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भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बढ़ता मोह, 2025 में 75 फीसदी बढ़ी बिक्री

सरकारी नीतियों, बढ़ती मांग और नए मॉडलों की उपलब्धता के चलते भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है

Lalit Maurya

  • भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश में ईवी बिक्री 23 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 75 फीसदी से अधिक की तेज वृद्धि दर्ज की गई।

  • सरकारी नीतियों, बढ़ती मांग और नए मॉडलों की उपलब्धता ने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से उभरते ईवी बाजारों में शामिल कर दिया है।

  • भारत न सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों, बल्कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर में भी वैश्विक नेता बन चुका है, जहां दुनिया की 57 फीसदी बिक्री अकेले भारत में होती है। साथ ही देश अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी है।

  • यह बदलाव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा बढ़ रहा है। 2025 में दुनिया भर में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 20 फीसदी से अधिक बढ़कर 2.1 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई, और अब हर चौथी नई कार इलेक्ट्रिक है।

  • चीन, यूरोप और उभरते बाजारों में तेज वृद्धि के बीच, भारत इस वैश्विक ईवी क्रांति का एक मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रफ्तार आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, निर्माण और रोजगार के नए अवसरों को आकार देने वाली निर्णायक बदलाव साबित हो सकती है, बशर्ते नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचा इसी गति से आगे बढ़ता रहे।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की रफ्तार अब नई ऊंचाई पर पहुंच चुकी है। रुझान दर्शाते हैं कि 2025 में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 23 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि इस दौरान इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 75 फीसदी से ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इस बात का खुलासा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘ग्लोबल एनर्जी रिव्यू 2026’ में किया है। कुल देखें तो मिलाकर बढ़ती मांग, सरकारी प्रोत्साहन और नए मॉडलों की उपलब्धता ने भारत को तेजी से उभरते ईवी बाजारों में शामिल कर दिया है। भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री के जो आंकड़े आईईए ने 2024 साझा किए थे उनसे पता चला है कि जहां 2019 में 680 इलेक्ट्रिक कारें बेची गई। वहीं 2023 में यह आंकड़ा 120 गुणा बढ़कर 82,000 पर पहुंच गया।

2025 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच गया था।

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर में भारत नंबर वन

एक अन्य रिपोर्ट के हवाले से पता चला है कि भारत इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार में वैश्विक नेता बनकर उभरा है। 2024 के दौरान दुनिया में जितने भी इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बिके थे, उनमें से 57 फीसदी अकेले भारत में बेचे गए थे।

इसी तरह भारतीय नीतियों पर आधारित तेज बदलाव ने देश को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार बना दिया है। आंकड़ों से पता चला है कि 2024 में वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री में भारत की हिस्सेदारी छह फीसदी थी।

रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि फेम और पीएम ई-ड्राइव जैसी लक्षित सरकारी योजनाओं ने इलेक्ट्रिक और पारंपरिक वाहनों की कीमतों को करीब लाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इससे न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया गया, बल्कि साथ ही छोटी दूरी की परिवहन सेवाओं (लास्ट-माइल मोबिलिटी) में भी निजी निवेश बढ़ा है।

सरकारी नीतियों का असर

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट में भी सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिल्ली में जितने नए वाहन रजिस्टर हुए, उनमें से 11.78 फीसदी इलेक्ट्रिक (ईवी) थे। जबकि 2011-12 में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार न के बराबर था।

यह 2011-12 की तुलना में बहुत बड़ी छलांग है, जब केवल 723 ईवी रजिस्टर हुए थे। हालांकि, राज्य वित्तीय वर्ष 2023-24 तक 25 फीसदी विद्युतीकरण (वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाने) का अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया, लेकिन फिर भी यह 10 फीसदी का आंकड़ा पार करने वाले भारत के पहले राज्यों में से एक था और इसकी इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा थी।

देखा जाए तो भारत की यह रफ्तार सिर्फ घरेलू बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है। दुनिया भर में भी 2025 इलेक्ट्रिक कारों के लिए एक ऐतिहासिक साल रहा। इस दौरान इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री साल दर साल 20 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 2.1 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई। दिलचस्प बात यह है कि अब दुनिया में बिकने वाली हर चौथी कार इलेक्ट्रिक है।

