छत्तसीगढ़ के ग्रामीण एथेनॉल प्लांट का विरोध करते हुए, फोटो : सिद्दीक खान 
ऊर्जा

एथेनॉल संयंत्रों का इसलिए ग्रामीण कर रहे विरोध

ग्रामीणों का कहना है कि एथेनॉल संयंत्र के चलते खेती-किसानी के लिए पानी का संकट खड़ा हो जाएगा

Anil Ashwani Sharma

छत्तीसगढ़ के बमेतरा जिले में स्थापित हो रहे एथेनाल संयंत्रों के खिलाफ स्थानीय ग्रामीण पिछले चार सालों से आंदोलनरत हैं। संयंत्रों के कारण ग्रामीणों की न केवल उपजाऊ जमीन अधिग्रहित की जा रही है बल्कि संयंत्रों से जल संकट से लेकर भू-जल प्रदूषित होने की आशंका भी ग्रामीण जता रहे हैं। डाउन टू अर्थ ने राकां और पथर्रा गांव के लोगों की मांगें जानी और समझी..पढ़िए दूसरी किश्त..  

राकां गांव में पिछले चार सालों से एथेनाल संयंत्र के खिलाफ आंदोलन कर रहे सिद्दीक खान कहते हैं कि  पिछले कुछ सालों से छत्तीसगढ़ में किसानों को धान उगाने के लिए बढ़ावा मिल रहा है। ध्यान रहे कि धान का उत्पादन 2009-10 में 4.11 मिलियन टन था, जो कि 2022-23 में 10.5 मिलियन टन हो गया। खान बताते हैं, “हमारे यहां धान रोपी जाती है और ऐसे में बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है और हम सभी यह जानते हैं कि एक किलो धान के लिए लगभग 25 से 3000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, ऐसे में एथेनाल संयंत्र लगने से हमारे खेतों में पानी कहां से आएगा अधिकांश पानी तो यह संयंत्र ही गटक जाएगा।”  

सिद्दीक खान ने बताया कि यही नहीं यहां के जिला कलेक्टर ने तो हमारे साथ शोषण की सभी हदें पार कर दीं थीं। वह बताते हैं कि पिछले साल जिला कलेक्टर ने 29 अक्टूर 2025 को हमारे इलाके में हम किसानों को संबोधित करता हुआ एक सर्कुलर जारी किया। ध्यान रहे कि इसमें कहा गया था कि जिले में 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि पर आधारित है। जिले का कुल रकबा 2.25 लाख हेक्टेयर है और इसमें 2.05 लाख हेक्टेयर में धान की फसल ली जाती है। सर्कुलर में आगे बताया गया है कि धान की फसल में पानी की अत्याधिक मात्रा का उपयोग किया जाता है। एक किलो धान के लिए 2500 से 3000 लीटर पानी खर्च होता है। इसके उपयोग से जिले में जल संकट की स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में जिले की चार विकास खंड की 425 ग्राम पंचायतों ने स्वत: निर्णय लिया है कि आगामी ग्रीष्कालीन धान की फसल वे नहीं लगाएंगे। जबकि सिद्दिक खान कहते हैं कि इस प्रकार का निर्णय हमारे यहां किसी भी पंचायत ने नहीं लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि हमारे द्वरा बचाए गए पानी को प्रशासन संयंत्र को देना चाहता था।

बंधोपद्धायाय बताते हैं कि हमारे देश में आज भी करोड़ों लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है, ऐसे में एथेनाल जरूरी है कि तेल? वह कहते हैं कि जब हम अभी ग्लोबल हंगर इंडेक्स में नीचे के पायदान पर हैं तो ऐेसे में खाने की चीज को तेल में बदलना कहां का न्याय है। इस संबंध में सरपंच निषाद कहते हैं कि तेल के लिए हमारी धान का उपयोग से कभी सतत विकास नहीं होने वाला।

