मुंबई ने 92 में से 32 दिनों में ओजोन मानकों का उल्लंघन दर्ज किया गया। फोटो: आईस्टॉक @Naveeen
वायु

भारत के 25 शहरों में जमीनी ओजोन प्रदूषण का व्यापक फैलाव : सीएसई

सिर्फ उत्तर भारत के शहर नहीं बल्कि दक्षिण भारत के शहर भी ओजोन प्रदूषण की व्यापक मार झेल रहे हैं

Anil Ashwani Sharma

चरम गर्मी के बीच एक और संकट चुपचाप अपने पैर पसार रहा है। देशभर में जमीनी ओजोन का स्तर तय मानकों से अधिक मापा जा रहा है। कई शहर इस प्रदूषण की चपेट में हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा 25 भारतीय शहरों के नए विश्लेषण से पता चलता है कि ओजोन एक व्यापक और कई मौसमों में रहने वाली वायु प्रदूषण की चुनौती बन गया है। सभी शहरों में गर्मियों के दौरान ओजोन का सबसे अधिक औसत स्तर चंडीगढ़ में दर्ज किया गया। इसके बाद सर्वाधिक ओजोन प्रदूषण वाले शहरों में जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहर शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि जमीनी स्तर पर ओजोन प्रदूषण सिर्फ उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं है, यह दक्षिण और तटीय प्रायद्वीपीय इलाकों में भी फैल रहा है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ओजोन का स्तर बहुत अधिक दर्ज किया गया है। साथ ही पाया गया कि रात के समय भी ओजोन का स्तर बना रहा और लंबे समय तक लोग इसके संपर्क में रहे। वहीं, चेन्नई में ओजोन का सबसे अधिक अचानक बढ़ने वाला स्तर (एपिसोडिक कंसंट्रेशन) दर्ज किया गया, जबकि बेंगलुरु में इसे फैलाव के रूप में देखा जा रहा है।

बढ़ती गर्मी और गैसों का बढ़ता उत्सर्जन ओजोन की समस्या को और गंभीर बना सकता है।सीएसई का अध्ययन बड़े शहरों में स्वास्थ्य और जलवायु से जुड़े एक खामोश, साल भर चलने वाले संकट के बारे में चेतावनी देता है। साथ ही यह नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत कई तरह के प्रदूषकों से निपटने वाले फ्रेमवर्क को अपनाने की मांग करता है ताकि ओजोन बनने से रोकने के लिए गाड़ियों, उद्योगों, घरेलू ईंधन, कचरे और बायोमास जलाने से निकलने वाली सभी मुख्य गैसों को कम किया जा सके।

सीएसई के छह साल ( 2021-2026 ) के आंकड़ों के व्यापक विश्लेषण से पता चला है कि जमीन के स्तर पर ओजोन (ओथ्री) का दायरा अब कुछ समय के लिए अचानक बढ़ने यानी स्पाइक्स तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह देश के अलग-अलग इलाकों में साल भर चलने वाली शहरी और क्षेत्रीय समस्या बन गया है और दिल्ली-एनसीआर इसके सबसे बड़े क्षेत्रीय हॉटस्पॉट बनकर उभर रहे हैं।

बढ़ती गर्मी, तेज धूप और ओजोन बनाने वाली गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण यह अदृश्य प्रदूषक देश की हवा की गुणवत्ता और उससे जुड़े खतरों को बदल रहा है। इसे द्वितीय श्रेणी का प्रदूषक कहते हैं।

सीएसई की कार्यकारी निदेशक और इस विश्लेषण की प्रमुख अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं, "हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि जमीन के स्तर पर ओजोन का बढ़ना और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहना भारत की सर्दियों में होने वाली स्थानीय पार्टिकुलेट समस्या को साल भर चलने वाले और सीमाओं के पार फैलने वाले संकट में बदल रहा है। यह संकट गर्मियों में सभी इलाकों में अपने चरम पर होता है। ओजोन लोगों की सेहत, खेती की पैदावार और क्षेत्रीय जलवायु प्रणालियों को नुकसान पहुंचा रही है। एक जलवायु प्रदूषक के तौर पर ओजोन हवा में गर्मी को रोकती है, जिससे तापमान बढ़ता है और और अधिक ओजोन बनती है, जिससे एक खतरनाक फीडबैक लूप बन जाता है।"

रॉयचौधरी ने कहा कि मौजूदा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम( एनसीएपी ) पार्टिकुलेट मैटर को कम करने पर ध्यान देता है, लेकिन एनसीएपी 2.0 को कई प्रदूषकों से निपटने वाली रणनीति अपनानी चाहिए।

इस विश्लेषण में शामिल सीएसई की एक अन्य शोधकर्ता शरणजीत कौर कहती हैं कि छह साल के आंकड़ों से पता चलता है कि जमीन पर ओजोन का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे दिनों की संख्या बढ़ रही है जब यह मानक से अधिक होता है, गर्मियों में इसके संपर्क में रहने का समय बढ़ रहा है और वायुमंडलीय ट्रैपिंग के कारण रात में भी इसका स्तर बना रहता है। भारत के अलग-अलग इलाकों में ओजोन के और अधिक हॉटस्पॉट बन रहे हैं।

गत एक मार्च से 10 मई, 2026 के बीच विश्लेषण किए गए भारत के 25 प्रमुख शहरों में से 15 शहरों में गर्मियों का औसत स्तर अधिकतम आठ घंटे के संपर्क के लिए तय नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड के 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से काफी अधिक दर्ज किया गया। सभी शहरों में चंडीगढ़ में गर्मियों में ओजोन का औसत स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया। जयपुर में ओजोन का दूसरा सबसे अधिक स्तर दर्ज किया गया। दिल्ली-एनसीआर में गर्मियों में ओजोन प्रदूषण सबसे अधिक समय तक बना रहा, जहां क्रमशः 71 और 62 दिन स्तर मानक से ऊपर रहा। इसके बाद भोपाल(60), बेंगलुरु (55), पटना (24) और मुजफ़्फरपुर(21) का नंबर आता है। अहमदाबाद में गर्मियों में ओजोन का औसत स्तर तीसरा सबसे अधिक दर्ज किया गया।

चंडीगढ़ में गर्मियों के दौरान ओजोन का औसत स्तर सबसे अधिक 173 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, इसके बाद जयपुर (120), अहमदाबाद (115) और भोपाल (109) का नंबर आता है।

मुंबई में लगभग पूरे साल ओजोन का असर देखा गया। जनवरी से अप्रैल और फिर नवंबर-दिसंबर के दौरान ओजोन का स्तर बार-बार तय सीमा से अधिक पाया गया, जिससे पता चलता है कि ओजोन की समस्या अब सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं है। सभी शहरों में चेन्नई में ओजोन का स्तर सबसे अधिक बार तय सीमा से ऊपर गया। बेंगलुरु में ओजोन का दायरा बढ़ रहा है और लोग लंबे समय तक इसके संपर्क में आ रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर इस समस्या का मुख्य केंद्र है। 71 दिनों के अध्ययन के दौरान दिल्ली-एनसीआर में हर दिन ओजोन का स्तर आठ घंटे के राष्ट्रीय मानक से अधिक दर्ज किया गया । राजधानी में जहरीली ओजोन की एक मोटी परत पूरे मॉनिटरिंग नेटवर्क पर छाई रहती है और हर दिन औसतन 8.79 स्टेशन तय सीमा का उल्लंघन करते पाए जाते हैं।