प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में हजारों घरों में रूफटॉप सोलर लगाए गए और लाभार्थियों को केंद्रीय वित्तीय सहायता दी गई।
ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए विकसित भारत–गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन के तहत 2026-27 में रिकॉर्ड बजट का प्रावधान किया गया।
लद्दाख के कारगिल जिले में सूखे की समस्या से निपटने के लिए माइक्रो-इरिगेशन, ड्रिप सिंचाई और कृत्रिम ग्लेशियर तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत तेलंगाना में हजारों किसानों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में रूफटॉप सोलर
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत देश में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना है।
नाइक ने बताया कि जम्मू और कश्मीर में इस योजना को अच्छा समर्थन मिला है। पांच मार्च 2026 तक राष्ट्रीय पोर्टल पर 97,260 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 25,160 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इस योजना के तहत लाभार्थियों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाती है। जम्मू-कश्मीर में अब तक 182.21 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) लाभार्थियों को दी जा चुकी है। इस योजना से लोगों के बिजली बिल कम हो रहे हैं और पर्यावरण को भी लाभ मिल रहा है। साथ ही देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।
भारत में टीबी की स्थिति
सदन में टीबी यानी तपेदिक को लेकर पूछे गए एक पश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत में इसकी स्थिति में सुधार हुआ है।
मंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 का हवाला देते हुए कहा कि भारत में टीबी के मामलों और मौतों में कमी आई है। साल 2015 में भारत में टीबी की वार्षिक दर 237 मामले प्रति लाख आबादी थी। यह 2024 में घटकर 187 मामले प्रति लाख आबादी रह गई है। यानी इसमें लगभग 21 प्रतिशत की कमी आई है।
टीबी से होने वाली मौतों में भी कमी आई है। 2015 में यह दर 28 मौतें प्रति लाख आबादी थी, जो 2024 में घटकर 21 मौतें प्रति लाख आबादी हो गई है। यह लगभग 25 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। टीबी के इलाज की कवरेज में भी बड़ा सुधार हुआ है। 2015 में केवल 53 प्रतिशत मरीजों को इलाज मिल पाता था, जबकि 2024 में यह बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है। हालांकि अभी भी भारत में दुनिया के कुल टीबी मामलों का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है। वैश्विक स्तर पर टीबी की घटना दर के आधार पर भारत का स्थान 38वां है।
ग्रामीण रोजगार के लिए नया कार्यक्रम
सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, ग्रामीण विकास मंत्रालय में मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नया कार्यक्रम शुरू किया है। इसका नाम है विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस कार्यक्रम के तहत 95,692.31 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी का प्रावधान किया गया है।
अगर इसमें राज्यों की हिस्सेदारी भी जोड़ दी जाए तो इस कार्यक्रम का कुल बजट 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है। यह ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा आवंटन माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लोगों की आय में सुधार होगा और गांवों का समग्र विकास होगा।
लद्दाख में सूखा और सिंचाई प्रबंधन
सदन में सिंचाई को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आज, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में कहा कि लद्दाख के कई क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बहुत सूखे हैं। विशेष रूप से कारगिल जिला के उत्तरी भाग में स्थित सोध क्षेत्र में बहुत कम बर्फबारी होती है।
ऐसी परिस्थितियों में खेती और बागवानी को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इस समस्या को देखते हुए केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन कई योजनाओं के माध्यम से जल प्रबंधन को बढ़ावा दे रहे हैं।
बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन के तहत कई गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसके अंतर्गत माइक्रो-इरिगेशन, संरक्षित खेती और बाग विकास के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा प्रति बूंद अधिक फसल योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रणालियों पर किसानों को 55 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है।
लद्दाख में एक और खास तकनीक अपनाई जा रही है जिसे कृत्रिम ग्लेशियर या स्नो हार्वेस्टिंग कहा जाता है। इसमें सर्दियों में गिरने वाली बर्फ को जमा करके गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलने दिया जाता है, जिससे पानी की उपलब्धता बनी रहती है। सोध क्षेत्र में लगभग 8 हेक्टेयर क्षेत्र को माइक्रो-इरिगेशन परियोजना के तहत लाया गया है।
तेलंगाना में प्राकृतिक खेती का कार्यान्वयन
सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार देशभर में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन लागू कर रही है।
तेलंगाना में यह मिशन क्लस्टर मॉडल के आधार पर चलाया जा रहा है। राज्य में अब तक 489 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनमें 24,736.32 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इस योजना के तहत 61,125 किसान पंजीकृत किए गए हैं। किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी दी जा रही है।
इसके लिए 979 कृषि सखी और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालयों और स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थानों में प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक इनपुट उपलब्ध कराने के लिए 315 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 2024-25 में 17.955 लाख रुपये और 2025-26 में 1,323.51 लाख रुपये जारी किए हैं। चौधरी ने कहा प्राकृतिक खेती से किसानों की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और पर्यावरण की रक्षा भी होती है। इसलिए सरकार इस पद्धति को तेजी से बढ़ावा दे रही है।