सरकार ने बजट 2026-27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में दुर्लभ पृथ्वी तत्व कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य, अभी 8000 टन क्षमता स्थापित।
देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट, कई नए रिएक्टर निर्माणाधीन, 2031-32 तक परियोजनाएं पूरी होने की संभावना।
उत्तर प्रदेश में 256 मिट्टी जांच लैब स्थापित, 4.07 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित, किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद।
बिहार में सहकारी क्षेत्र की अनाज भंडारण योजना के तहत 36 पीएसीएस चयनित, फसल सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
दुर्लभ पृथ्वी तत्व कॉरिडोर
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है, इसी बीच सदन में उठे एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए आज, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के लिए विशेष कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। यह कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में विकसित किया जाएगा। दुर्लभ पृथ्वी तत्व आधुनिक तकनीक, मोबाइल, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
इस दिशा में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देश में 76.3 करोड़ टन दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडार का पता लगाया है। सिंह ने कहा यह कार्य खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2015 के बाद तेज हुआ है। इस योजना से भारत को खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन चला रही है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा उत्पादक और निर्यातक बनाना है।
मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक हर साल 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। अभी फरवरी 2026 तक लगभग 8000 टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता स्थापित हो चुकी है। नाइक ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन से प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत को पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार
सदन में उठाए गए एक और सवाल का जवाब देते हुए आज, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत में परमाणु ऊर्जा को बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में देश की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट है। परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कई नए प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पांच पीएचडब्ल्यूआर रिएक्टर 3500 मेगावाट क्षमता के निर्माणाधीन हैं और आठ रिएक्टर 5600 मेगावाट के लिए तैयारी में हैं।
सिंह ने कहा कि इसके अलावा चार पीडब्ल्यूआर रिएक्टर 4000 मेगावाट क्षमता के बन रहे हैं। यह सभी प्रोजेक्ट 2031-32 तक पूरे होने की उम्मीद है। साथ ही भाविनी तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार कर रही है। परमाणु ऊर्जा से देश को स्वच्छ और स्थिर बिजली मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में मिट्टी की जांच
मिट्टी की जांच को लेकर सदन में उठे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में आज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि किसानों की मदद के लिए सरकार ने मिट्टी की जांच पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत मृदा स्वास्थ्य योजना चलाई जा रही है।
सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 256 स्थायी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं और छह गांव स्तर की प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। 2014-15 से अब तक राज्य में 4.07 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जा चुके हैं। इस योजना से किसानों को अपनी जमीन की गुणवत्ता का पता चलता है और वे सही मात्रा में खाद का उपयोग कर पाते हैं। इससे उत्पादन बढ़ता है और लागत कम होती है।
हॉर्न और शोर नियंत्रण के नियम
सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि देश में बढ़ते शोर प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने वाहन हॉर्न के नियम बनाए हैं। मंत्रालय के अनुसार, हॉर्न एक जरूरी सुरक्षा उपकरण है, लेकिन इसका सही उपयोग होना चाहिए।
सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 और शोर प्रदूषण नियम, 2000 के तहत राज्यों को यह सुनिश्चित करना होता है कि शोर का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक न हो। गडकरी ने कहा इन नियमों का उद्देश्य लोगों को अनावश्यक शोर से बचाना और शांत वातावरण बनाना है।
बिहार में अनाज भंडारण योजना
सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, हकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि सरकार ने सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना शुरू की है। बिहार में इस योजना के तहत 36 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को चुना गया है। इन समितियों को जिला सहकारी विकास समिति द्वारा मंजूरी दी गई है। हालांकि पटना जिले में अभी पीएसीएस की पहचान नहीं हुई है।
शाह ने कहा कि इस योजना से किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और अनाज की बर्बादी कम होगी। इससे देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।