प्रतीकात्मक तस्वीर। फाइल फोटो 
अर्थव्यवस्था

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: महिलाओं को दी जा रही नगदी से राज्यों को होगा 1.7 लाख करोड़ का घाटा

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि महिलाओं को बिना शर्त नगद हस्तांतरण से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं

Raju Sajwan

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, महिलाओं को बिना शर्त नगद सहायता देने से राज्यों को 1.7 लाख करोड़ का घाटा होगा।

  • यह योजनाएं महिलाओं की आय में तात्कालिक सुधार लाती हैं, लेकिन राजकोषीय स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

  • सर्वेक्षण में अन्य देशों की तरह, नगद हस्तांतरण को शर्तों के साथ जोड़ने की सिफारिश की गई है ताकि यह अधिक प्रभावी हो सके।

महिलाओं को बिना शर्त दी जा रही नगदी की वजह से राज्यों का घाटा बढ़ रहा है। इस साल (वित्त वर्ष 2026) में इन योजनाओं पर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह जानकारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में दी गई है। यह सर्वेक्षण 29 जनवरी 2026 को संसद के पटल पर रखा गया। आर्थिक सर्वेक्षण में कई अन्य देशों में चल रही ऐसी ही योजनाओं की मिसाल देते हुए कहा गया है कि नगद हस्तांतरण की योजनाओं के साथ ‘शर्तें’ लगाई जानी चाहिए।   

बिना शर्त नकद अंतरण (यूसीटी) कार्यक्रम चला रहे राज्यों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि यूसीटी कार्यक्रमों को लागू करने वाले राज्यों की संख्या वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2026 के बीच पांच गुना से अधिक बढ़ी है, जिनमें से लगभग आधे राज्यों के राजस्व घाटे में होने का अनुमान है।

सर्वेक्षण में एक रिसर्च पेपर का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस तरह की नगदी सहायता कार्यक्रमों पर किया गया खर्च राज्यों के सकल घरेलू उत्पादों (जीएसडीपी) का 0.19 प्रतिशत से 1.25 प्रतिशत है। वहीं अगर इसकी तुलना कुल बजटीय खर्च से किया जाए तो यह राशि 0.68 प्रतिशत से 8.26 प्रतिशत के दायरे में आती हैं। 

सात राज्यों में किए गए विस्तृत अध्ययन के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि नकद हस्तांतरण दिहाड़ीदार महिला मजदूरों की मासिक आय का 11 से 24 प्रतिशत है, जबकि स्वरोजगार करने वाली महिला श्रमिकों की मासिक आय का 11 से 87 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम आधे लोगों की मासिक खपत का 40–50 प्रतिशत हिस्सा इन नकद हस्तांतरणों से पूरा होता है।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है, “यह तर्क दिया जाता है कि सरकार दी जाने वाली नगदी से महिलाओं की तात्कालिक आय सहायता की जाती है, जिससे महिलाएं अपनी स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा कर पाती हैं। कुछ लोग इसे सकल घरेलू उत्पाद में उनके अवैतनिक योगदान के प्रतिफल के रूप में भी देखते हैं।” 

लेकिन इस तर्क पर सवाल उठाते हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि ऐसी योजनाओं का तेजी से विस्तार और लंबे समय तक बने रहना राजकोषीय स्थिरता और मध्यम अवधि की आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं पैदा करता है, खासकर तब जब इन कार्यक्रमों के साथ-साथ रोजगार, कौशल और मानव पूंजी में निवेश न किया जाए। इन योजनाओं का महिला श्रम शक्ति की भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है।

आर्थिक सर्वेक्षण में एक और चिंता जताते हुए कहा गया है, “इन बिना शर्त नगद हस्तांतरण कार्यक्रमों का विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब राज्यों के पास राजकोषीय गुंजाइश पहले से सीमित है। राज्यों का संयुक्त सकल राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी के 2.6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 (अनुमान) में 3.2 प्रतिशत हो गया, जबकि संयुक्त राजस्व घाटा 0.4 प्रतिशत से बढ़कर 0.7 प्रतिशत हो गया। 

इससे यह संकेत मिलता है कि राजस्व खर्च को पूरा करने के लिए उधारी ली जा रही है। वित्त वर्ष 2025 में राज्यों की बकाया देनदारियां जीडीपी के लगभग 28.1 प्रतिशत तक पहुंच गईं। वित्त वर्ष 2024 में राज्यों की कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 62 प्रतिशत वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और सब्सिडी जैसे जरूरी खर्चों पर किया गया। 

इससे राज्यों का पूंजीगत खर्च कम हो रहा है, जो विकास व दीर्घकालिक प्रभाव के लिए बहुत जरूरी है। 

 पोषण व शिक्षा पर असर

आर्थिक सर्वेक्षण में राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो (एनबीईआरNBER) की एक हालिया मेटा-विश्लेषण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि जिन देशों में बिना शर्त नगदी दी जा रही है, वहां खाद्य सुरक्षा, उपभोग एवं अल्पकालिक आय स्थिरता में तो सुधार हुआ, लेकिन बच्चों के पोषण, शैक्षणिक परिणामों या गरीबी से स्थायी रूप से बाहर निकलने में निरंतर सुधार नहीं हुआ। यह अध्ययन निम्न एवं मध्यम आय वाले 34 देशों में लागू 72 बिना शर्त नगद हस्तांरण कार्यक्रमों पर किया गया। 

इस अध्ययन के आधार पर आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है, “बिना शर्त नगदी देना स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, बच्चों की देखभाल या विकासोन्मुख सार्वजनिक व्यय में निवेश का विकल्प नहीं हो सकता।”

शर्त के साथ किया जाए नगद हस्तांतरण 

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कई देशों में नगद का हस्तांतरण कुछ तय शर्तों के साथ किया जाता है। जैसे कि- मेक्सिको में परिवारों को नकद तभी मिलता था जब बच्चे नियमित रूप से स्कूल जाते थे और गर्भवती महिलाओं तथा छोटे बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण निगरानी के लिए क्लिनिक में पंजीकरण होता था। शर्तें पूरी न होने पर भुगतान रोक दिया जाता था और परिवारों का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन किया जाता था। 

इसी तरह ब्राजील में न्यूनतम स्कूल उपस्थिति और टीकाकरण व मातृ देखभाल जैसी बुनियादी स्वास्थ्य आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य था। इन शर्तों ने यह सुनिश्चित किया कि सरकार के खर्च से सीधे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के परिणामों में सुधार हुआ। फिलीपींस में नकद सहायता सीमित समय के लिए दी जाती है और हालात सुधरने पर परिवारों को योजना से बाहर कर दिया जाता है।

अमेरिका में ऑपर्च्युनिटी एनवाईसी जैसी योजनाएं प्रयोग के तौर पर चलाई गईं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और काम से जुड़े लक्ष्य पूरे करने पर ही पैसा मिला और बाद में योजना बंद कर दी गई।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि इन उदाहरणों से पता चलता है कि नकद सहायता अगर शर्तों और समय-सीमा के साथ दी जाए, तो वह लोगों को आत्मनिर्भर बनाती है, जबकि बिना शर्त और स्थायी नकद योजनाएँ ऐसा अक्सर नहीं कर पातीं।