पिछली सदी की शुरुआत (1901 से 1930) के मुकाबले इस सदी के पिछले दशक (2015 से 2024) में भारतीय भूभाग का औसत तापमान लगभग 0.9° डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। तापमान में यह बढ़ोतरी एक जैसी नहीं रही है। उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में पिछले तीन दशकों के दौरान तापमान में हर दशक 0.2° डिग्री सेल्सियस की तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां एक ओर भारतीय क्षेत्र में तापमान में बढ़ोतरी, मौजूदा वैश्विक तापमान वृद्धि के स्तर (लगभग 1.3° सेल्सियस) के मुकाबले कम है, वहीं भारत में तापमान की चरम स्थितियां लगातार बढ़ रही हैं। भारत के अधिकतर हिस्सों में (सिवाय सिंधु-गंगा के मैदानों के) “गर्म दिनों” की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। “गर्म दिन” की संख्या में हर दशक 5 से 10 दिनों तक की बढ़ोतरी हुई है। गर्म दिन परिभाषा के मुताबिक, उन दिनों को कहा जाता है जब अधिकतम तापमान 1995-2014 की अवधि के दौरान के दैनिक अधिकतम तापमान के 90वें परसेंटाइल से अधिक होता है