ऊर्जा

संसद में आज: उर्वरक कंपनियों को 65 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति हो रही है

27 मार्च, 2026 को लोकसभा व राज्यसभा में विकास योजनाएं , स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण और तकनीकी प्रगति से जुड़े मुद्दों पर उठाए गए सवालों का जवाब विभिन्न मंत्रालय के मंत्रियों के द्वारा दिया गया।

Madhumita Paul, Dayanidhi

  • चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर बांध निर्माण से भारत चिंतित, सरकार ने पारदर्शिता और नीचे के क्षेत्रों की सुरक्षा की मांग की

  • गैस आपूर्ति संकट के बीच सरकार ने उर्वरक कंपनियों को प्राथमिकता देकर उत्पादन और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की

  • देश में 63 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों से, मोटापा बड़ा कारण, सरकार ने जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली पर जोर दिया

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के उपयोग के लिए प्रमुख संस्थानों को केंद्र बनाया गया, बेहतर इलाज और तेजी से रोग पहचान संभव

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हजारों चार्जिंग स्टेशन स्थापित, साथ ही भाषिनी पहल से भारतीय भाषाओं में एआई तकनीक को बढ़ावा मिला

अरुणाचल प्रदेश के पास ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध का निर्माण

सदन में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि भारत सरकार इस बात से अवगत है कि चीन तिब्बत के इलाके में यारलुंग त्सांगपो नदी पर एक बड़े बांध का निर्माण कर रहा है। यही नदी आगे चलकर भारत में ब्रह्मपुत्र नदी के नाम से जानी जाती है और अरुणाचल प्रदेश तथा असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस परियोजना की जानकारी पहली बार 1986 में सामने आई थी और तब से चीन इसकी तैयारी कर रहा था।

सिंह ने कहा कि भारत एक निचले हिस्से वाला देश है, इसलिए इस नदी के पानी पर उसका अधिकार भी है। अगर चीन ऊपर की ओर पानी को रोकता है या उसका रुख बदलता है, तो इसका असर भारत के लोगों की खेती, पानी और जीवन पर पड़ सकता है। इस कारण भारत सरकार ने चीन से कई बार कहा है कि वह इस परियोजना के बारे में पूरी जानकारी साझा करे और ऐसे कदम न उठाए जिससे नीचे के देशों को नुकसान हो।

सरकार लगातार इस स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है। यह मुद्दा सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि पर्यावरण और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

उर्वरक कंपनियों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति

हाल के समय में मध्य पूर्व के देशों में चल रही समस्याओं के कारण देश में गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में बताया कि इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नौ मार्च 2026 को एक नया आदेश जारी किया।

इस आदेश के अनुसार, उर्वरक कंपनियों को प्राथमिकता दी गई है ताकि खेती पर ज्यादा असर न पड़े। शुरुआत में इन कंपनियों को उनकी पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस देने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन उपलब्धता के कारण अभी उन्हें लगभग 65 प्रतिशत गैस मिल रही है।

पटेल ने कहा सरकार ने अतिरिक्त गैस खरीदकर इस स्थिति को सुधारने की कोशिश की है। अब कुल मिलाकर गैस की उपलब्धता लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे उर्वरक उत्पादन में सुधार होगा और किसानों को समय पर खाद मिल सकेगी। यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

मोटापे से संबंधित मौतें

सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में कहा कि आज के समय में मोटापा एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है, जिन्हें गैर-संचारी रोग कहा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाली लगभग 63 प्रतिशत मौतें इन बीमारियों के कारण होती हैं।

मोटापा दिल की बीमारी, मधुमेह, और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को बढ़ाता है। इसका मुख्य कारण गलत खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और तनावपूर्ण जीवनशैली है। सरकार ने 2023 से 2030 तक के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य इन बीमारियों को रोकना और लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए जागरूक करना है। मंत्री ने कहा कि लोगों को चाहिए कि वे नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और अपने वजन को नियंत्रित रखें। इससे न केवल बीमारी से बचाव होगा बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

स्वास्थ्य प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता

स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर सदन में पूछे गए एक और प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में स्वास्थ्य बताया कि सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार अब नई तकनीकों का उपयोग कर रही है। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस दिशा में तीन प्रमुख संस्थानों को विशेष केंद्र के रूप में चुना गया है, जिनमें एम्स दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश शामिल हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का उपयोग बढ़ाना है, जैसे रोगों की जल्दी पहचान, बेहतर इलाज और आंकड़ों का सही उपयोग। सरकार ने इस काम के लिए कई संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया है, जैसे आईसीएमआर और अन्य तकनीकी संस्थान। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से डॉक्टरों को मरीजों की जानकारी जल्दी और सही तरीके से मिलती है, जिससे इलाज में सुधार होता है। आने वाले समय में यह तकनीक भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत बनाएगी।

सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन

देश में प्रदूषण कम करने और साफ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी को लकेर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने राज्यसभा में कहा कि सरकार की फेम-द्वितीय योजना के तहत पूरे देश में चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं।

मार्च 2026 तक लगभग 9,332 चार्जिंग स्टेशन की योजना बनाई गई थी, जिनमें से 6,645 स्टेशन चालू हो चुके हैं। इन स्टेशनों को वहां लगाया जा रहा है जहां उनकी जरूरत ज्यादा है और जहां उनका उपयोग अधिक हो सकता है। मंत्री ने कहा जैसे-जैसे चार्जिंग स्टेशन बढ़ेंगे, लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए अधिक प्रेरित होंगे। इससे पेट्रोल और डीजल की खपत कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

भारतीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता भाषा प्रणाली का विस्तार

सदन में उठे एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में कहा कि भारत एक बहुभाषी देश है, जहां कई भाषाएं बोली जाती हैं। इन सभी भाषाओं को तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने एक खास पहल शुरू की है, जिसका नाम भाषिनी समुदाय है।

यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां लोग, स्टार्टअप, और संस्थान मिलकर विभिन्न भाषाओं के लिए डेटा और एआई मॉडल तैयार करते हैं। इस पहल में अब तक 10,000 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इसके तहत एक खास टूल भी विकसित किया गया है, जिसका नाम श्रुतलेख है। यह एक ऐसा सिस्टम है जो बोलकर कही गई बात को तुरंत लिख सकता है और उसे दूसरी भाषा में अनुवाद भी कर सकता है। यह 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इस पहल से डिजिटल सेवाएं सभी लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंच सकेंगी। इससे शिक्षा, प्रशासन और संचार में बहुत सुधार होगा।