उत्तर प्रदेश के सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र को इस साल हुई मॉनसून की बारिश ने तर कर दिया है। इस क्षेत्र के अधिकांश तालाब पूरी तरह भर चुके हैं और कई तालाब ओवरफ्लो होने लगे हैं। महोबा जिले में करीब 1,000 साल पहले बने सभी चंदेलकालीन तालाब लबालब भर चुके हैं। पिछले कई दिनों में यहां का प्रमुख तालाब कीरत सागर ओवरफ्लो हो रहा है। इसके निचले इलाकों में पानी भर गया है।
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, महोबा में 8 सितंबर 2026 तक 537 मिलीमीटर (एमएम) सामान्य बारिश के मुकाबले 948 एमएम बारिश हुई जो सामान्य बारिश से 76 प्रतिशत अधिक है। पूरे उत्तर प्रदेश में संभल (89 प्रतिशत) के बाद सबसे अधिक बारिश दर्ज करने के मामले में महोबा बुंदेलखंड के चित्रकूट के साथ दूसरे स्थान पर है। चित्रकूट में भी 76 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। यहां 684 एमएम सामान्य बारिश के मुकाबले 1,202 एमएम बारिश हुई है।
पूरे प्रदेश में 1,000 एमएम से अधिक बारिश वाले कुल 5 जिलों में 3 जिले बुंदेलखंड के हैं। इनमें बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर शामिल हैं। बांदा में 1,114 एमएम, चित्रकूट में 1,202 एमएम और हमीरपुर में 1,026 एमएम बारिश हुई है। उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों ललितपुर में 24 प्रतिशत और जालौन में 21 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश हुई है। हालांकि झांसी में स्थिति अलग है। यहां सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
बांदा जिले में रहने वाले प्रगतिशील किसान डॉक्टर प्रेम सिंह ने डाउन टू अर्थ को बताया कि मॉनसून बेहद अनिश्चित हो गया है। ऐसे समय में किसानों को यह तय करने में मुश्किल आ रही है कि कौन सी फसल बोएं। वह बताते हैं कि मॉनसून सीजन के शुरुआत में कम बारिश के संकेत मिल रहे हैं। इस डर से कम से कम 50 प्रतिशत किसानों ने धान की बुवाई नहीं की।
यह क्षेत्र तिलहन और दलहन की फसलों के लिए जाना जाता है। मॉनसून में यहां तिल, मूंगफली, ज्वार, उड़द और कुछ हिस्सों में कपास की खेती होती है। प्रेम सिंह के अनुसार, ये सभी फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। केवल धान बच पाया और अगर सितंबर में फूल आने के समय बारिश हो गई तो धान को भी भारी नुकसान होगा।
हालांकि महोबा में पान किसान और चौरसिया समाज सेवा समिति के उपाध्यक्ष राजकुमार चौरसिया इस मॉनसूनी बारिश को रबी की फसल के लिए अच्छा मानते हुए कहते हैं कि इससे निश्चित रूप से बेहतर फसल होगी। वह बताते हैं कि उन्होंने एक दशक बाद महोबा में इतनी अधिक बारिश देखी है कि यहां के सभी चंदेलकालीन तालाब लबालब भरकर ओवरफ्लो होने लगे हैं। वह बताते हैं कि ये तालाब कुछ ऐसे बने हैं कि एक तालाब भरने पर अतिरिक्त पानी दूसरे तालाब में चला जाता था। कीरत सागर निचले पायदान अंतिम तालाब है जो पूरी तरह भर चुका है। कई दिन तक इसका पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों के ऊपर से बहता रहा।
बांदा में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार अशोक निगम के अनुसार, अत्यधिक बारिश के कारण गांव के रास्तों में पानी भर गया और पानी निकलने के रास्ते बंद होने से कच्चे मकान बड़ी संख्या में गिरे हैं। वह बताते हैं कि अत्यधिक बारिश के पानी की वह वजह से ही चित्रकूट में ऐतिहासिक बाढ़ आई है। यहां मंदाकिनी नदी अपने खतरे के निशान से 9 मीटर ऊंची बह रही थी। ऐसा अब तक कभी नहीं हुआ था। इससे पहले भी इस नदी में बाढ़ आई है लेकिन वह खतरे के निशान से 3 से 3.5 मीटर की ऊपर रहती थी।