मध्य प्रदेश की राज्य सरकार यदि राज्य की सरकारी बिजली कंपनियों को 2020-21 के दौरान दी जाने वाली समझौते की राशि (जिसके तहत एक भी यूनिट खरीदे बिना ही देनी पड़ती है) रद्द कर दे तो राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को वर्तमान बिजली दर के मुकाबले उसे तीन रुपए अस्सी पैसे प्रति यूनिट कम देने पड़ेंगे।
यह तथ्य मध्य प्रदेश के विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दायर एक याचिका में सामने आया है। यह याचिका लॉकडाउन शुरू होने के पूर्व लगाइ गई थी लेकिन पिछले तीन माह से इस पर सुनवाई नहीं हुई है। याचिकाकर्ता के अनुसार इस याचिका पर इस माह के अंत में सुनवाई होने की उम्मीद है।
याचिका के अनुसार राज्य की आठ बिजली कंपनियों से एक भी यूनिट बिजली खरीदे बिना उन्हें 3,329 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसके साथ ही इन्हीं कंपनियों में से तीन कंपनियों से अत्यंत महंगी बिजली खरीदी जाएगी। इसकी राशि होगी 2,055 करोड़ रुपए और न खरीदी गई बिजली के भी 516 करोड़ रुपए पॉवर ग्रिड कारपोरेशन को फिक्स चार्ज देना होगा। याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दायर कर अपनी आपत्ति दर्ज कर मांग की है कि इस गैर वाजिब व बिजली उपभोक्ताओं पर बोझ को अस्वीकार कर राज्य के बिजली उपभोक्तओं को वर्तमान बिजजी दर में कमी करने की स्थिति बनाई जाए।
याचिका में अत्यंत महंगी बिजली खरीदी के संबंध में यह भी मांग की गई है कि एनटीपीसी मोदा दो, एनटीपीसी कवास और सिंगरौली कंपनियों से अत्यंत महंगी खरीदी जाएगी। इन तीन कंपनियों से कुल 191 करोड़ यूनिट बिजली का भुगतान 2,055 करोड़ रुपए होगा। ऐसे में जबकी वर्तमान में देश में उपलब्ध सरप्लस बिजली लगभग 2.5 रुपए प्रति यूनिट की दर से आसानी से उपलब्ध है तो इतनी महंगी बिजली खरीद कर बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाला जाएगा।
याचिका में बताया गया है कि राज्य के पास वर्तमान में 10,627 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध है। और प्रदेश की कुल खपत 7,551 करोड़ यूनिट है। इस प्रकार प्रदेश के पास संपूर्ण खपत के बाद भी 3,076 करोड़ यूनिट बिजली सरप्लस के रूप में बच रही है। अत: ऐसे में अत्यंत महंगी 191 करोड़ यूनिट बिजली नहीं खरीदने पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। याचिका में मांग की गई है कि आयोग इन कंपनियों से खरीदी जाने वाली बिजली की मंजूरी न दे।
अंत में याचिकाकर्ता आलोक अग्रवाल ने कहा है कि उपरोक्त बिजली नहीं खरीदने से राज्य सरकार के राजस्व में कुल 5,900 (3845+2055) करोड़ रुपए की बचत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य के घरेलू उपभोक्ता 2020-21 के दौरान लगभग 15600.9 करोड़ यूनिट की खपत करेगा। यदि उपरोक्त राशि यानी 5,900 करोड़ रुपए कंपनियों को न दी जाए तो इस पैसे से उपभोक्ताओं की बिजली दर में 3.80 रुपए प्रति यूनिट तक की कमी संभव है।
बिना एक यूनिट बिजली खरीदे कंपनियों की सूची
क्रमांक विद्युत कंपनी बिना बिजली खरीदे दी जाने वाली राशि
कुल 3,329 करोड़ रुपए