लाहौल स्पीति जिला में पागल नाला आने के बाद प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते हुए अधिकारी , फोटो - रोहित पराशर 
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मणिमहेश यात्रा में तबाही: बारिश और भूस्खलन से चंबा में 10 हजार से अधिक श्रद्धालु फंसे

मॉनसून सीजन के दौरान 310 जानें जा चुकी हैं और अभी तक 2623 करोड़ रूपये का नुकसान

Rohit Prashar

हिमाचल प्रदेश का चंबा जिला पिछले चार दिनों से आपदा की मार झेल रहा है। पिछले चार दिनों में चंबा जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हालात बेकाबू हो गए हैं और इसका सबसे बड़ा असर मणिमहेश यात्रा पर पड़ा है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं, लेकिन इस बार प्राकृतिक आपदा ने इसे संकट में डाल दिया। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन और सड़कों के बह जाने से 10 हजार से अधिक श्रद्धालु अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। प्रशासन के अनुसार पिछले एक सप्ताह में 7 लोगों की मौत, 8 घायल और 9 लापता होने की पुष्टि हुई है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि जैसे-जैसे संपर्क मार्ग और संचार सेवाएं बहाल होंगी, हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है। प्रशासन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है और यात्रियों को आगे न बढ़ने की सख्त हिदायत दी गई है।

चंबा से भरमौर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़क के सैकड़ों मीटर हिस्से बह गए हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया है। हजारों लोग जहां-तहां फंसे हैं और उनके सामने भोजन व आश्रय का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोग अपने स्तर पर राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और अपने राशन से फंसे हुए श्रद्धालुओं को खाना और आसरा दे रहे हैं। यात्रा मार्ग पर लगाए गए कई लंगर भी लोगों को सहारा दे रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या के सामने यह मदद नाकाफी साबित हो रही है।

मणिमहेश में फंसे हुए यात्रियों को निकालते हुए राहतकर्मी

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 25 अगस्त को चंबा जिले में सामान्य से 1779 फीसदी अधिक बारिश दर्ज हुई थी। 22 से 29 अगस्त के बीच यहां सामान्य से 467 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। इस अवधि में जिले में 277 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जबकि सामान्यतः इस समयावधि में 48.9 मिलीमीटर बारिश होती है। इतनी असामान्य बारिश ने पूरे क्षेत्र को तबाही की चपेट में ले लिया है। संचार सेवाओं के ठप रहने से प्रशासन को राहत और बचाव कार्य में भारी मुश्किल आई, लेकिन अब संपर्क धीरे-धीरे बहाल होने पर फंसे हुए लोगों की सूची जारी की जा रही है। इसके बावजूद हजारों लोगों के बारे में उनके परिजन अनभिज्ञ हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ रही है।

चंबा के एडीएम अमित मेहरा ने जानकारी दी कि यात्रा पूरी तरह निरस्त कर दी गई है। अब मार्ग पर केवल प्रशासनिक दल और लंगर लगाने वाले संगठन मौजूद हैं। ज्यादातर यात्री भरमौर और उसके आसपास ठहरे हुए हैं और कुछ लोग पैदल ही चंबा की ओर निकलने लगे हैं। जहां भी सड़क सुविधा उपलब्ध है वहां प्रशासन उन्हें साधन उपलब्ध करा रहा है। वहीं दूसरी ओर क्षतिग्रस्त मार्गों को खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी हालात का जायजा लिया और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी को मौके पर भेजा है ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए और उनके भोजन, स्वास्थ्य और आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। साथ ही, यात्रियों को एयरलिफ्ट करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

चंबा के अलावा लाहौल-स्पीति जिला भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां सिस्सू में करीब 400 पर्यटक फंसे हुए हैं। सिस्सू और अटल टनल के बीच पागल नाले में बाढ़ आने से सड़कें टूट गईं और करीब 300 पर्यटक वाहन बीच में ही फंस गए। उपायुक्त किरण बढाणा ने बताया कि पर्यटकों को वैकल्पिक मार्गों से निकालने की कोशिश की जा रही है और शुक्रवार तक सभी को सुरक्षित बाहर लाने की योजना है। अटल टनल और सोलंग नाला के पास भी मुख्य मार्ग अवरुद्ध है, जिससे पुराने रोहतांग पास वाले मार्ग को इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

