पिछले कई दिनों से पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग और वाहनों में आ रही खराबी को लेकर चल रही बहस पर सरकार ने संसद में अपनी सफाई पेश की है। सरकार के एक केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वाहनों में ई-20 यानी ऐसा ईंधन, जिसमें 80 फीसदी सामान्य पेट्रोल और 20 फीसदी इथेनॉल का मिश्रण किया जाता है उससे वाहनों की माइलेज और पुर्जों में खराबी नहीं आ रही बल्कि वाहन चलाने के तरीकों से माइलेज में कमी आ रही है।
3 अप्रैल, 2026 को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसद पी विल्सन और संजय सिंह के प्रश्नों का उत्तर देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया, "गाड़ी का माइलेज ईंधन के प्रकार से ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि वह कैसे चलाई जाती है। इसके अलावा टायर का प्रेशर, सर्विसिंग, व्हील अलाइनमेंट और एयर कंडीशनिंग का लोड भी माइलेज को प्रभावित करते हैं।"
गोपी ने अपने उत्तर में आगे कहा, "इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को कई चरणों की जांच के बाद ही लागू किया गया है, जिसमें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीकों और विशेषज्ञों से विचार विमर्श जैसी प्रक्रियाएं शामिल रही हैं।"
मंत्री ने बताया कि इस विचार विमर्श में नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियां, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और अन्य तकनीकी संस्थान सम्मिलित रहे हैं। साथ ही गोपी ने बताया कि इन सभी संस्थानों और ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों द्वारा की गई व्यापक लैब स्टडी और फील्ड ट्रायल से यह पुष्टि हुई है कि तय मानकों के तहत ई-20 युक्त ईंधन का इस्तेमाल सुरक्षित है।
उन्होंने कहा, इन ट्रायल में इंजन की टिकाऊपन, गाड़ी चलाने में आसानी, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग से बचाव, मटीरियल की अनुकूलता, उत्सर्जन और फ्यूल की बचत जैसे पहलुओं को परखा गया।
वहीं, पुरानी गाड़ियों के परफॉर्मेंस को लेकर पूछे गए सवाल पर गोपी ने कहा कि इन स्टडीज से यह भी पता चला है कि ई-20 के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस या उनमें होने वाली टूट-फूट में कोई खास बदलाव नहीं आता।
अपने उत्तर में उन्होंने यह सफाई भी दी कि ई-15 मिश्रित पेट्रोल पिछले साढ़े तीन साल से देशभर में व्यापक उपयोग में है, वहीं ई 19 और ई 20 ईंधन का इस्तेमाल पिछले ढाई साल से हो रहा है। इस समय बीस करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन मिश्रणों पर चल रही हैं।
गोपी ने अपने उत्तर में साफ किया कि पुराने ई-10 डिजाइन वाले वाहनों में माइलेज में करीब तीन से पांच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ई-20 से गाड़ी को बेहतर एक्सेलेरेशन, बेहतर एंटी नॉक क्षमता और साफ दहन जैसे फायदे भी मिलते हैं, साथ ही ई-10 के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन में करीब 30 प्रतिशत की कमी आती है।
सरकार की ओर से यह सफाई ऐसे समय पर सामने आई है जब सरकार के ही कई प्रमुख मंत्री इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहन का माइलेज घटने की बात कह चुके हैं, जिसके चलते बीते कुछ दिनों से इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई थी।
इसके अलावा 2021 में प्रकाशित नीति आयोग की रिपोर्ट "रोडमैप फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25" से पता चलता है कि गाड़ी के स्तर पर, औसत रूप से फ्यूल इकॉनमी (माइलेज) में 6 फीसदी तक की कमी आई हालांकि यह गाड़ी के प्रकार पर भी निर्भर करता है।
संसद में दिए गए जवाब के तहत यह भी पता चलता है कि 30 जून 2026 तक वर्ष 2025-26 के दौरान इथेनॉल आपूर्ति और पेट्रोल में औसतन बीस प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग बनाए रखते हुए 743 करोड़ लीटर से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंड किया जा चुका है।