श्रीनगर के पांथा चौक में खड़ी स्मार्ट सिटी की बसें। फोटो: भागीरथ  
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भारत का ई-सफर: ई मोबिलिटी में पिछड़े जम्मू-कश्मीर को पटरी पर लाने की योजना

केंद्र शासित प्रदेश के लिए ईवी पॉलिसी बन रही है और परिवहन सब्सिडी योजना में संशोधन किया जा रहा है ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा सके

Bhagirath

नीति आयोग द्वारा अगस्त 2025 में जारी “इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2024” रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन बहुत खराब था। 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग में जम्मू-कश्मीर 34वें पायदान पर था। इसका स्कोर केवल 20 था। 77 के स्कोर के साथ दिल्ली पहले पायदान पर था।

रिपोर्ट की रैंकिंग ट्रांसपोर्ट सेक्टर के विद्युतिकरण की प्रगति, चार्जिंग सुविधाओं की तैयारी और ईवी पर शोध और नवाचारों पर आधारित थी। जम्मू-कश्मीर इन तीनों मापदंडों पर बहुत पिछड़ गया जिससे उसकी रैंकिंग गिर गई।

अगर उपरोक्त तीनों मापदंडों की रैंकिंग देखें तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर के विद्युतिकरण की प्रगति में जम्मू-कश्मीर को 25, चार्जिंग सुविधाओं की तैयारी में 16 और ईवी पर शोध एवं नवाचारों के मामले में 13 अंक की हासिल हुए।

रिपोर्ट में सुझाव है कि जम्मू-कश्मीर को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के लिए इलेक्ट्रिक वाहन नीति की जरूरत है। यह भी सुझाव है कि ईवी को बढ़ावा देने के लिए गाड़ी को स्क्रैप करने, कन्वर्जन किट, रेट्रोफिटिंग, रिजर्व पार्किंग, कम एमिशन वाले जोन और कमर्शियल ईवी के लिए ज्यादा सब्सिडी जैसे इंसेंटिव दें।

ईवी पॉलिसी तैयार

जम्मू-कश्मीर का परिवहन विभाग अब इन मुद्दों पर ध्यान दे रहा है। जम्मू-कश्मीर के ट्रांसपोर्ट विभाग में सचिव अवनी लवासा ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए डाउन टू अर्थ को बताया कि हमारी ईवी पॉलिसी बन चुकी है। यह पॉलिसी दिल्ली की तर्ज पर बनी है। इसमें निजी वाहनों को ईवी में बदलने के लिए इंसेटिव का प्रावधान है। उनका कहना है कि अभी पॉलिसी पर विभागीय परामर्श जारी है। इसे वित्त विभाग को भेजा गया है। इसके बाद यह अप्रूवल के लिए कैबिनेट में जाएगी। इस पॉलिसी में ऐसे बहुत से प्रावधान हैं जो ईवी को गति दे सकते हैं।

परिवहन सब्सिडी योजना में संशोधन

जम्मू-कश्मीर परिवहन सब्सिडी योजना को 2019 में अधिसूचित किया गया था। इसके तहत पुरानी बसों, मटाडोर, मिनी बसों को बदला जाता है। मौजूदा योजना विभिन्न ईंधन प्रौद्योगिकियों के बीच कोई अंतर नहीं करती और परिवहन के अधिक स्वच्छ साधनों से होने वाले पर्यावरणीय लाभों की परवाह किए बिना एक समान सब्सिडी प्रदान करती है।

इसके अलावा, योजना में पात्र वाहनों में न्यूनतम बैठने की क्षमता निर्धारित नहीं की गई है। लाभार्थियों की संख्या पर कोई वार्षिक सीमा भी नहीं है। योजना में इसके अलावा भी बहुत सी कमियां हैं जो वायु प्रदूषण और स्वच्छ ईंधन को दरकिनार करती है। साथ ही इसमें पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग से संबंधित केवल सामान्य प्रावधान ही हैं।

इन कमियों को दूर करने के लिए योजना में संशोधन किया गया है। अवनी लवासा के अनुसार, हमारा प्रस्ताव है कि इस योजना का लाभ केवल तभी मिले जब वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदला जाए।

संशोधित योजना का उद्देश्य अधिक आयु वाले सार्वजनिक परिवहन वाहनों को बदलने में सुविधा प्रदान करना तथा स्वच्छ ईंधन वाले सार्वजनिक परिवहन वाहनों को बढ़ावा देना है।

संशोधन के जरिए इसे सरकार की उभरती नीतिगत प्राथमिकताओं और पर्यावरणीय उद्देश्यों के अनुरूप बनाया गया है। प्रस्तावित संशोधनों में सुझाव है कि सब्सिडी की पात्रता को केवल स्वच्छ ईंधन वाले यात्री परिवहन वाहनों अर्थात सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित किया जाए।

अवनी लवासा ने बताया कि इसके अलावा हम चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि पीएम ई ड्राइव योजना के तहत जम्मू-कश्मीर को 200 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत हो गई हैं। इनमें 100 बसें जम्मू और 100 श्रीनगर के हिस्से आएंगी। ये बसें ग्रोस कॉस्ट कंट्रोल पद्धति से अनुसार चलेंगी। ये ई बसें राज्य परिवहन निगम के बेड़े शामिल होंगी।

श्रीनगर स्मार्ट सिटी लिमिटेड में आर्किटेक्ट सुहैब नक्शबंदी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि श्रीनगर में इलेक्ट्रिक वाटर ट्रांसपोर्ट की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। उनका कहना है कि स्मार्ट सिटी ने झेलम और डल झील में जेट्टी चलाने की योजना बनाई थी और इसका टेंडर भी हुआ था लेकिन अब यह काम इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अपने हाथ में ले लिया है। नक्शबंदी के अनुसार, अब तक ऐसी व्यवस्था केवल केरल के कोच्चि में है। अगर श्रीनगर में यह शुरू होती है तो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में अनूठी शुरुआत होगी।