एल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, जिससे कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और भारी बारिश का खतरा बढ़ेगा, जबकि वर्षा का पैटर्न भी बदल सकता है। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

अल नीनो हो रहा है मजबूत, दुनिया में भीषण गर्मी, सूखा व भारी बारिश की घटनाओं के आसार: डब्ल्यूएमओ

प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो, दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ सकती है भीषण गर्मी, सूखा, भारी बारिश और चरम मौसम की घटनाओं का खतरा

Dayanidhi

  • विश्व मौसम संगठन के अनुसार अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, जिससे दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

  • वैज्ञानिकों ने जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान अल नीनो के मजबूत होने का अंदेशा जताया है।

  • कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और भारी बारिश का खतरा बढ़ेगा, जबकि वर्षा का पैटर्न भी बदल सकता है।

  • भारतीय उपमहाद्वीप और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश, जबकि कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश का अनुमान है।

  • डब्ल्यूएमओ ने सरकारों और राहत एजेंसियों से समय रहते तैयारी, मौसम पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने की अपील की है।

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है और आने वाले महीनों में इसके तेजी से मजबूत होने की आशंका है। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, भारी बारिश, बाढ़ और अन्य चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं। संगठन का कहना है कि सरकारों और लोगों को पहले से तैयारी करने की जरूरत है ताकि होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

डब्ल्यूएमओ के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान अल नीनो एक मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के कई मॉडल इस बात पर सहमत हैं कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक रहेगा। इससे मौसम के वैश्विक स्वरूप पर व्यापक प्रभाव पड़ने के आसार हैं।

अल नीनो क्या है?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। एल नीनो आमतौर पर हर दो से सात साल के बीच विकसित होता है और लगभग नौ से बारह महीने तक बना रह सकता है।

इस दौरान कहीं सामान्य से अधिक बारिश होती है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बन जाती है। कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी भी देखने को मिलती है। हालांकि हर एल नीनो का प्रभाव एक जैसा नहीं होता। इसकी तीव्रता, अवधि और अन्य जलवायु परिस्थितियों के अनुसार असर अलग-अलग हो सकता है।

तापमान में बढ़ोतरी के आसार

डब्ल्यूएमओ का अनुमान है कि दुनिया के अधिकांश आबादी वाले क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान रहने के आसार हैं। केवल ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर अधिकतर इलाकों में गर्मी बढ़ सकती है। प्रशांत महासागर के साथ-साथ हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में भी समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान से हीटवेव की घटनाएं बढ़ सकती हैं। समुद्र में भी गर्मी बढ़ने से समुद्री जीवों और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।

बारिश का पैटर्न बदल सकता है

अल नीनो के कारण वर्षा का वितरण भी बदल सकता है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इसके विपरीत हिंद महासागर के कुछ हिस्सों, भारतीय उपमहाद्वीप और ऑस्ट्रेलिया के बड़े हिस्से में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है

अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश का स्वरूप अलग-अलग रहने का अनुमान है। वहीं मध्य अमेरिका, कैरेबियाई क्षेत्र और उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में कम वर्षा होने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। यूरोप में दक्षिणी भाग में अधिक और उत्तरी भाग में कम बारिश के आसार हैं, हालांकि इस क्षेत्र के लिए पूर्वानुमान का भरोसा अपेक्षाकृत कम है।

मौसम पूर्वानुमान पर वैज्ञानिकों का भरोसा

डब्ल्यूएमओ का कहना है कि इस बार दुनिया भर के प्रमुख मौसम मॉडल लगभग एक जैसे परिणाम दे रहे हैं। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि अअल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत होगा। हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी क्षेत्र में मौसम की स्थिति पूरी तरह निश्चित नहीं होती। मौसम पूर्वानुमान संभावनाओं पर आधारित होते हैं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव संभव है।

लोगों और सरकारों को तैयारी की सलाह

रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो पहले ही शुरू हो चुका है और इसके तेजी से मजबूत होने का अंदेशा है। इससे सूखा, भारी बारिश, हीटवेव और समुद्री हीटवेव का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर मौसम की जानकारी और शुरुआती चेतावनी लोगों की जान बचाने और आर्थिक नुकसान कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसी उद्देश्य से डब्ल्यूएमओ संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों, मानवीय संगठनों और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। संगठन नियमित मौसम जानकारी, क्षेत्रीय पूर्वानुमान और तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है ताकि देश समय रहते आवश्यक कदम उठा सकें।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो को रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। लेकिन सटीक मौसम पूर्वानुमान, समय पर चेतावनी और बेहतर तैयारी से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन विभागों को पहले से योजना बनाकर काम करना होगा ताकि संभावित चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सके।