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अर्थव्यवस्था

रोजगार के लिए गए कुल भारतीयों में से अब आधे से अधिक पहुंचेंगे इजराइल!

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इजराइल में साढ़े तीन हजार अस्थायी पदों के लिए जारी किए विज्ञापन पर चिकित्सा व सामाजिक क्षेत्र ने उठाए सवाल

Anil Ashwani Sharma

भारतीय श्रम क्या इतना सस्ता हो गया है कि एक नर्स को नर्सिंग कार्य की जगह उससे घरेलू कार्य कराया जाए। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने दुर्ग जिले के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग ने इजराइल में "होम-केयरगिवर" के पदों पर भर्ती के लिए एक विज्ञापन जारी किया है।

इस विज्ञापन में जीएनएम, बी.एससी. नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बी.एससी. नर्सिंग, नर्स असिस्टेंट तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए योग्य बताया गया है। लेकिन साथ ही विज्ञापन में दिए गए विवरण में कार्य संबंधी दायित्वों में रोगी देखभाल के अतिरिक्त खाना बनाना, घर की सफाई, कपड़े धोना, खरीदारी करना, घरेलू कार्य करना तथा अन्य विशेष कार्य भी सम्मिलित हैं।

यहां यह भी सवाल उठता है कि केंद्र सरकार ने स्वयं ही लोकसभा में यह बताया कि बीते 2025 तक लगभग साढे़ हजार भारतीय इजराइल में काम कर हैं। ऐसे में एक ही राज्य के एक बार में सीधे साढ़े तीन हजार वर्कर इजराइल भेजे जाएंगे जबकि पहले की संख्या में देशभर के लोग शामिल हैं। इजराइल में जितने वर्तमान में कार्यरत हैं उसके मुकाबले इस बार आधे से अधिक वर्कर भेजे जाने की बात विज्ञापन में कही गई है।    

ध्यान देने की बात है कि नर्सिंग एक सम्मानित, वैज्ञानिक एवं पेशेवर स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय है। एक नर्स का कार्य रोगियों की शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक देखभाल करना, उपचार में सहयोग देना, स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करना तथा रोगी की चिकित्सा आवश्यकताओं का प्रबंधन करना है।

यहां यह भी बात गौर करने की है कि नर्सों को वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ बनाया जाता है। ऐसे में उनसे घरेलू सहायक जैसे कार्य करवाना न केवल अनुचित है, बल्कि नर्सिंग व्यवसाय की गरिमा एवं प्रतिष्ठा को भी गंभीर आघात पहुंचाने वाली बात है। यहां एक और यक्ष प्रश्न है कि इस विज्ञापन में कुल 3,500 पदों के लिए आवेदन मांगा गया है और इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इसमें 90 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।       

ध्यान रहे कि इजराइल की राजधानी तेल अवीव में भारतीय एंबेसी के अनुसार फरवरी 2023 में करीब 18 हजार भारतीय इजराइल में रह रहे थे। इनमें मजदूर से लेकर आईटी प्रोफेशनल तक शामिल हैं। ध्यान रहे कि पांच अप्रैल 2025 को विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया था कि 10 मार्च 2025 तक 6,694 लोग इसराइल में काम कर रहे थे।  इनमें से 2,348 कामगार 195 कंपनियों में निर्माण कार्य से जुड़े हैं। उन्होंने बताया था कि 1,955 कामगार लोहे की बेंडिंग, 1,600 बिल्डिंग प्लास्टर और 791 सिरेमिक टाइलिंग के काम से जुड़े हैं।  

ध्यान रहे कि गत पांच मई 2026 को छत्तीसगढ़ सरकार के संचालनालय स्वास्थ्य सेवा विभाग ने राज्य के छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल को एक पत्र लिखा कि भारत सरकार के एमएसडीई मंत्रालय को इजराइल में विशेष सेक्टर के लिए अस्थाई रोजगार के लिए वर्कर चाहिए। इसी पत्र के जवाब में छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल ने राज्य के सभी निजी व सरकारी नर्सिंग महाविद्यालय के समस्त प्रिसिंपल को पत्र लिख कर इच्छुक नर्सों की एक सूची बना कर भेजने को कहा।

इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी विज्ञापन पर चिकित्सा क्षेत्र से लेकर सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने कई अहम सवाल उठाए हैं। रायपुर के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता ने डाउन टू अर्थ से कहा, ‘‘यह पूरी तरह से नर्सिंग पेशे की गरिमा का हनन है, नर्सों को घरेलू कार्यों के लिए नियोजित करना उनके पेशेवर कौशल और योग्यता का अवमूल्यन करना है, इससे समाज में नर्सिंग पेशे की छवि प्रभावित होगी।’’ 

वह इस बात पर भी चिंता जताते हुए कहते हैं कि इसमें व्यावसायिक शोषण की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ध्यान रहे कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों को स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय घरेलू कार्यों में लगाना उनके पेशेवर अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है। भारत में पहले से ही प्रशिक्षित नर्सों की भारी आवश्यकता है। ऐसे में उन्हें घरेलू सेवाओं के लिए विदेश भेजना देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी हानिकारक हो सकता है। ध्यान रहे कि भारत में मेल नर्स केवल 5 फीसदी ही कार्यरत हैं।

गुप्ता कहते हैं कि विज्ञापन में कार्य की स्पष्टता का अभाव स्पष्ट रूप से झलकता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि विज्ञापन में "स्पेशल ड्रयूटी" एवं "एम्पलायर की आवश्यकता अनुसार कार्य" जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे कार्य के दायरे के असीमित विस्तार और शोषण की आशंका बढ़ती है।

यही नहीं सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं हैं। वर्तमान में इजराइल क्षेत्र निरंतर सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध एवं सैन्य तनाव की परिस्थितियों से प्रभावित रहा है। ऐसी स्थिति में भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों, विशेषकर महिलाओं को भेजना उनकी शारीरिक एवं मानसिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील विषय है।

यह एक बड़ा सवाल है कि क्या इन अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, बीमा, आपातकालीन निकासी योजना, कार्यस्थल सुरक्षा, शिकायत निवारण तंत्र तथा भारतीय दूतावास द्वारा संरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था की गई है ? इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से विज्ञापन में उपलब्ध नहीं की गई है।

विज्ञापन में 90 फीसदी पद महिलाओं हेतु आरक्षित किए  गए हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान एवं कार्यस्थल पर उत्पीड़न से संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान अनिवार्य होने चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता रुपन च्रद्रकार ने कहा कि जहां पिछले पांच छह सालों गोलाबारुद गिर रहे हों वहां क्या हमारी सरकार छत्तीसगढ़ कि बेटियों को मरने के लिए भेजना चाहती है।