विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ ) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। लगातार सूखा, भारी बारिश और विनाशकारी उष्णकटिबंधीय चक्रवातों ने लोगों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे बाढ़ जैसे अल्पकालिक खतरे बढ़े हैं। साथ ही, लंबे समय में जल सुरक्षा पर भी संकट गहरा सकता है।
अटलांटिक महासागर से लगे तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर वैश्विक औसत से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। यह स्थिति खासकर उष्णकटिबंधीय अटलांटिक और कैरेबियाई क्षेत्रों में चिंताजनक है।
रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र का तापमान बढ़ने और अम्लीकरण जारी रहने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य संसाधनों पर खतरा बढ़ गया है। यह जानकारी विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन लैटिन अमेरिका एंड द कैरेबियन 2025’ में दी गई है।
डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे सओलो ने कहा, “लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में बदलती जलवायु के संकेत अब साफ दिखाई दे रहे हैं। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात तेजी से ताकतवर हो रहे हैं। भीषण गर्मी, बाढ़ और सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं।”
उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट दिखाती है कि खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन उनसे निपटने की हमारी क्षमता भी मजबूत हो रही है। अब हम पहले से बेहतर तरीके से जोखिम का अनुमान लगा सकते हैं और लोगों की जान व आजीविका बचाने के लिए कदम उठा सकते हैं।”
इसका उदाहरण अक्टूबर 2025 में आए हरिकेन मेलिसा से मिला। यह रिकॉर्ड में दर्ज पहला कैटेगरी-5 हरिकेन था जिसने जमैका में लैंडफॉल किया। इस आपदा में 45 लोगों की मौत हुई। आर्थिक नुकसान करीब 8.8 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया, जो जमैका की जीडीपी के 41 प्रतिशत से अधिक था।
हालांकि मेलिसा जैसा तूफान पहले कभी नहीं आया था, फिर भी जमैका के अधिकारियों ने उच्च गुणवत्ता वाले जोखिम मॉडल का इस्तेमाल किया। इसके आधार पर पहले से वित्तीय तैयारी और आपदा प्रबंधन के कदम उठाए गए। इससे जनहानि सीमित रही और देश को आपदा से निपटने में मदद मिली।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में उत्तर, मध्य और दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्सों में बार-बार और तीव्र हीटवेव चलीं। कई जगह तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया।
रिपोर्ट के अनुसार, अब स्वास्थ्य योजनाओं और आपदा तैयारी में जलवायु संबंधी जानकारी को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। मौसम संबंधी शुरुआती चेतावनियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की भी जरूरत है।
कई देश गर्मी से होने वाली मौतों का नियमित और अलग से आंकड़ा जारी नहीं करते। रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 से 2021 के बीच 17 देशों में हर साल औसतन करीब 13 हजार मौतें गर्मी से जुड़ी थीं। इससे संकेत मिलता है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। इसलिए बेहतर रिपोर्टिंग व्यवस्था की जरूरत बताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृषि और खाद्य प्रणाली चरम मौसम और जलवायु झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील है। इसका असर खेती, ग्रामीण आजीविका, खाद्य उपलब्धता और बाजार व्यवस्था पर एक साथ पड़ रहा है।
‘स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन लैटिन अमेरिका एंड द कैरेबियन 2025’ रिपोर्ट का विमोचन ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में कृषि और पशुधन मंत्रालय के ओलासिर डी मोराएस ऑडिटोरियम में किया गया। इस रिपोर्ट में प्रमुख जलवायु संकेतकों, उनके प्रभावों और जोखिमों की आधिकारिक जानकारी दी गई है। इसमें उष्णकटिबंधीय चक्रवात, हीटवेव, भारी वर्षा, सूखा और शीत लहर जैसी चरम मौसमी घटनाओं का भी उल्लेख है।
डब्ल्यूएमओ की महासचिव ने कहा, “ये निष्कर्ष बेहद चिंताजनक हैं। लेकिन ये यह भी दिखाते हैं कि हमारा काम क्यों महत्वपूर्ण है। जलवायु संबंधी जानकारी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, यह लोगों से जुड़ी है।”
उन्होंने कहा, “यह बाढ़, सूखा, तूफान, हीटवेव और अन्य खतरों से समुदायों की सुरक्षा से जुड़ा है। यह किसानों को फसल योजना बनाने, स्वास्थ्य एजेंसियों को गर्मी से जुड़े जोखिमों की तैयारी करने और तटीय समुदायों को बढ़ते समुद्री स्तर के लिए योजना बनाने में मदद करता है।”
सेलेस्टे साउलो ने कहा, “स्टेट ऑफ द क्लाइमेट इन लैटिन अमेरिका एंड द कैरेबियन 2025 केवल एक वैज्ञानिक रिपोर्ट नहीं है। यह कार्रवाई का आह्वान है। यह हमें मौसम और जलवायु निगरानी को मजबूत करने, सेवाओं में निवेश बढ़ाने, शुरुआती चेतावनी प्रणाली की कमियों को दूर करने और जलवायु जानकारी को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करती है।”
तापमान