वैश्विक ट्रेंड: हर चौथी कार अब इलेक्ट्रिक

रिपोर्ट से पता चला है कि इलेक्ट्रिक कारों के मामले में सबसे बड़ा उछाल चीन में देखने को मिला, जहां कड़ी घरेलू प्रतिस्पर्धा, सस्ती कीमतें और नए मॉडलों की भरमार ने ईवी बाजार को बूम पर पहुंचा दिया। पहली बार चीन में कुल कार बिक्री में आधे से ज्यादा हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक कारों की रही। वहीं, इलेक्ट्रिक मालवाहक ट्रकों की बिक्री भी तीन गुणा बढ़कर दो लाख के पार पहुंच गई।

इस मामले में यूरोपियन यूनियन भी पीछे नहीं। यहां इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 30 फीसदी की वृद्धि हुई। यहां सबसे बड़ा बाजार जर्मनी रहा, जहां बिक्री में अच्छा-खासा उछाल देखा गया। स्पेन और इटली में भी सब्सिडी दोबारा शुरू होने के बाद बाजार मजबूत हुआ है।

इसी तरह अन्य बड़े बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखा गया। पोलैंड में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 140 फीसदी तक बढ़ गई, जबकि नीदरलैंड्स में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं फ्रांस में बिक्री का स्तर 2024 के आसपास ही स्थिर रहा।

यूरोप ने चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे तेजी से बढ़ते ईवी बाजार बनने का खिताब हासिल किया। नॉर्वे में तो 96 फीसदी कारें इलेक्ट्रिक रहीं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यूरोप में इलेक्ट्रिक मीडियम और हेवी-ड्यूटी ट्रकों की बिक्री भी बढ़ने लगी है। 2025 में इनकी बिक्री करीब 40 फीसदी बढ़ी और बाजार में इनकी हिस्सेदारी तीन फीसदी तक पहुंच गई।

अमेरिका में गिरावट: नीतिगत बदलाव का असर

हालांकि दूसरी तरफ अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में दो फीसदी की गिरावट आई। इसकी मुख्य वजह सितंबर के बाद फेडरल टैक्स में छूट का खत्म होना और ईंधन दक्षता के मानकों को पूरा न करने पर लगने वाले जुर्माने का हटना रहा।

हालांकि, टैक्स छूट खत्म होने से पहले 2025 की तीसरी तिमाही में अमेरिका में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी।

रिपोर्ट से पता चला है कि चीन के बाहर भी उभरते देशों में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। इन देशों में 2025 के दौरान बिक्री में करीब 80 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल इन देशों में इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री ऑस्ट्रेलिया की सालभर की कुल कार बिक्री के बराबर पहुंच गई।

इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह चीन से बढ़ते आयात भी रहे, क्योंकि घरेलू प्रतिस्पर्धा तेज होने के चलते चीनी कंपनियां निर्यात के लिए नए बाजार तलाश रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में 2025 के दौरान इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दोगुने से भी ज्यादा बढ़ी है, जिसमें थाईलैंड और वियतनाम की बड़ी भूमिका रही। क्षेत्र के सबसे बड़े बाजारों में से एक इंडोनेशिया में भी बिक्री 125 फीसदी बढ़ी, जिससे कुल वृद्धि को मजबूती मिली।

इसी तरह दक्षिण अमेरिका और कैरेबियाई देशों में भी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में करीब 70 फीसदी का उछाल आया है और 2025 में यह करीब 3.5 लाख यूनिट तक पहुंच गई। मेक्सिको में बिक्री तीन गुणा से ज्यादा बढ़ी, जबकि ब्राजील में 2024 की मजबूत बढ़त के बाद 2025 में भी 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

इसी तरह क्षेत्र के छोटे बाजारों में भी तेज उछाल देखने को मिला, खासकर इक्वाडोर और उरुग्वे में, जहां 2025 के दौरान बिक्री में करीब 240 और 140 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया।

कुल मिलाकर साफ है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार अब एक अस्थाई ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली स्थाई बदलाव बन चुकी है। भारत के लिए यह मौका सिर्फ उपभोक्ता बाजार तक सीमित नहीं, बल्कि निर्माण, रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का भी है, शर्त बस यही है कि नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे की गति इसी तरह बनी रहे।