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जलवायु

सुपर अल नीनो से मार्च 2027 तक भारत में गर्मी से 55,000 अतिरिक्त मौतों की आशंका

शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के संशोधित अनुमानों के मुताबिक, भारत में गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा पहले के अनुमान से लगभग चार गुना हो गया है

Shagun

भारत में अगले छह महीनों (अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच) में गर्मी से संबंधित लगभग 55,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के नए अनुमानों में अधिकांश मौतें मार्च में होने की आशंका जताई गई है। लैब ने चेतावनी दी है कि गर्मी से होने वाली मौतों का सबसे अधिक बोझ ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ेगा।

संशोधित अनुमानों के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जहां मौजूदा सुपर अल नीनो के कारण गर्मी से संबंधित मौतों की संख्या सबसे अधिक रहने की आशंका है। सुपर अल नीनो के चलते दुनिया के विभिन्न हिस्सों में असामान्य रूप से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आ रहा है।

भारत में गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों का यह अनुमान लैब की सितंबर में जारी रिपोर्ट के मुकाबले काफी अधिक है। सितंबर की रिपोर्ट में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में गर्मी से संबंधित 15,800 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान लगाया गया था।

वैश्विक स्तर पर भी मौतों का अनुमान तेजी से बढ़ा है। नए अनुमानों के मुताबिक, जून 2026 से मार्च 2027 के बीच अल नीनो के दौरान अत्यधिक गर्मी के कारण दुनियाभर में लगभग 8.57 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। जबकि सितंबर में जारी रिपोर्ट में जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया था।

अनुमानों में इस वृद्धि की वजह आकलन की अवधि में मार्च महीने को शामिल करना और अगस्त तथा सितंबर के वास्तविक तापमान के आंकड़ों को जोड़ना है। इन दोनों महीनों में तापमान पूर्वानुमान की तुलना में काफी अधिक दर्ज किया गया था।

नाइजीरिया पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका

दरअसल, यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स द्वारा संचालित कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के ताजा अपडेट के मुताबिक, अगस्त अब तक का सबसे गर्म अगस्त रहा, जबकि सितंबर रिकॉर्ड में दूसरा सबसे गर्म सितंबर दर्ज किया गया। इस दौरान लगातार दो महीनों तक वैश्विक औसत मासिक तापमान औद्योगिक काल से पहले के स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।

सितंबर 2026 का वैश्विक औसत तापमान 16.27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1991-2020 के औसत तापमान से 0.82 डिग्री सेल्सियस और औद्योगिक काल से पहले (1850-1900) के स्तर से 1.63 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह सितंबर 2023 के मुकाबले 0.11 डिग्री सेल्सियस ठंडा रहा और रिकॉर्ड में दूसरा सबसे गर्म सितंबर रहा।

गर्मी से होने वाली मौतों पर नजर रखने वाले अपडेटेड ट्रैकर के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच दुनियाभर में गर्मी से संबंधित लगभग 3.73 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। इस अवधि में नाइजीरिया में सबसे अधिक मौतें होने का अनुमान है, जहां करीब 56,000 लोगों की जान जा सकती है। इसके बाद भारत का स्थान है, जहां लगभग 55,000 अतिरिक्त मौतें होने की आशंका है।

रिपोर्ट में पहले ही चेतावनी दी गई थी कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार असामान्य रूप से ऊंचा तापमान भविष्य में और अधिक गर्म दुनिया की एक झलक है। इस अल नीनो के दौरान जिन तापमान परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, वे वैसी ही हैं, जिन्हें जलवायु परिवर्तन से जुड़े पूर्वानुमान भविष्य में सामान्य स्थिति के रूप में देखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे तापमान से पैदा होने वाला बड़े पैमाने पर मृत्यु का जोखिम आज से लगभग 20 साल बाद आम हो सकता है।

मौतों के अनुमान के लिए नया ट्रैकर जारी

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने 'अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर' लॉन्च किया है। यह टूल अगले छह महीनों तक गर्मी से संबंधित मौतों का मासिक पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है। इसके साथ ही जून 2026 से अब तक गर्मी के कारण हुई मौतों का अनुमान भी दिया गया है।

यह टूल दुनियाभर के देशों के साथ-साथ राज्यों और प्रांतों के स्तर पर भी आंकड़े उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य नीति निर्माताओं, वित्त पोषण करने वाली संस्थाओं और मानवीय सहायता संगठनों को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करना है, जहां गर्मी का खतरा सबसे अधिक है, ताकि वहां संसाधनों और राहत उपायों को प्राथमिकता दी जा सके।

शिकागो विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा, "हमारा शोध पूर्वानुमान लगाने की नई क्षमताओं का इस्तेमाल उस सबसे जरूरी सवाल का जवाब देने के लिए कर रहा है, जिसका आज हम सामना कर रहे हैं। सवाल यह है कि किन क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी लोगों की जान ले सकती है?"

उन्होंने कहा, "अत्यधिक गर्मी के घातक प्रभावों का पहले से अनुमान लगा पाना एक बड़ी उपलब्धि है। इससे हमें उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है, जहां लोगों की जान को सबसे अधिक खतरा है। साथ ही, इससे निर्णय लेने वालों को जान जाने से पहले जरूरी कदम उठाने का अवसर मिलता है। यह ट्रैकर मौजूदा सुपर अल नीनो के दौरान ऐसी जानकारी उपलब्ध करा रहा है।"