सदन में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बोले, ई20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई। फोटो साभार: आईस्टॉक
ऊर्जा

संसद में आज: ई20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की कोई व्यापक शिकायत नहीं, मंत्री ने दी जानकारी

आज, 23 जुलाई, 2026 को लोकसभा व राज्यसभा में बिजली, पर्यावरण, वन अधिकार, एथेनॉल मिश्रण, प्रदूषण जैसे कई अहम मुद्दों पर उठाए गए सवालों का सरकार के मंत्रियों के द्वारा जवाब दिया गया।

Madhumita Paul, Dayanidhi

  • देश में बिजली क्षमता 548.86 गीगावाट पहुंची, विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने संसद में ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धियां बताई।

  • सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बोले, ई20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई।

  • पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया, प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता, बिक्री केवल 0.5 प्रतिशत।

  • जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने बताया, वन अधिकार अधिनियम के तहत 25 लाख से अधिक दावे स्वीकृत।

  • केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पश्चिमी घाट संरक्षण, बुद्धा नाला प्रदूषण और मानस टाइगर रिजर्व पर जानकारी दी।

देश में बिजली की मांग

संसद का मानसून सत्र जारी है। सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, विद्युत मंत्रालय में मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में बताया कि देश में इस समय बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है। जून 2026 तक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 548.86 गीगावाट हो गई है। साल 2014 से अब तक 324.7 गीगावाट नई उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इससे भारत बिजली की कमी वाले देश से बिजली की पर्याप्त उपलब्धता वाले देश में बदल गया है।

इसके साथ ही साल 2014 से जून 2026 तक 2,18,267 सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइन, 9,47,405 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता और 84,390 मेगावाट अंतर-क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता भी बढ़ाई गई है। अब देश की कुल दूसरे इलाकों में ट्रांसमिशन क्षमता 1,20,340 मेगावाट हो गई है। इससे एक क्षेत्र की बिजली दूसरे क्षेत्र तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है।

देश में ई-20 ईंधन से इंजन को नुकसान

ई-20 ईंधन से इंजन को नुकसान को लेकर सदन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने लोकसभा में कहा कि देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का काम तेजी से बढ़ रहा है। कई लोगों ने यह चिंता जताई कि ई20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब हो सकते हैं।

इस विषय पर सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) ने बताया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण बड़े स्तर पर इंजन खराब होने या वाहन बंद होने की कोई व्यापक शिकायत नहीं मिली है। जो बातें सामने आती हैं, वे अधिकतर सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं तक सीमित हैं। देश में ई15 प्लस पेट्रोल का उपयोग पिछले साढ़े तीन सालों से और ई19-ई20 पेट्रोल का उपयोग पिछले ढाई वर्षों से किया जा रहा है।

देश में प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण

सदन में उठाए गए सवाल के जवाब में आज, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि देश में बिकने वाले प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल) का एक्सपी100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) का पॉवर100 और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) का स्पीड 100 बिना एथेनॉल वाले प्रीमियम पेट्रोल हैं।

सामान्य पेट्रोल में सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत अधिकतम 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। देश में बिकने वाले कुल पेट्रोल में प्रीमियम पेट्रोल की हिस्सेदारी केवल 0.5 प्रतिशत है।

वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत मामलों का निपटारा

सदन में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, जनजातीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने लोकसभा में कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वनवासियों को उनके अधिकार देना है। इस कानून को लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है।

दास ने कहा कि मंत्रालय राज्यों से हर महीने प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करता है। यह कानून वर्तमान में 20 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में लागू है। उन्होंने कहा 30 जून 2026 तक कुल 54,01,561 दावे प्राप्त हुए। इनमें से 25,42,359 दावों को मंजूरी देकर अधिकार पत्र दिए गए, जबकि 18,13,232 दावे अस्वीकार कर दिए गए हैं।

पश्चिमी घाट का पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र

सदन में पश्चिमी घाट को लकेर उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि पश्चिमी घाट भारत का एक बहुत महत्वपूर्ण जैव विविधता वाला क्षेत्र है। इसकी सुरक्षा के लिए मंत्रालय ने 31 जुलाई 2024 को एक मसौदा अधिसूचना जारी की।

सिंह ने बताया कि इस प्रस्ताव के अनुसार, 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया जाएगा। यह क्षेत्र गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में फैला हुआ है।

मानस टाइगर रिजर्व में नदी किनारे कटाव

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, इसी बीच एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारी बारिश के कारण मानस टाइगर रिजर्व में कुछ जगहों पर नदी के किनारों का कटाव देखा गया है। यह कटाव मानस नदी और उसकी सहायक नदियों में हुआ है।

राज्य सरकार से हासिल की गई जानकारी के अनुसार, नारायणगुड़ी कैंप, बिसपानी कैंप और सिसुबारी कैंप जैसे इलाकों में नदी कटाव से असर पड़ा है। इन जगहों की पहचान निरीक्षण और नियमित निगरानी के दौरान की गई। सिंह ने बताया कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग नदी कटाव को रोकने तथा वन्यजीवों और आवश्यक ढांचे की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं।

लुधियाना के बुद्धा नाला में प्रदूषण

एक और प्रश्न के उत्तर में आज, राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि पंजाब के लुधियाना स्थित बुद्धा नाला में प्रदूषण का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रहा है। एनजीटी ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) को निर्देश दिया है कि जो उद्योग प्रदूषण के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनसे पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाए।

सिंह ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने लुधियाना के चार कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि सभी संयंत्र निर्धारित प्रदूषण मानकों और पर्यावरण स्वीकृति की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे थे।

यूरेनियम खनन का स्वास्थ्य पर प्रभाव

यूरेनियम खनन से स्वास्थ्य पर होने वाले असर को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) ने झारखंड में अपने खनन क्षेत्रों के आसपास के गांवों में स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराया। इस सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई।

सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीणों में जो बीमारियां मिलीं, वे सामान्य ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाने वाली बीमारियों जैसी ही थीं। सिंह ने कहा कि अब तक किए गए अध्ययनों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि इन बीमारियों का कारण यूरेनियम खनन से होने वाला विकिरण है।