रिपोर्ट के अनुसार, 1991 से 2025 के बीच लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में गर्मी बढ़ने की रफ्तार सबसे तेज रही। दक्षिण अमेरिका में तापमान हर दशक में करीब 0.26 डिग्री सेल्सियस बढ़ा। मध्य अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में यह बढ़ोतरी 0.25 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक रही। मेक्सिको में सबसे तेज गर्मी बढ़ी, जहां 1991 से 2025 के बीच तापमान हर दशक में करीब 0.34 डिग्री सेल्सियस बढ़ा।
वर्ष 2025 का औसत सतही तापमान रिकॉर्ड के पांचवें से आठवें सबसे गर्म वर्ष के बीच रहा।
पूरे क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई। मेक्सिको के मेक्सिकाली में तापमान 52.7 डिग्री सेल्सियस पहुंचा, जो नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। मध्य अमेरिका के कई हिस्सों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली हीटवेव चलीं। दक्षिण अमेरिका में भी कई जगह तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो में 44 डिग्री सेल्सियस और पराग्वे के मारिस्काल एस्तिगारिबिया में 44.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
वर्षा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले करीब 50 वर्षों में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में बारिश का स्वरूप अधिक चरम हो गया है। कहीं लंबे सूखे की स्थिति बनी, तो कहीं अचानक भारी बारिश और बाढ़ आई। सूखे की अवधि लंबी होती जा रही है और भारी वर्षा की घटनाएं अधिक तीव्र हो रही हैं।
मध्य अमेरिका और उत्तरी दक्षिण अमेरिका में भारी वर्षा की घटनाएं बढ़ी हैं। इसमें कोलंबिया, वेनेजुएला और अमेजन क्षेत्र के आसपास के इलाके शामिल हैं। दक्षिण-पूर्वी दक्षिण अमेरिका, जैसे दक्षिणी ब्राज़ील, उरुग्वे और उत्तरी अर्जेंटीना में भी सालाना वर्षा और बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं।
वहीं, मध्य चिली, उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील और मध्य अमेरिका व कैरेबियाई क्षेत्र के कुछ हिस्से अधिक सूखे होते जा रहे हैं। अमेजन क्षेत्र में स्थिति मिश्रित है। वहां सूखे का मौसम लंबा हो रहा है, बारिश के मौसम में चरम घटनाएं बढ़ रही हैं और दक्षिणी व पूर्वी अमेजन में सूखे की आवृत्ति बढ़ी है।
वर्ष 2025 में भारी बारिश और बाढ़ से बड़े मानवीय संकट पैदा हुए। मार्च में पेरू और इक्वाडोर में आई बाढ़ से 1.10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। अक्टूबर में मेक्सिको में बाढ़ से 83 लोगों की मौत हुई। कई जगह भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
जून 2025 मेक्सिको के इतिहास का सबसे अधिक बारिश वाला महीना रहा। इसके बावजूद देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में भीषण सूखा पड़ा। एक समय देश का 85 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में था। इससे फसलों और जलाशयों के लिए गंभीर जल संकट पैदा हुआ।
कैरेबियाई क्षेत्र में भी पानी की भारी कमी रही। दक्षिणी दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में 40 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई, जिससे खेती को नुकसान पहुंचा और जंगलों में आग का खतरा बढ़ा।
ग्लेशियरों का पिघलना
एंडीज पर्वत के ग्लेशियर करीब 9 करोड़ लोगों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं। ये घरेलू उपयोग, जलविद्युत, खेती और उद्योगों के लिए मीठा पानी उपलब्ध कराते हैं।
हाल के वैश्विक आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिणी एंडीज के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। कोलंबिया और इक्वाडोर जैसे कम अक्षांश वाले क्षेत्रों के उष्णकटिबंधीय ग्लेशियर भी तेजी से सिकुड़ रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बर्फ पिघलने, पानी की बढ़ती मांग और सीमित अनुकूलन क्षमता के कारण एंडीज क्षेत्र की जल सुरक्षा गंभीर संकट की ओर बढ़ रही है। खासकर ग्रामीण एंडीज समुदायों के लिए यह लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी जल चुनौतियों में से एक बनती जा रही है।
महासागर
लैटिन अमेरिका दुनिया की कुल समुद्री तटरेखा का करीब 8.8 प्रतिशत हिस्सा रखता है। महासागर मानव गतिविधियों से पैदा अतिरिक्त गर्मी और कार्बन डाइऑक्साइड को अपने भीतर समाहित कर रहे हैं। इसके कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है और पानी अधिक अम्लीय होता जा रहा है। साथ ही समुद्र में ऑक्सीजन का स्तर भी घट रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन बदलावों का असर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) पर पड़ रहा है। इससे मत्स्य संसाधनों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो रहा है।
वर्ष 2025 में समुद्र की सतह के पानी का पीएच स्तर और घटा, यानी अम्लीकरण बढ़ा। अटलांटिक और प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
मेक्सिको की खाड़ी, कैरेबियाई सागर और चिली के तटीय समुद्री क्षेत्रों में अत्यधिक समुद्री हीटवेव दर्ज की गईं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अटलांटिक महासागर से लगे तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर वैश्विक औसत से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। यह स्थिति खासकर उष्णकटिबंधीय अटलांटिक और कैरेबियाई क्षेत्रों में अधिक गंभीर है।