देश में मानसून की बारिश सामान्य से 12 फीसदी कम, 29 सितंबर तक कुल 758.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज, सामान्य आंकड़ा 865 मिलीमीटर है।
पूर्वोत्तर भारत में बारिश की भारी कमी, मेघालय में सामान्य से 60 फीसदी कम वर्षा, अरुणाचल और मणिपुर में भी कमजोर रहा मानसून।
दक्षिण भारत में मानसूनी बारिश 24 फीसदी कम, केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी में सामान्य से कम वर्षा दर्ज, कई राज्यों में बारिश घटी।
मध्य भारत में बारिश सामान्य के करीब, ओडिशा में 30 फीसदी अधिक वर्षा, दमन और दीव में भी सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई।
उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का मिला-जुला हाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में अधिक वर्षा, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कमी दर्ज हुई।
देश में अल नीनो के चलते एक जून से 29 सितंबर 2026 के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देशभर में कुल 758.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 865 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस तरह देश में बारिश में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में बारिश का वितरण काफी अलग रहा। कहीं सामान्य से अधिक बारिश हुई, तो कहीं बड़ी कमी दर्ज की गई।
पूर्वोत्तर भारत में बारिश की सबसे ज्यादा कमी
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में मानसून के दौरान कुल 1016.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 1361.2 मिलीमीटर है। इस क्षेत्र में बारिश 25 प्रतिशत कम रही। मेघालय में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही, जहां सामान्य 2681.6 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 1075.9 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य से 60 प्रतिशत कम है।
अरुणाचल प्रदेश में 44 प्रतिशत, मणिपुर में 45 प्रतिशत, असम में 28 प्रतिशत और बिहार में 32 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसके विपरीत सिक्किम में सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक, नागालैंड में छह प्रतिशत अधिक और पश्चिम बंगाल में दो प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। झारखंड में बारिश सामान्य से केवल तीन प्रतिशत कम रही। त्रिपुरा और मिजोरम में क्रमशः 16 और 19 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
उत्तर-पश्चिम भारत में मिला मिला-जुला परिणाम
उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून के दौरान कुल 552.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 586.6 मिलीमीटर था। इस क्षेत्र में बारिश सामान्य से छह प्रतिशत कम रही। हालांकि राज्यों के बीच बारिश का अंतर काफी अधिक रहा।
उत्तर प्रदेश में सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक और उत्तराखंड में नौ प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। दिल्ली में भी सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई। इसके उलट हरियाणा में 23 प्रतिशत, पंजाब में 41 प्रतिशत और राजस्थान में 22 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में बारिश सामान्य से 10 प्रतिशत कम रही, जबकि जम्मू और कश्मीर में यह कमी केवल तीन प्रतिशत रही। लद्दाख में सामान्य से 122 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई हालांकि वहां बारिश की सामान्य मात्रा अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है।
मध्य भारत में सामान्य के करीब रही बारिश
मध्य भारत में एक जून से 29 सितंबर के बीच 952.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 974.7 मिलीमीटर थी। इस तरह यहां बारिश में केवल तो प्रतिशत की कमी रही। हालांकि इस क्षेत्र के राज्यों में बारिश का अंतर साफ दिखाई दिया।
ओडिशा में सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में भी 36 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके विपरीत गोवा में सामान्य से 34 प्रतिशत कम और महाराष्ट्र में 19 प्रतिशत कम बारिश हुई। मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से चार प्रतिशत कम रही, जबकि गुजरात में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ में सामान्य से छह प्रतिशत अधिक बारिश हुई।
दक्षिण भारत में 24 प्रतिशत कम बारिश
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मानसून के दौरान बारिश की स्थिति कमजोर रही। यहां कुल 539 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 710 मिलीमीटर थी। इस तरह क्षेत्र में 24 प्रतिशत की कमी रही।
केरल में सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश हुई। कर्नाटक में 30 प्रतिशत, पुडुचेरी में 39 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 24 प्रतिशत और तमिलनाडु में 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। तेलंगाना में बारिश सामान्य से 17 प्रतिशत कम रही। लक्षद्वीप में 29 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में सामान्य से 9 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।
29 सितंबर को भी कई क्षेत्रों में कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 29 सितंबर को देशभर में केवल 1.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस दिन का सामान्य आंकड़ा 3.7 मिलीमीटर है। यानी एक दिन में बारिश सामान्य से 60 प्रतिशत कम रही।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में इस दिन 0.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य मात्रा 6.4 मिलीमीटर थी। उत्तर-पश्चिम भारत में 2.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 65 प्रतिशत अधिक थी। मध्य भारत में 0.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 3.4 मिलीमीटर था। दक्षिण भारत में 2.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 50 प्रतिशत कम रही।
ज्यादातर राज्यों में बारिश सामान्य से कम
मौसम विभाग की श्रेणीवार रिपोर्ट के अनुसार, एक जून से 29 सितंबर के बीच 18 राज्यों में बारिश सामान्य श्रेणी में रही। इन राज्यों का देश के कुल क्षेत्रफल में हिस्सा 53 प्रतिशत था। वहीं, 14 राज्य बारिश की कमी वाली श्रेणी में रहे, जिनका क्षेत्रफल 39 प्रतिशत था। एक राज्य में अत्यधिक कमी दर्ज की गई, जबकि दो राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के मात्र एक प्रतिशत क्षेत्र में अत्यधिक कमी वाली श्रेणी का असर रहा। पांच प्रतिशत क्षेत्र में सामान्य से अधिक और दो प्रतिशत क्षेत्र में अत्यधिक अधिक बारिश दर्ज की गई। इस तरह बारिश का वितरण देशभर में समान नहीं रहा।
मानसून के आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर स्पष्ट
इस बार मानसून के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल बारिश की कमी के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई। ओडिशा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव जैसे क्षेत्रों में अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि मेघालय, मणिपुर, पंजाब और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में कमी रही।
अल नीनो का असर: कृषि और भूजल पर बढ़ा दबाव
सुपर अल नीनो: प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित हुआ, जिसका असर वर्षा के पैटर्न पर भी पड़ा।
कृषि पर दबाव: बारिश की कमी और बुवाई में देरी से खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा। दलहन और मोटे अनाज विशेष रूप से प्रभावित रहे।
भूजल संकट गहराया: लंबे समय तक सूखे की स्थिति के कारण सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भरता बढ़ी, जिससे पहले से दबाव झेल रहे भूजल भंडारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मौसम विभाग के ये आंकड़े भी 29 सितंबर तक की स्थिति दर्शाते हैं। इनके आधार पर मानसून के दौरान बारिश के क्षेत्रीय वितरण और सामान्य से अंतर को समझा जा सकता है।