हिमाचल प्रदेश में सर्दियों का मौसम तेजी से बदल रहा है
शिमला में अब सर्दियों की ठिठुरन कम हो गई है और बर्फबारी भी घट रही है
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार तापमान में वृद्धि और बारिश की कमी के कारण यह बदलाव हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकता है, जिससे कृषि और पर्यटन पर असर पड़ सकता है
शिमला में रहने वाले 79 वर्षीय देशबंधु सूद बताते हैं कि अंग्रेजों ने शिमला को उसके बेहतरीन मौसम के कारण अपनी राजधानी के रूप में चुना था। यहां सर्दियों में जमकर बर्फ पड़ती थी और गर्मियों का तो जैसे अहसास ही नहीं होता था। लेकिन अब यहां सर्दियां जैसे खत्म होती जा रही हैं।
सूद कहते हैं कि यह बदलाव केवल शिमला तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में सर्दियों का मौसम पहले की तुलना में काफी छोटा हो गया है। आज से दो दशक पहले तक मार्च और अप्रैल तक लोग स्वेटर, कोट और गर्म कपड़े पहने रहते थे, लेकिन अब मार्च के दूसरे सप्ताह तक ही लोग गर्म कपड़े उतारने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में न तो जमकर बर्फबारी हो रही है और न ही सर्दियां लंबे समय तक टिक रही हैं।
शिमला निवासी 70 वर्षीय सुदेश कुमारी भी बदलती सर्दियों को अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर महसूस करती हैं। वे बताती हैं कि पहले शिमला में सर्दियों के दिन काफी कठिन हुआ करते थे। पानी तक जम जाता था, कई-कई दिनों तक सड़कें बंद रहती थीं और बिजली भी अक्सर चली जाती थी। इन मुश्किलों से बचने के लिए बहुत से लोग सर्दियों में शिमला छोड़कर मैदानी इलाकों में चले जाते थे।
सुदेश कुमारी कहती हैं, “इस बार तो केवल एक ही बार बर्फ पड़ी है और आजकल जैसा मौसम बना हुआ है, वैसा मौसम तीन दशक पहले मई-जून में हुआ करता था।
मौसम विज्ञान केंद्र, शिमला के आंकड़ों में मार्च महीने के शुरुआती दो सप्ताहों के अधिकतम तापमान की पिछले 11 वर्षों के आंकड़ों से तुलना की जाए तो इस वर्ष तापमान में स्पष्ट बढ़ोतरी दिखाई देती है। इस वर्ष 1 से 12 मार्च के दौरान हिमाचल प्रदेश में अधिकतम तापमान पिछले 11 वर्षों की तुलना में सबसे अधिक दर्ज किया गया है।
आमतौर पर मार्च महीने में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है, लेकिन इस वर्ष मार्च के पहले दो सप्ताह में ही तापमान लगातार सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। 1 मार्च को अधिकतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस और 2 मार्च को 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इसके बाद के दिनों में तापमान लगातार बढ़ते हुए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। इसी अवधि के दौरान मौसम विभाग की ओर से क्षेत्र में हीट वेव को लेकर चेतावनी भी जारी की गई।
मौसम विज्ञान केंद्र, शिमला के पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में बारिश और बर्फबारी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2010 में सर्दियों की बारिश सामान्य से 46 प्रतिशत कम रही, 2011 में 28 प्रतिशत कम, 2016 में 70 प्रतिशत कम और 2018 में 71 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
वर्ष 2021 में यह कमी 70 प्रतिशत रही, जबकि 2023 और 2024 में क्रमशः 38 और 42 प्रतिशत कम बारिश हुई। वर्ष 2025 में सर्दियों की बारिश 26 प्रतिशत कम रही और जनवरी 2026 तक यह कमी 11 प्रतिशत दर्ज की जा चुकी है।
मौसम के दीर्घकालिक आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि 2010 के बाद जनवरी महीने में 11 बार सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सर्दियों की स्थिरता और बर्फबारी पर सीधा असर पड़ रहा है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मौसम विज्ञानी संदीप शर्मा बताते हैं कि शिमला में तापमान सामान्य से लगभग 7 डिग्री अधिक दर्ज किया गया है, जबकि प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री अधिक रिकॉर्ड किया गया है।
हालांकि वे कहते हैं कि यह पूरी तरह असामान्य घटना नहीं है और वर्ष 2021 में भी तापमान में इसी तरह की वृद्धि देखी गई थी। उनके अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे तापमान में कुछ कमी आ सकती है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि इस बार गर्मियों के दिनों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के प्रमुख वैज्ञानिक शोभित कटियार के अनुसार इस बार पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में एंटीसाइक्लोनिक एक्टिविटी और वार्म एयर एडवेक्शन एक साथ देखने को मिल रही है। एंटीसाइक्लोनिक एक्टिविटी में हवा ऊपर से नीचे की ओर उतरती है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है और बारिश तथा बर्फबारी की संभावना कम हो जाती है।
वहीं वार्म एयर एडवेक्शन के दौरान गर्म स्थानों से ठंडे स्थानों की ओर हवा का प्रवाह होता है। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान की दिशा से लगातार गर्म हवाएं उत्तर-पश्चिमी भारत की ओर बह रही हैं, जिसके कारण मौसम शुष्क और गर्म बना हुआ है।
लंबे समय तक शुष्क मौसम और बढ़ते तापमान का असर प्रदेश के कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। कृषि विभाग के निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया के अनुसार इस वर्ष सर्दियों के लंबे ड्राई स्पेल के चलते अब तक लगभग 11 करोड़ रुपए की फसलों का नुकसान हो चुका है।
विभाग की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए फील्ड में भेजी गई हैं और किसानों को इससे निपटने के लिए आवश्यक सलाह भी दी जा रही है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक फलदार पौधों में बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं देखा गया है, लेकिन अधिक गर्म और लंबे ड्राई स्पेल की स्थिति में पौधे स्ट्रेस में चले जाते हैं, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है और बीमारियों तथा कीट प्रकोप की आशंका बढ़ जाती है।
राज्य के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला ने कहा कि प्रदेश सरकार भी बदलते मौसम के इस रुझान को गंभीरता से देख रही है। मौसम में आ रहे बदलावों से नपिटने के लिए हम सामूहिक प्रयासों पर बल दे रहे हैं, हम पर्यावरण सरंक्षण को लेकर नीतियां ला रहे हैं, ग्रीन कवर को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए हरित राज्य बनाने के साथ सतत विकास की दिशा में आगे बढ रहे हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से 13 और 14 मार्च के लिए प्रदेश के तीन जिलों मंडी, कांगड़ा और सोलन के लिए हीट वेव से सीवियर हीट वेव को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष प्रदेश में गर्मियों का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार गर्मियों के दौरान तापमान सामान्य से लगभग 45 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को अधिक गर्म मौसम के साथ-साथ पानी की कमी जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में सर्दियों का छोटा होता मौसम केवल एक मौसमी घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों का संकेत हो सकता है। यदि आने वाले वर्षों में भी सर्दियों की बारिश और बर्फबारी में इसी तरह गिरावट जारी रहती है, तो इसका असर प्रदेश की जल व्यवस्था, कृषि, बागवानी और पर्यटन उद्योग पर जो असर अभी दिखना शुरू हुआ है आने वाले समय में यह और विकराल रूप ले सकता है।