द्वारका स्थित इंटीग्रेटेड मल्टी-स्पोर्ट्स एरिना परियोजना, फोटो द्वारा ओमेक्स डॉट कॉम 
पर्यावरण

एनजीटी ने खारिज की मल्टी स्पोर्ट्स एरिना की डिम्ड मंजूरी, कहा इसका सहारा लेकर पर्यावरण कानूनों से नहीं बचा जा सकता

पीठ ने कहा निर्माण से पहले पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य, साथ ही परियोजना में अवैध पेड़ कटाई पर जांच और कार्रवाई के दिए निर्देश

Vivek Mishra

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी के द्वारका क्षेत्र में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी-स्पोर्ट्स एरिना परियोजना को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अधिकरण ने परियोजना प्रस्तावक द्वारा किए गए “डिम्ड एनवायरनमेंट क्लियरेंस” के दावे को खारिज करते हुए पर्यावरणीय उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इस परियोजना के प्रस्तावक वर्ल्डस्ट्रीट स्पोर्ट्स सेंटर लिमिटेड और ओमेक्स लिमिटेड हैं। द्वारका स्पोर्ट्स एरिना प्रोजेक्ट (ओमेक्स स्टेट) सेक्टर 19बी में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर विकसित किया जा रहा एक अत्याधुनिक फाइव-इन-वन डेस्टिनेशन है। इस परियोजना में 30,000 की क्षमता वाला क्रिकेट-फुटबॉल स्टेडियम, रिटेल, होटल और स्पोर्ट्स सुविधाएं (स्विमिंग, बैडमिंटन) शामिल हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि परियोजना को अब तक केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली है। परिवेश पोर्टल पर इसकी स्थिति में आवश्यक दस्तावेज अभी लंबित हैं।

डिम्ड एनवायरनमेंट क्लियरेंस” कोई अलग मंजूरी नहीं, बल्कि एक सीमित कानूनी स्थिति है जिसे सिर्फ तभी माना जा सकता है जब पर्यावरणीय मंजूरी की सभी शर्तें पूरी तरह पूरी हो चुकी हों।

एनजीटी ने पर्यावरण पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना 2006 के क्लॉज 8(iii) के तहत “डिम्ड ईसी” के दावे को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह प्रावधान तभी लागू होता है जब आवेदन पूरी तरह से जमा किया गया हो, सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हों और विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) की स्पष्ट और बिना शर्त सिफारिश हो।

एनजीटी ने अपने आदेश में कई गंभीर उल्लंघनों की ओर इशारा किया। पीठ ने कहा ईएसी  की सिफारिश शर्तों के साथ थी, जिसमें लगभग 2000 पेड़ों की कटाई से पहले अनुमति लेना अनिवार्य था। बिना अनुमति पेड़ों की कटाई के प्रमाण, जिनमें सैटेलाइट इमेजरी भी शामिल है, सामने आए हैं। परियोजना स्थल पर अनधिकृत निर्माण गतिविधियां भी पाई गई हैं।

अधिकरण ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा डिम्ड क्लियरेंस’ का उपयोग पर्यावरणीय कानूनों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी दोहराया कि किसी भी निर्माण कार्य से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य है।

पीठ ने आदेश में कहा, “2006 की ईआईए अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है परियोजनाएं और गतिविधियां तभी निर्माण कार्य प्रारंभ करें जब परियोजना प्रस्तावक ने पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त कर ली हो। इसी कारण अधिसूचना के पैरा 2 में नियामक प्राधिकरण से पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।”

पीठ ने कहा, “2006 की अधिसूचना की संपूर्ण व्यवस्था इस अनिवार्य शर्त में किसी प्रकार की ढील या छूट का प्रावधान नहीं करती है। अतः यह स्पष्ट और निर्विवाद कानूनी दायित्व है कि परियोजना प्रस्तावक किसी भी प्रकार की परियोजना संबंधी गतिविधि शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करे।”

इसके साथ ही पीठ ने आदेश में कहा, “डिम्ड परमिशन” नियमों और विनियमों के विपरीत नहीं हो सकती। साथ ही यह भी कहा गया कि कोई भी “डिम्ड परमिशन” संबंधित नियमों और विनियमों के खिलाफ जाकर मान्य नहीं हो सकती।”

बहरहाल एनजीटी ने ट्री ऑफिसर और डीएफओ को तत्काल साइट निरीक्षण कर अवैध पेड़ कटाई की जांच करने और 8 सप्ताह में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को परियोजना में उल्लंघनों का आकलन कर दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा है। वहीं, पीठ ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को परियोजना पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश भी दिया है।

पीठ ने मामले में प्राधिकरणों को तीन महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश देते हुए मामले का निस्तारण कर दिया है।