 पिछले चार सालों से ग्रामीण “पर्यावरण बचाओ-प्रदूषण भगाओ” बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अब तक इसमें किसी प्रकार का पदाधिकारी नियुक्ति नहीं गया गया है। इसके पीछे कारण बताते हुए पूर्व जनपद सदस्य सिद्दीक खान ने डाउन टू अर्थ को बताया कि हम ग्रामीणों ने यह निर्णय इसलिए लिया कि आए दिन हमारे द्वारा संयंत्र के खिलाफ किए जाने वाले विरोध-प्रदेर्शन के दौरान प्रशासन हमें गिरफ्तार कर लेती है और कई हफ्तों बाद ही हमें जमानत मिल पाती है, ऐसे में यदि कोई पदाधिकारी नियुक्त होगा तो आंदोलन के संचालन में बाधा आ जाएगी, इसलिए हम सभी आंदोलनाकारी बिना पदाधिकारी के ही यह आंदोलन पिछले चार सालों से अनवरत रूप से चला रहे हैं। खान ने बताया कि राज्य सरकार की पर्यावरण स्वीकृति रिपोर्ट में निकटवर्ती संरक्षित क्षेत्रों की अनुपस्थिति का उल्लेख किया गया है परंतु यह नहीं बताया गया कि राकां गांव में स्थित संयंत्र स्थल कृषि भूमि, एक स्कूल, एक मदरसा और एक नदी से घिरा हुआ है। वह बताते हैं कि इस निकटता के कारण औद्योगिक, वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण से छात्रों, शिक्षकों, किसानों और स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और कृषि उत्पादकता घटने के पूरे आसार हैं। ग्रामीणों को विशेष रूप से चिंता है कि संयंत्र का दूषित पानी गांव के आसपास की भूमि को बंजर बना देगा। राकां गांव के एक अन्य निवासी ओंकारनाथ कहते हैं, “सबसे महत्वपूर्ण बात है कि एथेनॉल की अत्यंत ज्वलनशील प्रकृति को देखते हुए यह संयंत्र आसपास की आबादी, विशेषकर बच्चों और छात्रों के लिए विस्फोट का गंभीर खतरा पैदा करता है] संयंत्र के कारण बढ़ने वाला वाहन यातायात भी किसानों की भूमि तक पहुंच को बाधित करेगा।”

राकां गांव के ग्रामीणों का कहना है कि हमारे गांव में स्थापित हो रहे एथेनाल संयंत्र के लिए भूमि धोखे से प्रशासन के साथ मिलीभगत करके हस्तांतरित की गई है। इस संबंध में गांव के संरपंच निषाद बताते हैं, “प्रारंभ में जानकारी के अभाव के कारण ग्राम पंचायत रांका ने 22 दिसंबर 2021 को प्रस्ताव पारित कर सुयश बायोफ्यूल्स प्रायवेट लिमिटेड को एथेनॉल प्लांट लगाने के संबंध में “अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी)” दिया था परंतु बाद में परिस्थितियों की गंभीरता की जानकारी होने पर ग्राम पंचायत ने अपने प्रस्ताव क्रमांक नौ के तहत 21 जुलाई 2022 द्वारा पूर्व एनओसी को निरस्त कर दिया और साथ ही 22 जुलाई 2022 को इसकी जानकारी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को सूचित किया गया।” लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा रद्द किए गए एनओसी के बावजूद एसडीएम बेरला ने 26 अगस्त 2022 को परियोजना के लिए भूमि परिवर्तन (डाइवर्शन) की अनुमति दे दी गई। आदेश में यह स्वीकार किया गया कि ग्राम पंचायत ने एनओसी वापस ले ली है, फिर भी आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जीरो लिक्विड डिशचार्ज (जेडएलडी) इकाई “गैर-प्रदूषण इकाई” होती है। यह तर्क न सिर्फ ग्राम पंचायत की आपत्तियों की प्रकृति की गलत समझ प्रदर्शित करता है बल्कि तकनीकी रूप से भी त्रुटिपूर्ण है क्योंकि जेडएलडी केवल अपशिष्ट जल निकासी से संबंधित है। यह एक प्रवाह प्रबंधन की शर्त है, न कि “गैर-प्रदूषणकारी” होने का प्रमाण पत्र।

