प्रदूषण और कोहरे के आगोश में सड़क; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

डब्ल्यूएचओ सीमा से 18 गुणा ज्यादा जहर, राजस्थान के टोंक की हवा देश में सबसे खराब

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 11 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में टोंक की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 27 गुणा खराब है

Lalit Maurya

  • राजस्थान के टोंक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे खराब है। यहां प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सीमा से 18 गुणा अधिक है।

  • टोंक की हवा में पीएम2.5 कण हावी हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 11 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में टोंक की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 27 गुणा खराब है।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 346 दर्ज किया गया था, जो आज 55 अंकों के सुधार के साथ घटकर 291 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

  • 11 जनवरी 2026 को 235 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 29.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 246 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (299) दूसरे जबकि सवाई माधोपुर (293) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 291 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है।

  • नारनौल-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 289 और 283 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • कोटा (281) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (280), ग्रेटर नोएडा (278) और ग्वालियर (278) भी शामिल हैं।

  • आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा) शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 11 जनवरी 2026 को देश में राजस्थान के टोंक की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 308 रिकॉर्ड किया गया। कल टोंक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 14 अंकों का सुधार आया है। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।

रुझानों में सामने आया है कि टोंक की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

टोंक में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 11 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में टोंक की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 27 गुणा खराब है।

कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 351 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 68 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 283 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता आज बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 346 दर्ज किया गया था, जो आज 55 अंकों के सुधार के साथ घटकर 291 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,700 फीसदी अधिक खराब है।       

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 जनवरी 2026 को 235 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 29.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 16.7 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थित जस की तस है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी करीब सात फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 14.3 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 88 फीसदी की गिरावट आई है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 246 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (299) दूसरे जबकि सवाई माधोपुर (293) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 291 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। नारनौल-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 289 और 283 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

कोटा (281) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (280), ग्रेटर नोएडा (278) और ग्वालियर (278) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि टोंक, सवाई माधोपुर, दिल्ली, नारनौल, गाजियाबाद, कोटा, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, सिवान, आरा, नोएडा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, फरीदाबाद, सिंगरौली, हाजीपुर, बद्दी, उज्जैन, धारूहेड़ा, जैसलमेर, पटना, बल्लभगढ़, बीकानेर, सीकर, भिवाड़ी, बक्सर, चूरू, डूंगरपुर, मेरठ, वातवा, झालावाड़, लखनऊ, भीलवाड़ा, कानपुर, मुजफ्फरनगर, सिरोही, देहरादून, सहरसा, बहादुरगढ़, धौलपुर, पाली, राजगीर, चंडीगढ़, जालोर, कटनी, चरखी दादरी, तालचेर, पीथमपुर, बालासोर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं मंडीदीप, वापी, खुर्जा, झुंझुनू, रतलाम, हनुमानगढ़, औरंगाबाद (बिहार), कटक, श्री गंगानगर, आगरा, बारां, अंकलेश्वर, जालंधर, उल्हासनगर, बेलापुर, कल्याण, खन्ना, धनबाद, परभनी, कुंजेमुरा, बांसवाड़ा, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), जलगांव, अजमेर, राजमहेंद्रवरम, बदलापुर, बेगूसराय, फतेहाबाद, लुधियाना, मीरा-भायंदर, भिवंडी, ठाणे, पटियाला, मुरादाबाद, तुमकुरु, बारबिल, बोइसर, विरार, कैथल, मंडीखेड़ा, नयागढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 4.3 फीसदी यानी महज 10 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, डिंडीगुल, गंगटोक, कोरबा, मदिकेरी, रामनाथपुरम, शिलांग, सिलचर, थूथुकुडी, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 70 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, फिरोजाबाद, हुबली, हैदराबाद, जलना, कलबुर्गी, कन्नूर, करूर, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, लातूर, मैहर, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 124 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बोइसर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चरखी दादरी, छपरा, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, करौली, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, पाली, पानीपत, परभनी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सिलीगुड़ी, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 40 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आरा, बद्दी, बल्लभगढ़, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बूंदी, बक्सर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दिल्ली, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, जैसलमेर, झालावाड़, कानपुर, कोटा, लखनऊ, मंडीदीप, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पटना, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सिवान, उज्जैन, वापी, वातवा शामिल हैं।

वहीं टोंक (308) में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 235 में से महज 10 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 70 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 70 दर्ज किया गया था।

114 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज टोंक (308) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 310 पर पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 14 अंकों का सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद आज भी टोंक में वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है।      

कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 351 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 68 अंकों के सुधार के साथ गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 283 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 55 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 291 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। दिल्ली के उलट कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 246 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 जनवरी को दिल्ली चौथे स्थान पर है, वहीं मंडीदीप (299) दूसरे, जबकि सवाई माधोपुर (293) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 278, गाजियाबाद में 283, गुवाहाटी में 132, गुरूग्राम में 280, नोएडा में 260, ग्रेटर नोएडा में 278 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 116 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 210, चेन्नई में 69, चंडीगढ़ में 183, हैदराबाद में 84, जयपुर में 165 और पटना में 226 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 10 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, डिंडीगुल, गंगटोक, कोरबा, मदिकेरी, रामनाथपुरम, शिलांग, सिलचर, थूथुकुडी, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, बागलकोट, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, फिरोजाबाद, हुबली, हैदराबाद, जलना, कलबुर्गी, कन्नूर, करूर, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, लातूर, मैहर, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुपति, तिरुपुर, तुमडीह, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 70 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बिगड़े हालात, गाजियाबाद में 351, दिल्ली में 346 पर पहुंचा एक्यूआई