प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
विकास

बच्चों की जान जोखिम में? स्कूलों की स्थिति पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

राजस्थान सहित देश के 12 राज्यों के 26,000 से ज्यादा स्कूलों पर किए सर्वे में सामने आया है कि वहां करीब 22 फीसदी स्कूल जर्जर स्थिति में हैं। करीब 31 फीसदी स्कूलों में दरारे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं

Susan Chacko, Lalit Maurya

राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर राज्य की शहरी और विशेषकर ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाए कदमों पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। 28 जुलाई, 2025 को यह निर्देश राजस्थान के मुख्य सचिव और शिक्षा एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव को दिया गया है।

इन कदमों में स्कूलों और शिक्षकों की कमी, बुनियादी ढांचे की खामियां और तकनीकी संसाधनों की कमियों जैसे मुद्दों को दूर करने के प्रयासों के साथ-साथ ऐसी प्रभावी नीतियों को लागू करने की बात कही गई, जिससे हर बच्चा चाहे वह देश के किसी भी कोने में हो, सीखने, आगे बढ़ने और देश की प्रगति में योगदान देने का अवसर पा सके।

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति अनुप कुमार धंड की बेंच ने 25 जुलाई 2025 को बांसवाड़ा जिले के पीपलोदी गांव स्थित एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई दर्दनाक घटना पर स्वतः संज्ञान लिया। इस हादसे में कक्षा की छत और दीवार गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

न्यायमूर्ति अनुप कुमार धंड ने कहा "स्कूल नागरिकों के भविष्य को गढ़ने वाले संस्थान हैं। वहां पढ़ाई और सीखने के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना सबसे पहली जरूरत है।"

खस्ताहाल स्कूल, न बिजली, न पानी

अदालत ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की रिपोर्ट 'सेफ एंड सिक्योर एनवायरमेंट' का संज्ञान लिया, जिसमें देशभर में स्कूलों की बुनियादी संरचना को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान सहित देश के 12 राज्यों के 26,000 से ज्यादा स्कूलों पर किए सर्वे में सामने आया है कि करीब 22 फीसदी स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं। वहीं करीब 31 फीसदी स्कूलों में दरारे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

यूडीआईएसई रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान सरकार अपने कुल बजट का करीब 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती है, फिर भी सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास में राज्य अब भी पिछड़ा हुआ है। राज्य के 32 फीसदी सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है, जबकि 9 फीसदी स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नदारद है।

इसके अलावा, करीब 9 फीसदी स्कूलों में लड़कों के लिए और 10 फीसदी में बच्चियों के लिए शौचालय नहीं हैं।

शिक्षा में पिछड़ा राजस्थान

न्यायमूर्ति धंड का कहना है भारत का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद, राजस्थान विशेषकर महिला साक्षरता के मामले में अब भी पीछे है। इस  मामले में उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेश में दिए गए निर्देश क्यों न लागू किए जाएं।

कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इन मुद्दों पर अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं, इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। अदालत ने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों का व्यापक सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्कूल की इमारतें सुरक्षित हैं और जर्जर स्थिति में नहीं हैं। इससे बच्चों की जान और सुरक्षा को कोई खतरा नहीं होना चाहिए।