एनजीटी ने 18 फरवरी 2026 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को 22 किलोमीटर लंबे सिरहिंद–पटियाला सड़क के फोर-लेनिंग प्रोजेक्ट में स्टेज-एक स्वीकृति की शर्तों के अनुपालन पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
आवेदक संस्था पब्लिक एक्शन कमेटी ने आरोप लगाया है कि परियोजना के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है और भारतीय सड़क कांग्रेस की गाइडलाइंस एसपी: 21-2009 का पालन नहीं किया गया। आवेदक का यह भी कहना है कि 1 अगस्त 2023 को दी गई स्टेज-I (इन-प्रिंसिपल) स्वीकृति की शर्तों का उल्लंघन हुआ है।
स्टेज-I स्वीकृति की प्रमुख शर्तें
1. राज्य केम्पा के नोडल अधिकारी को यह लिखित आश्वासन देना था कि राज्य केम्पा के तहत स्वीकृत प्रतिपूरक वनीकरण योजना के अनुसार धनराशि संबंधित डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर को जारी की जाएगी।
2. परियोजना के लेआउट प्लान में बिना केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल ने 24 नवंबर 2025 के अपने आदेश में पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ को निर्देश दिया था कि वह यह स्पष्ट करे कि क्या परियोजना प्राधिकर्ता ने स्टेज-I की शर्तों का पालन किया है, और इस संबंध में शपथपत्र दाखिल करे।
पर्यावरण मंत्रालय ने 17 फरवरी 2026 को दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि स्टेज-I स्वीकृति में लगाई गई शर्तों पर आवश्यक प्रतिबद्धताएं और पंजाब सरकार की संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार ने रिपोर्ट का परीक्षण और विश्लेषण किया। मंत्रालय के अनुसार, “इन-प्रिंसिपल स्वीकृति की पूर्णता सुनिश्चित करने के बाद” 18 जनवरी 2024 को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
हालांकि पब्लिक एक्शन कमेटी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के जवाब को अस्पष्ट बताया है। आवेदक का कहना है कि मंत्रालय ने यह सत्यापित नहीं किया कि स्टेज-I स्वीकृति की शर्तों का वास्तविक और भौतिक रूप से पालन हुआ है या नहीं।
गाद निकासी पर रोक
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 17 फरवरी 2026 को एक अंतरिम आदेश में कहा है कि एसएएस नगर, पटियाला, मानसा, रोपड़, लुधियाना, श्री आनंदपुर साहिब और एसबीएस नगर के ड्रेनेज डिवीजनों के अंतर्गत विभिन्न नदियों में प्रस्तावित डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) का कार्य अगली सुनवाई तक शुरू नहीं किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया। इनमें पंजाब का खनन एवं भूविज्ञान विभाग, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण, निदेशक (खनन एवं भूविज्ञान), पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं।
आवेदक ने 17 अक्टूबर 2025 को पंजाब जल संसाधन विभाग के मानसा ड्रेनेज डिवीजन के कार्यकारी अभियंता द्वारा जारी उस नीलामी नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उपरोक्त ड्रेनेज डिवीजनों के अंतर्गत विभिन्न नदियों के संवेदनशील स्थलों पर डी-सिल्टिंग कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं।
आवेदक के वकील ने दलील दी कि यह डी-सिल्टिंग कार्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, इसलिए नीलामी नोटिस जारी करने से पहले आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां लेना अनिवार्य था।
आवेदक ने सार्वभौम बगाली बनाम कर्नाटक सरकार केस में दक्षिणी पीठ के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए बिना आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति के इस प्रकार की डी-सिल्टिंग को अवैध माना गया है।