सुल्तान का दरबार सजा हुआ था पर गजब की खामोशी थी। सुल्तान मुहम्मद-बिन-तुगलक अपने स्मार्टफोन पर रील पर रील स्क्रोल किए जा रहे थे। थोड़ी देर यूं ही चलता रहा। इससे पहले कि बाकी दरबारी भी रील देखना शुरू करते सुल्तान के चीफ वजीर ख्वाजा जहान उठे और अदब से सलाम करते हुए जेब से एक कागज निकाला और पढ़ने लगे, “सर जी! दरबार चलने का एक मिनट का खर्च लगभग 2.5 लाख रुपए है। इस दर से एक दिन का खर्च लगभग 9 करोड़ रुपए से अधिक आता है। इसमें वजीरों के वेतन-भत्ते, यात्रा, सुरक्षा इत्यादि शामिल हैं। हर मिनट का यह खर्च टैक्सपेयर पर बोझ डालता है। सूत्रों ने आरटीआई लगाकर जानना चाहा है कि सुल्तान आखिर किस चिंता में डूबे हैं?”
मुहम्मद-बिन-तुगलक ने अपनी आवाज में किसी दार्शनिक की खनक लाते हुए कहा, “ख्वाजा जहान, किसी ने सही कहा है कि कभी किसी को मुकम्मल जहान नहीं मिलता। अब मुझे ही देख लो, मेरी मुद्रा नीति फेल हो गई है, विदेश नीति का हाल देख ही रहे हो। सोचा था दौलताबाद शिफ्ट कर जाऊंगा पर वह भी नहीं हुआ। देश में बेरोजगारी, महंगाई आसमान छू रही है। गैस को लेकर मारामारी हो रही है और सामने कई राज्यों में चुनावी युद्ध होने वाले हैं। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि करूं तो क्या करूं? ऐसे में मैं रील न देखूं तो क्या करूं?”
ख्वाजा जहान बोले, “मैं किसी फिल्मी सड़क की नहीं बल्कि अपने राज्य की सड़कों की बात कर रहा हूं। अब आप क्रोनोलॉजी समझिए। सबसे पहले हमें सड़कों का मुआयना करना होगा। देखा जाए तो एक भी सड़क, सड़क कहलाने लायक बची नहीं है पर जहां भी कोई ढंग की सड़क दिखेगी हम उसको जहां-तहां खोद देंगे। इस पवित्र कार्य में हमारे सरकारी विभाग हमारी मदद के लिए सदैव तत्पर हैं। कभी किसी सड़क को हमारा बिजली-विभाग खोदकर भाग जाएगा तो कभी किसी दूसरी सड़क को जल-विभाग। कहीं गहरे सीवर के नाम पर खोदेंगे तो कहीं पर गैस पाइपलाइन के नाम पर। कभी किसी सड़क को पुल बनाने के नाम पर खोद दिया जाएगा तो कभी किसी को मेट्रो लाइन बिछाने के नाम पर।”
मुहम्मद-बिन-तुगलक ने मासूमियत से पूछा, “भला इससे महंगाई, गैस की कमी, बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान कैसे होगा?”
ख्वाजा जहान ने कहा, “इससे यातायात ठप्प हो जाएगा। रियाया इस पहेली में रहेगी कि आखिर क्यों “मंजिलें अपनी जगह हैं, रास्ते अपनी जगह।” जैसे आत्मा एक शरीर से निकलकर दूसरे में जा घुसती है, उसी तरह एक आम नागरिक एक ट्रैफिक जाम से निकल कर दूसरे में जा फंसेगा। जल्द ही वह लगभग आध्यात्मिक हो जाएगा और यह सोचने लगेगा कि कैसे इस ट्रैफिक जाम के चक्र से मुक्ति मिले? यही मोक्ष की अवस्था है। ऐसे में उसके सामने महंगाई, अशिक्षा, इलाज के नाम पर लूट, शिक्षा के नाम पर डकैती जैसी सांसारिक चीजें तुच्छ लगने लगेंगी। चुनावों से ठीक पहले हम सड़कों की मरम्मत कर देंगे। जनता खुश हो जाएगी और हम चुनाव जीत जाएंगे। एक बार चुनावों के हो जाने के बाद हम एक बार फिर से पूरी प्रक्रिया को शुरू कर देंगे।”
सुल्तान को प्लान इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे राज्य का राज-प्लान घोषित कर दिया और अगले हजारों वर्षों तक सुखपूर्वक राज करते रहे।