकत्र करना, जैविक कचरे से खाद या अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करना और कचरे को स्रोत पर ही अलग करने की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

2030 का लक्ष्य

भोजन की बर्बादी कम करना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-12, यानी जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन, से सीधे जुड़ा है। इसके लक्ष्य 12.3 में 2030 तक खुदरा और उपभोक्ता स्तर पर प्रति व्यक्ति वैश्विक खाद्य बर्बादी को आधा करने की बात कही गई है।

विश्व सफाई दिवस 2026 का संदेश स्पष्ट है कि साफ शहर केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई से नहीं बनेंगे। इसके लिए भोजन और अन्य संसाधनों के इस्तेमाल में भी जिम्मेदारी जरूरी है। यदि घरों, बाजारों, होटल-रेस्तरां और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर भोजन की बर्बादी कम की जाए, तो इससे कचरा घटाने के साथ संसाधनों की बचत और अधिक टिकाऊ शहर बनाने में भी मदद मिल सकती है।