झज्जर के लधु सचिवालय पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। फाइल फोटो 
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एथेनॉल प्लांट के खिलाफ क्यों हैं ग्रामीण: झज्जर में भी हो रहा है विरोध

झज्जर जिले के गांव गोरिया के लोगों का कहना है कि एनटीपीसी के संयंत्र के कारण उनके गांव की जमीन का बड़ा हिस्सा दलदल बन चुका है। अब एथेनॉल प्लांट से भूजल स्तर पर भी असर पड़ेगा

Anil Ashwani Sharma

“हमारा गोरिया गांव (झज्जर जिला, हरियाणा) देश में एक ऐसे गांव के रूप में विख्यात है, जहां से तीन-तीन ओलंपिक पदक देश को मिले हैं, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में हमारे गांव की आधी आबादी अपने गांव के पुश्तैनी घर को छोड़कर अपने-अपने खेतों में रहने पर मजबूर है और अब तो हमारे ऊपर इन खेतों से भी बेदखल होने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि हमारे खेतों के बीचोबीच एथेनाल संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।”

यह बात गांव के पूर्व सरपंच हवा सिंह ने डाउन टू अर्थ से कही। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही हमारा आधा गांव एनटीपीसी संयंत्रों के कारण दलदली हो चुका है और अब बच रहे आधे गांव की रोजीरोटी कहे जाने वाले खेत में एथेनाल संयंत्र लगाने से गांव का भू-जल भी प्रदूषित हो जाएगा।

गांव के बुजुर्ग धर्मवीर सिंह कहते हैं कि ऐसे में आखिर हम ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां, सरकारी संयंत्र स्थापित हुए तो हमारा आधा गावं खत्म हो गया और अब खेत में ही निजी एथेनाल संयंत्र स्थापित होने की शुरूआत हो रही है, ऐसे में तो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए हमारे गांव का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।  

प्रस्तावित संयंत्र खेतों के बीच स्थापित किया जा रहा है और इसके तीन ओर चार से पांच स्कूल भी स्थित हैं, इसके अलावा गोरिया गांव की आधी आबादी अब खेतों में रह रही है। गांव के ही निवसी राजवीर सिंह ने खेतों की ओर इशारा करते हुए कहा कि खेतों में जिन किसानों ने अपने घर बनाए हैं, उनके लिए तो पेयजल से लेकर सिंचाई के लिए पानी तक का संकट खड़ा हो सकता है क्योंकि हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि एथेनाल संयंत्र के लिए पानी की बहुत अधिक जरूरत होती है।

ध्यान रहे कि गत 20 मई 2025 को गोरिया गांव में एथेनाल संयंत्र स्थापित करने के लिए बिना ग्रामीणों को पूर्व में सूचना दिए प्रशासन द्वारा जनसुनवाई आयोजित की गई थी।

इस संबंध में गांव के पूर्व संरपंच हवा सिंह ने डाउन टू अर्थ को बताया कि उस दिन खेतों में काम कर रहे मुश्किल से सात-आठ किसानों से ही बातचीत कर जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर ली गई और कहा गया कि ग्रामीणों को इस संयंत्र से किसी  प्रकार की परेशानी नहीं है।

वह कहते हैं कि हमने इसके खिलाफ दूसरे ही दिन 21 मई को ही ग्राम सभा आयोजित की और इसमें लगभग 800 सौ ग्रामीण शामिल हुए और फैसला हुआ कि गांव में किसी भी सूरत में एथेनाल संयंत्र नहीं लगने देंगे।

ग्राम सभा के आयोजन के बाद ग्रामीणों ने तीन दिन बाद ही गोरिया गांव के आसपास के 8 गांवों की महापंचायत का आयोजन किया गया। आठ गांव की महापंचायत में निर्णय लिया गया कि एथेनाल संयंत्र किसी भी हाल में गोरिया गांव के खेतों में स्थापित नहीं होगा। आठ गांव के सरपंचों ने जिला मुख्यालय जाकर इस संबंध में अपनी शिकायत भी दर्ज कराई।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एथेनॉल प्लांट का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। फोटो: अनिल अश्विनी शर्मा

गांव के एक अन्य पूर्व सरपंच विकास सिंह ने बताया कि गोरिया गांव में प्रस्तावित एथेनॉल के-2 प्लांट के  विरोध में ग्रामीणों ने उपायुक्त झज्जर को ज्ञापन  दिया। ग्रामीणों ने बताया कि इस संयंत्र के लगने से पर्यावरण, जल स्रोतों और आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका है।

ग्रामीणों की बात को गंभीरता से सुनते हुए उपायुक्त झज्जर ने उन्हें पूरा आश्वासन दिया कि जल्द ही सेंट्रल ग्राउंड वाटर, चेंज ऑफ लैंड यूज सर्टिफिकेट (सीएलयू) और एनजीटी से जांच कराएंगे। लेकिन अब तक किसी प्रकार की जांच नहीं हुई है।

गांव के बुजुर्ग किसान ओमवीर बताते हैं कि गत 20 मई 2025 को गांव के खेतों के बीच ही एथेनॉल संयंत्र स्थापित होने की सूचना जब हम ग्रामीणों को मिली और हम सभी वहां एकत्र होकर संयंत्र के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और वहीं पर धरना देकर बैठ गए।

उन्होंने डाउन टू अर्थ को बताया कि जहां संयंत्र लगाया जा रहा है पूर्व में हम ग्रामीणों को बताया गया था कि वहां गिट्टी की फैक्टरी लगाई जाएगी लेकिन अचानक ही ग्रामीणों ने देखा कि यहां तो बकायदा एथेनाल संयंत्र स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।

ध्यान रहे कि संयंत्र के उदघाटन के दिन जब ग्रामीणों ने काले झंडे दिखाए तो पुलिस ने उनको उद्घाटन स्थल से जोरजबरदस्ती से खदेड़ दिया गया था। इसके बाद भी ग्रामीण जब तक यह प्रदर्शन आज तक करते चले आ रहे हैं लेकिन अब तक संयंत्र बंद होने के आसार ग्रामीणों को नहीं दिख रहे हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हम इसे बंद नहीं करवाते तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा।

एथेनाल संयंत्र के स्थापित होना वाला गोरिया गांव झज्जर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर है और यह लगभग 1,200 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ एक बड़ा है। हालांकि इस गांव का आधा हिस्सा अब दलदल में तब्दील हो चुका है।

कारण कि इस गांव के एक ओर तो तीन-तीन एनटीपीसी के कारखाने स्थित हैं और उसके कारण गांव के एक ओर लंबी-चौड़ी मेड़ बनी हुई है और गांव के बीचोबीच से सड़क निकलती हैं।

इसके कारण गांव में बारिश के पानी को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता। हालांकि प्रशासन की तरफ से गांव के दलदली वाले इलाके में पंप लगाया गया है अतिरिक्त पानी निकासी के लिए लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसकी क्षमता इतनी नहीं है कि वह आधे गांव में भरे पानी को बाहर निकाल सके।

यही कारण कि गांव के आधे हिस्से में बने घर पूरी तरह से दलदल में फंसे हुए हैं और इनमें इतनी अधिक सीलन आती है कि इन घरों में रहना असंभव है। यही कारण है कि बीतों सालों से इस दलदल  से परेशान ग्रामीणों ने मजबूर होकर अपने मूल घर को छोड़कर अपने-अपने खेतों में ही अपना बसेरा बनाना मुनासिफ समझा। लेकिन अब खेत के बीचोबीच एथेनाल संयंत्र के स्थापित होने कारण उनके सामाने फिर संकट खड़ा हो गया है।