दिल्ली विकास प्राधिकरण के अरावली बायोडाइवर्सिटी पार्क में पुनर्नस्थपित किया गया कुल्लु प्रभत्व वन: फोटो डॉ. फैयाज ए. खुदसर 
पर्यावरण

एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को दोहराया, पार्क में एक महीने में 10 दिन से ज्यादा नहीं हो सकता कोई कार्यक्रम

डीपीसीसी की एक निरीक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि पार्क में किया जा रहा था कूड़े-कचरे की डंपिंग

Vivek Mishra

अक्सर पार्क का उपयोग अन्य गतिविधियों और कूड़े-कचरे के लिए लोग करते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही अपने आदेश में यह कह चुका है कि पार्कों का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए एक माह में 10 दिनों से अधिक नहीं किया जा सकता तथा ऐसे आयोजनों के लिए पेड़ों की कटाई भी प्रतिबंधित है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ मामले में दिए गए इस दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में पार्क में अन्य गतिविधि और कूड़े-कचरे की डंपिंग से जुड़ी की एक याचिका का निस्तारण किया है।

रोहिणी सेक्टर-20 स्थित पुलिस स्टेशन के पास स्थित एक जिला पार्क के दुरुपयोग से संबंधित आरोप याचिका एनजीटी में याचीकर्ता नवीन कुमार लोहान की तरफ से लगाई गई थी। आरोप था कि पार्क का उपयोग निर्धारित सीमा से अधिक दिनों तक गैर-मनोरंजक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

हालांकि, एनजीटी के चेयरमैन व न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की निरीक्षण रिपोर्ट में पाया कि स्थल पर कोई गतिविधि नहीं चल रही थी, लेकिन वहां ठोस कचरे का ढेर, आवारा पशु और हरियाली का अभाव देखा गया।

एनजीटी ने नगर निगम दिल्ली को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर स्थल से कचरा हटाए। इस आदेश की प्रति आयुक्त, एमसीडी को अनुपालन हेतु भेजी गई है।

निर्देशों के साथ एनजीटी द्वारा मामला निस्तारित कर दिया गया।