केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 मार्च 2026 को जारी 236 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश के 63 फीसदी से अधिक शहरों में हवा चिंताजनक बनी हुई है।
मध्य प्रदेश का सिंगरौली 320 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां हवा में पीएम2.5 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2000 फीसदी अधिक है।
वहीं भिवाड़ी और गाजियाबाद भी टॉप तीन सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। दूसरी तरफ श्रीनगर की हवा सबसे साफ दर्ज की गई।
दिल्ली और फरीदाबाद में भी पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदूषण में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
विश्लेषण के मुताबिक 08 मार्च 2026 को देश में सिंगरौली सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 320 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल सिंगरौली में एक्यूआई 303 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 17 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 31 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में गुरुग्राम की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 322 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 49 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 273 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 246 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 247 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में एक अंक का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 300 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 202 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 230 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 मार्च 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 34.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 17 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 4.7 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से करीब 1.6 फीसदी की गिरावट आई है। खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 12.5 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवाड़ी (310) दूसरे जबकि गाजियाबाद (309) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 292 अंकों के साथ ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। नोएडा-गुरुग्राम में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 274 और 273 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
हनुमानगढ़ (269) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में देहरादून (267), धारूहेड़ा (265) और हापुड़ (264) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, हापुड़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, भिवाड़ी, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, देहरादून, धारूहेड़ा, हापुड़, मानेसर, मेरठ, बहादुरगढ़, मंडीदीप, बागपत, फरीदाबाद, किशनगंज, बल्लभगढ़, बुलंदशहर, करनाल, हाजीपुर, बद्दी, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, गया, बर्नीहाट, खुर्जा, छपरा, समस्तीपुर, पटना, अहमदाबाद, गुवाहाटी, जींद, अगरतला, आरा, ग्वालियर, कानपुर, पंचगांव, मोतिहारी, गुम्मिडीपूंडी, नारनौल, दमोह, कटनी, बेंगलुरु, भागलपुर, चंडीगढ़, जयपुर, मुजफ्फरपुर, रूपनगर, कोटा, खन्ना, गांधीनगर, ठाणे, अररिया, सोनीपत, उल्हासनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, हनुमानगढ़, सहरसा, सिलीगुड़ी, भावनगर, कुरुक्षेत्र, धनबाद, भीलवाड़ा, तुमडीह, कुंजेमुरा, पीथमपुर, महाड, जालंधर, पाली, सीकर, कल्याण, चूरू, टोंक, चंद्रपुर, नयागढ़, भिवंडी, नांदेड़, बिलीपाड़ा, पटियाला, चित्तौड़गढ़, मंगुराहा, मिलुपारा, क्योंझर, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, राजकोट, झुंझुनू, झालावाड़, सासाराम, आगरा, गोरखपुर, बांसवाड़ा, जालोर, नागौर, उदयपुर, सिवान, करौली, नवी मुंबई, बेलापुर, जोधपुर, मालेगांव, मंगलौर, विशाखापत्तनम, जैसलमेर, बाड़मेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.1 फीसदी यानी महज पांच शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में आइजोल, भिलाई, मदिकेरी, पंचकुला, श्रीनगर, विरार आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 81 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाना, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नारनौल, नासिक, पलवल, पंपोर, परभनी, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रतलाम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुपति, वापी, वाराणसी, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 125 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, धनबाद, धौलपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कल्याण, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, शिलांग, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, थूथुकुडी, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 21 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अगरतला, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बुलंदशहर, बर्नीहाट, देहरादून, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, करनाल, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पानीपत, सवाई माधोपुर, यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं सिंगरौली, भिवाड़ी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज पांच शहरों में हवा 'बेहतर' है। 81 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 मार्च को यह आंकड़ा 85 दर्ज किया गया था।
125 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 320 पर पहुंच गया। वहीं कल सिंगरौली में एक्यूआई 303 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 17 अंकों का इजाफा हुआ है।
गौरतलब है कि कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 322 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 49 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 273 पर पहुंच गया। इसके साथ ही गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता आज ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 246 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 247 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में एक अंक का मामूली उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 300 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 202 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 230 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 मार्च को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं भिवाड़ी (310) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (309) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 162, गाजियाबाद में 309, गुवाहाटी में 165, गुरूग्राम में 273, नोएडा में 274, ग्रेटर नोएडा में 305 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 205, चेन्नई में 83, चंडीगढ़ में 152, हैदराबाद में 92, जयपुर में 150 और पटना में 171 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन पांच शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, भिलाई, शिवमोगा, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (आंधप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेतिया, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, कटक, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, लुधियाना, मदिकेरी, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुंगेर, नासिक, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, सतना, शिलांग, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सुआकाती, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 81 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
देश में प्रदूषण का ‘हॉटस्पॉट’ बना गुरुग्राम, सिंगरौली में भी 300 के पार एक्यूआई