मनाली से कुल्लू और कुल्लू से मंडी तक के मार्ग भी भारी भूस्खलनों से प्रभावित हैं। कुल्लू–मंडी फोरलेन को भारी नुकसान हुआ है, जिसके चलते यातायात आंशिक रूप से ही चालू हो पाया है। प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही के लिए समय सारणी बनाई है, लेकिन इस बीच सैकड़ों ट्रक और मालवाहक वाहन फंसे हुए हैं। इनमें से कई वाहनों में सेब और सब्जियों की खेप है, जो खराब होने के कगार पर पहुंच गई है। इसका असर स्थानीय किसानों और व्यापारियों पर पड़ेगा।

कुल्लू जिले में स्थिति और भयावह है। शुक्रवार को आनी क्षेत्र में भूस्खलन से दो मकान जमींदोज हो गए, जिनमें दो महिलाओं की मौत हो गई। प्रशासन ने बताया कि कुल्लू जिले के करीब 40 गांव लगातार भूधंसाव की चपेट में हैं और पूरे गांव के धंस जाने का खतरा मंडरा रहा है। मंडी जिले में भी लाहौल और लेह की ओर जाने वाले वाहनों को कई दिनों से रोक दिया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार इस बार हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 32 फीसदी अधिक बारिश दर्ज हुई है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले चंबा, कुल्लू और मंडी हैं। चंबा में सामान्य से 26 फीसदी, कुल्लू में 78 फीसदी और मंडी में 64 फीसदी अधिक बारिश हुई है। बारिश और भूस्खलनों ने न केवल यात्रा और पर्यटन को प्रभावित किया है बल्कि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका पर भी गहरा असर डाला है।

हिमाचल विधानसभा में इन दिनों विधानसभा का सत्र चला हुआ है और इसमें हिमाचल में आई आपदा पर हर रोज चर्चा हो रही है। प्रदेश में आई आपदा के चलते नियम 102 के चलते हिमाचल की आपदा को राष्ट्रिय आपदा घोषित करने को लेकर प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। इस साल मॉनसून सीजन के दौरान 310 बहुमुल्य जानें जा चुकी हैं और अभी तक 2623 करोड़ रूपये का नुकसान प्रदेश को झेलना पड़ा है।

मणिमहेश यात्रा में भारी आपदा के बीच मौसम विभाग ने 29 अगस्त से 2 सितंबर तक हिमाचल प्रदेश के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। खासतौर पर 30 अगस्त को चंबा, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में ओरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उना, बिलासपुर, मंडी और शिमला में येलो अलर्ट है। 31 अगस्त को उना, मंडी, सिरमौर और कांगड़ा में ओरेंज अलर्ट जारी रहेगा, और हमीरपुर, बिलासपुर, चंबा, सोलन, किन्नौर और शिमला में येलो अलर्ट जारी रहेगा। इस दौरान लगातार भारी बारिश और हो रही भूस्खलन की घटनाओं के कारण राहत कार्यों में बाधा आने की संभावना बनी रहती है, जिससे प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में विलंब हो सकता है। प्रशासन इन हालातों से निपटने के लिए पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है, लेकिन प्रकृति की मर्ज़ी के आगे फिलहाल जोखिम और सावधानी बढ़ गई है। इस व्यापक बरसाती स्थिति को ध्यान में रखते हुए फंसे यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा एवं राहत कार्य प्राथमिकता से अधिक प्रभावी ढंग से चलाया जाना आवश्यक है

इन आपदाओं ने हिमाचल प्रदेश के नाजुक भू-आकृतिक हालात को एक बार फिर उजागर कर दिया है। पर्वतीय ढलानों पर अनियंत्रित निर्माण, अवैज्ञानिक विकास गतिविधियां और बढ़ते पर्यटक दबाव ने प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का पैटर्न अनियमित हो गया है और कम समय में अत्यधिक बारिश होने से इस तरह की आपदाएं अब बार-बार देखने को मिल रही हैं। मणिमहेश यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन, जिनमें लाखों लोग भाग लेते हैं, इन परिस्थितियों में और अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास जारी हैं, लेकिन यह घटना एक गंभीर सवाल छोड़ जाती है कि क्या हिमाचल जैसी संवेदनशील भौगोलिक स्थिति वाले प्रदेश में बड़ी धार्मिक और पर्यटन यात्राओं की बेहतर आपदा प्रबंधन तैयारी की जानी चाहिए थी। स्थानीय समुदाय अपनी क्षमता भर मदद कर रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी आपदा से निपटने के लिए एक मजबूत, पूर्वनियोजित तंत्र की जरूरत साफ झलक रही है।

मनाली में फोरलेन का बड़ा हिस्सा बह गया है इसे ठीक करने के काम में लगी मशीनरी, फोटो - रोहित पराशर