ग्रामीणों ने दुधली ग्रामसभा और सामुदायिक वन संरक्षण समिति के अधिसूचना बोर्ड स्थापित किये। फोटो ग्रामीणों ने उपलब्ध कराए हैं 
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मसूरी से सटे दुधली गांव में जमीन बचाने की जंग तेज, ग्रामसभा ने बाहरी कब्जों के खिलाफ बैरियर लगाया

उत्तराखंड के हिल स्टेशन मसूरी से सटे दुधली गांव में बाहरी लोगों की खरीद-फरोख्त और अवैध घेरबाड़ पर ग्रामसभा ने सख्त रुख अपनाया है और सामुदायिक वनाधिकार के तहत 1500 हेक्टेयर वनभूमि संरक्षण की मांग की है

Varsha Singh

उत्तराखंड में पहाड़ों की रानी मसूरी से सटे दुधली ग्रामसभा के निवासियों ने आज “बोर्ड गाड़ी” नाम का अभियान चलाया। इसके तहत ग्रामसभा और गांव के वन क्षेत्र के आसपास चस्पा किए गए वे सभी बोर्ड हटाए गए जो ग्रामसभा की जमीनों की बिक्री से जुड़े थे। ग्रामीणों ने जंगल से सटी जमीनों पर कंटीले तारों की घेरबाड़ उखाड़ दी। गांव की जमीन पर भू-माफिया के कब्जे के अंदेशे से डरे ग्रामीणों ने प्रवेश मार्ग पर बैरियर लगा दिया। 

इसके साथ ही ग्रामीणों ने दुधली ग्रामसभा और सामुदायिक वन संरक्षण समिति के अधिसूचना बोर्ड स्थापित किये। जो ये बता रहे थे कि करीब 1500 हेक्टेअर वनभूमि सामूहिक वन संसाधन क्षेत्र का हिस्सा है। मसूरी और कैंपटी वनक्षेत्र की जमीन पर बिना अनुमति पेड़ काटना, प्लास्टिक कचरा फैलाना या पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान पहुंचाना दंडनीय है।

इस अभियान का नेतृत्व कर रहे ग्रामीणों में से एक, सामाजिक कार्यकर्ता जबर सिंह ने इस संबंध में राज्य सरकार और जिला प्रशासन को भेजे गए पत्रों की प्रति साझा की, जिसमें लिखा गया है, “मसूरी से सटा रमणीक स्थल होने की वजह से भू-माफिया की नजर लंबे समय से दुधली ग्रामसभा की जमीनों पर लगी है।

आए दिन कोई न कोई भू-माफिया अवैध हथियारों के साथ आकर यहां पीढ़ियों से रह रहे ग्रामीणों को डरा-धमकाकर उनकी भूमि पर अवैध कब्जा कर रहा है। जंगल का अवैध कटान कर रहा है। विरोध करने पर ग्रामीणों से मारपीट और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी जाती है”।

“रातों-रात दुधली ग्रामसभा के तहत आने वाली गांव-समाज की भूमि और वन भूमि पर कंटीली तारों से घेरबाड़ की जा रही है। जिसमें गांववालों के साथ झड़प भी हो रही है। मुख्य पैदल मार्ग और सड़क किनारे हो रही जालीदार और ऊंची-ऊंची घेरबाड़ की वजह से जंगली जानवर इनमें फंस रहे हैं और ग्रामीणों को पशु चरान में दिक्कत आ रही है। गांव के रास्ते पर आवाजाही बाधित हो रही है”।

अपने जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए दुधली गांव की वनाधिकार समिति ने इस संबंध में राज्य स्तरीय मॉनीटरिंग कमेटी, राज्यपाल, जिलाधिकारी, वन विभाग के मुखिया, जनजातीय मामलों के सचिव और जनजातीय मंत्रालय को अगस्त 2025 में पत्र लिखकर शिकायत की थी।

अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत दुधली ग्रामसभा में वर्ष 2024-25 के दौरान वन अधिकार समिति का गठन कर सामुदायिक वन अधिकार के दावे प्रस्तुत किए गए। ग्रामसभा की परंपरागत सीमा के तहत आने वाली भूमि पर ही अवैध कब्जे और जमीनों की खरीद-बिक्री और घेरबाड़ के आरोप हैं। 

उत्तराखंड में जमीनों की खरीद-बिक्री और भू-माफिया गतिविधियों को लेकर लंबे समय से विरोध और आंदोलन चल रहे हैं। राज्य के कई हिस्सों में बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने के मामलों पर प्रदर्शन हुए हैं और सख्त भू-कानून की मांग लगातार उठती रही है।

दुधली ग्रामसभा और वनाधिकार समिति पिछले वर्ष अगस्त से लगातार इस विषय पर संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग कर रही है। डाउन टु अर्थ के साथ इसकी प्रतियां भी साझा की गई हैं।

आज समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने दुधली चौक पर संयुक्त बैठक की। सूचना बोर्ड लगाने के साथ ही ग्रामसभा क्षेत्र के प्रवेश मार्ग पर बैरियर भी लगाया ताकि सुरक्षा और प्रबंधन के लिहाज से यहां आने-जाने वाले वाहनों की जानकारी रखी जा सके।

ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि दुधली ग्रामसभा की पारंपरिक सीमा के अंदर बाहरी लोगों को भूमि पर अवैध कब्जा नहीं करने देंगे।

वहीं, इस पूरे मामले पर मसूरी के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट राहुल आनंद ने डाउन टु अर्थ से कहा, “आज बैरियर लगाए जाने और ग्रामीणों की शिकायतों की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन और मसूरी नगर पालिका की टीम को मौके पर निरीक्षण के लिए भेजा गया। किसी को भी किसी सार्वजनिक रास्ते पर बैरियर लगाने का अधिकार नहीं है। ये अधिकार जिला प्रशासन, नगर पालिका या वन विभाग को होता है। हम इस मामले के सभी पक्षों की शिकायतें सुन रहे हैं। हमारी टीम की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”

एसडीएम, जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों की जांच की बात कहते हैं। वहीं, मसूरी वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी अमित कंवर ने रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध कब्जे से इंकार किया है। साथ ही, गांव के जंगल में कब्जे की जांच की बात कही। उन्होंने कहा, “ग्रामीणों के सामुदायिक वनाधिकार की मांग को लेकर हम जल्द ही दुधली ग्रामसभा में सभी संबंधित विभागों के साथ एक बैठक करेंगे। बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर जिला स्तरीय समिति को सामुदायिक अधिकार पर कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।”

ग्रामीण चिंतित हैं कि दुधली ग्रामसभा की जमीन को बेचने वाले कौन लोग हैं, कहां के रहने वाले हैं और किस हैसियत से गांव की जमीन खरीदी-बेची जा रही है, इसका किसी को पता नहीं चल रहा है। और ये ग्रामीणों के हक-हकूक के साथ खिलवाड़ है। ग्रामसभा दुधली में, सरतली, तिमलियाल,पाली, कसोन, रणोगी समेत अन्य गांवों की पुश्तैनी जमीनें हैं, जबकि वनभूमि पर भी कई परिवार पीढ़ियों से काबिज हैं।