प्रशसन द्वारा राकां गांव के साथ की जा रही धोखाधड़ी यहीं नहीं रुकी। अब प्रशासन ने एक और प्रमुख गलती की और जिले के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ने 15 मई 2024 को कंपनी को शिवनाथ नदी के बूढ़ाजोंग एनीकट से सतही जल उपयोग की अनुमति दे दी, बिना ग्राम पंचायत रांका से परामर्श किए या अनुमति प्राप्त किए। सरपंच निषाद कहते हैं, “संयंत्र ने रद्द किए गए पुराने एनओसी को आधार बनाकर जल संसाधन विभाग के समक्ष जल संबंधी अनुमति के लिए प्रस्तुत किया था, यह पूरी तरह से कपटपूर्ण एवं धोखाधड़ी है।”

राकां ग्राम पंचायत इस एकतरफा अनुमति को चुनौती दे रही है। पंचायत ने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा संयंत्र को जारी स्थापना हेतु सहमति (09 जनवरी 2023) एवं संचालन हेतु सहमति (29 अगस्त 2025) में स्पष्ट शर्त है कि उद्योग को रांका-बूढ़ाजोंग एनीकट से सतही जल के उपयोग हेतु संबंधित नियामक प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करनी होगी। ध्यान रहे कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 49-क (xiii) एवं भारत के संविधान के 73वें संशोधन, ग्यारहवीं अनुसूची (मद-3) के अनुसार ग्राम पंचायत को नदी जल हेतु नियामक प्राधिकरण की शक्ति प्राप्त है। इस संबंध में सिद्दिक खान कहते है, “जल संसाधन विभाग ने ग्राम पंचायत रांका से कोई परामर्श लिए बिना संयंत्र को बूढ़ाजोंग एनीकट से जल उपयोग की अनुमति प्रदान कर दी, जो कि संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।” वह बताते हैं कि छत्तीसगढ़ भूमि परिवर्तन नियम 14 के अंतर्गत किसी औद्योगिक इकाई या औद्योगिक प्रयोजन के लिए किसी ग्राम की आबादी के बाहरी सीमा से 1.5 किलोमीटर अंतर्गत आने वाली भूमि को परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस नियम का उल्लंघन करके एथेनॉल प्लांट की भूमि परिवर्तन की अनुमति दी गई।

राकां गांव के अवध साहू कहते हैं कि एथेनाल संयंत्र से बदबू, जल संकट या जल प्रदूषण ही नहीं हो रहा बल्कि इस संयंत्र के कारण हमारे गांव की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़कें भी आए दिन संयंत्र में आने वाले भारी वाहनों के कारण टू आती हैं। वह बताते हैं कि इन सड़कों पर शासन का 12 टन से ऊपर की गाड़ी चलाने की मनाही का शासन बोर्ड लगा हुआ है लेकिन सड़क पर प्रतिदिन पर 50 से 6o वाहन इससे अधिक वजन का माल लेकर धड़ल्ले से आजा रहे हैं। इसके कारण गांव का रास्ता पूरी तरह से खराब हो चुका है।

निषाद बताते हैं कि जिस प्रकार की धोखाधड़ी हमारे साथ की गई लगभग इसी प्रकार से हमारे पड़ोसी गांव पथर्रा में भी की गई थी। ध्यान रहे कि पथर्रा स्थित प्लांट के लिया भूमि परिवर्तन का आदेश 18 अप्रैल 2022 को दिया गया और आदेश में लिखा गया कि इसके लिए विज्ञापन समाचार पत्र में दिया गया था लेकिन किसी प्रकार की आपत्ति नहीं आई है जबकि आदेश में जिस विज्ञापन की बात की जा रही है वह 19 अप्रैल 2022 को प्रकाशित हुआ और साथ ही यह विज्ञापन एक ऐसे समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ जो कि इस इलाके में आता ही नहीं है।