फाइल फोटो 
जलवायु

स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2025: 11 साल में सबसे गर्म दशक, 2025 भी रिकॉर्ड के करीब

2025, 1850-1900 के औसत से लगभग 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान के साथ दूसरा या तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहा

DTE Staff

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2025 तक का दशक सबसे गर्म रहा है।

  • 2025 में तापमान 1850-1900 के औसत से 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक था।

  • ग्रीनहाउस गैसों का स्तर बढ़ रहा है और महासागर भी तेजी से गर्म हो रहे हैं।

  • जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम घटनाएं बढ़ रही हैं, जो खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित कर रही हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की “स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2025” रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि वैश्विक जलवायु तेजी से संकट की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2025 तक के 11 वर्ष रिकॉर्ड में सबसे गर्म रहे हैं और 2025, 1850-1900 के औसत से लगभग 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान के साथ दूसरा या तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहा।

यह रिपोर्ट विश्व मौसम विज्ञान दिवस (23 मार्च) पर जारी की गई, जिसकी थीम थी “आज का अवलोकन, कल की सुरक्षा”। खास बात यह है कि पहली बार इसमें पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन को एक प्रमुख जलवायु संकेतक के रूप में शामिल किया गया है।

रिपोर्ट बताती है कि 2024 अब भी सबसे गर्म वर्ष बना हुआ है, जब तापमान लगभग 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा था। 2025 में ला नीना स्थितियों के कारण थोड़ी अस्थायी ठंडक जरूर आई, लेकिन दीर्घकालिक गर्मी का रुझान जारी रहा।

ग्रीनहाउस गैसों का स्तर लगातार बढ़ रहा है। 2024 में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता पिछले 20 लाख वर्षों में सबसे अधिक दर्ज की गई, जबकि मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का स्तर कम से कम 8 लाख वर्षों में सबसे ऊंचा रहा। कार्बन डाइऑक्साइड में वार्षिक वृद्धि भी 1957 के बाद सबसे ज्यादा रही, जिसका कारण जीवाश्म ईंधनों से उत्सर्जन और प्राकृतिक कार्बन सिंक की घटती क्षमता है।

महासागर भी अभूतपूर्व रूप से गर्म हो रहे हैं। 2025 में 2000 मीटर गहराई तक महासागरों की ऊष्मा सामग्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। पिछले नौ वर्षों में हर साल नया रिकॉर्ड बना है। 2005 से 2025 के बीच महासागरों के गर्म होने की दर पहले के मुकाबले दोगुनी हो गई है। यह हर साल लगभग 11 से 12.2 ज़ेटाजूल ऊर्जा के बराबर है, जो मानव ऊर्जा उपयोग का लगभग 18 गुना है।

"वैश्विक जलवायु की स्थिति आपातकाल में है। पृथ्वी अपनी सीमाओं से परे धकेली जा रही है। हर प्रमुख जलवायु संकेतक खतरे का संकेत दे रहा है। मानवता ने अभी-अभी रिकॉर्ड के 11 सबसे गर्म वर्ष झेले हैं। जब इतिहास 11 बार खुद को दोहराता है, तो यह संयोग नहीं रहता, यह कार्रवाई का आह्वान बन जाता है।” एंटोनियो गुटेरेस, महासचिव, संयुक्त राष्ट्र

इसका असर समुद्री हीटवेव के रूप में भी दिखा, जहां 2025 में महासागर की लगभग 90 प्रतिशत सतह ने कम से कम एक बार अत्यधिक गर्मी का अनुभव किया।

समुद्र स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। 2025 में यह 1993 की तुलना में लगभग 11 सेंटीमीटर अधिक रहा और 2012 के बाद इसकी वृद्धि की गति और तेज हो गई है। इससे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान, भूजल में खारापन और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।

हिमनदों का पिघलना भी चिंताजनक स्तर पर है। 2024-25 में ग्लेशियर द्रव्यमान हानि रिकॉर्ड के पांच सबसे खराब वर्षों में शामिल रही। 2016 के बाद के आठ वर्ष इस सूची में हैं, जो तेजी से बढ़ती पिघलन को दर्शाता है। 2025 में आइसलैंड और उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट पर असाधारण पिघलाव देखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, चरम मौसम घटनाएं—जैसे हीटवेव, भारी बारिश, सूखा और चक्रवात—अब अधिक तीव्र और बार-बार हो रही हैं। इनका असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा, प्रवासन और सामाजिक स्थिरता पर भी पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन से कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है और खाद्य असुरक्षा एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है। साथ ही, इन घटनाओं के कारण लोगों का विस्थापन भी बढ़ रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जो पहले से ही संघर्ष और अस्थिरता से जूझ रहे हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि महासागरों का लगातार गर्म होना, समुद्र स्तर में वृद्धि और बर्फ का पिघलना आने वाले समय में और गंभीर परिणाम ला सकता है। डब्ल्यूएमओ का यह आकलन साफ करता है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की चुनौती है, जिसके प्रभाव दुनिया भर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।