अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित मौन क्षेत्रों (साइलेंस जोन) के 300 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं होगी। इन सभी क्षेत्रों को 'पटाखा मुक्त क्षेत्र' (नो-क्रैकर जोन) घोषित किया जाएगा। इनकी पहचान के लिए जमीन पर स्पष्ट चिह्न लगाए जाएंगे और इनकी सूची सार्वजनिक की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर, 2026 के अपने आदेश में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भी यही प्रतिबंध लागू करने की बात कही है।
जिन पटाखा निर्माताओं के पास वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से प्रमाणित ग्रीन पटाखों का वैध लाइसेंस है, उन्हें 2 से 6 नवंबर, 2026 तक केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों के निर्माण की अनुमति होगी, जिन्हें सीएसआईआर-नीरी की वेबसाइट पर सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा, लड़ियों (लड़ी) और पटाखों की मालाओं के निर्माण एवं बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। आदेश में दोहराया गया है कि बेरियम युक्त पटाखों और सीएसआईआर-नीरी से ग्रीन पटाखों के रूप में मंजूरी नहीं पाने वाले पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी।
ग्रीन पटाखों के प्रत्येक डिब्बे पर क्यूआर कोड होना अनिवार्य होगा और केवल उन्हीं पटाखों की बिक्री की जा सकेगी, जिन पर संबंधित उत्पाद के लिए जारी विशिष्ट क्यूआर कोड लगा होगा। प्रत्येक डिब्बे पर उत्पाद और उसके बैच के लिए अलग क्यूआर कोड होना चाहिए। इस कोड को स्कैन करने पर निर्माता का नाम, नीरी पंजीकरण संख्या, पीईएसओ/डीएम लाइसेंस, पटाखे में इस्तेमाल किए गए रासायनिक मिश्रण (फॉर्मूलेशन) और परीक्षण प्रमाणपत्र की जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। ये क्यूआर कोड हस्तांतरणीय नहीं होंगे। क्यूआर कोड की बिक्री को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने पर संबंधित पंजीकरण या लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
जिन पटाखा विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, उन्हें 4 से 6 नवंबर, 2026 तक अस्थायी रूप से बहाल किया जाएगा, ताकि वे सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित निर्माताओं से खरीदे गए स्वीकृत ग्रीन पटाखों की बिक्री कर सकें। हालांकि, यदि कोई विक्रेता ऊपर दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से फिर रद्द कर दिया जाएगा और उसे शेष अवधि के दौरान पटाखे बेचने की अनुमति नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के सभी निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए आर्थिक सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) जमा करना अनिवार्य करें। यदि कोई निर्माता या विक्रेता सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्देश अथवा संबंधित नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी जमा सुरक्षा राशि तत्काल जब्त कर ली जाएगी।
जिलाधिकारियों (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर/कमिश्नर) को संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के साथ विचार-विमर्श कर पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थानों की पहचान कर उन्हें अधिसूचित करने का निर्देश दिया गया है। इन निर्धारित स्थानों के अलावा कहीं भी पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाली बिक्री भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थानों पर निगरानी रखने के उद्देश्य से गश्ती दल (पेट्रोलिंग टीम) गठित करने का निर्देश दिया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आने वाले जिलों में संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और उनके क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की निगरानी करने और तीन तरह की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
इनमें पहली रिपोर्ट दिवाली से पहले की होगी। इसमें 2 से 6 नवंबर, 2026 तक हर दिन की वायु गुणवत्ता का ब्योरा दिया जाएगा।
दूसरी रिपोर्ट दिवाली के दौरान की होगी, जिसमें 7 और 8 नवंबर, 2026 की दैनिक वायु गुणवत्ता दर्ज की जाएगी।
तीसरी रिपोर्ट दिवाली के बाद की होगी। इसमें 9 से 30 नवंबर, 2026 तक हर दिन की वायु गुणवत्ता का विवरण शामिल होगा।
इसके अतिरिक्त, तुलनात्मक विश्लेषण के लिए रेत और पानी के नमूने भी एकत्र किए जाएंगे।
जिन वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशनों) से कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और जिन्हें गैर-कार्यशील बताया गया है, उनका निरीक्षण किया जाएगा। यदि उनके कामकाज में कोई खामी पाई जाती है, तो उसे तत्काल प्रभाव से ठीक करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि एक्यूआई के स्तर की प्रभावी निगरानी के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि त्योहार समाप्त होने के बाद उचित कदम उठाए जाएं। इनमें सभी ठोस कचरे (सॉलिड वेस्ट) की सफाई, उसका प्रबंधन और निस्तारण शामिल होगा। इसके अलावा, सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों की सफाई पानी के छिड़काव (वॉटर स्प्रिंकलर) सहित अन्य उपायों से की जाएगी।
अंत में, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक स्वैच्छिक जन-जागरूकता अभियान की संभावना पर भी चर्चा की। इसमें बार के सदस्य, प्रतिष्ठित हस्तियां, फिल्मी सितारे और खिलाड़ी अपनी आवाज और प्रभाव के माध्यम से लोगों को जागरूक कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की भागीदारी नागरिकों को आगामी त्योहार सुरक्षित, जिम्मेदारीपूर्वक और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील तरीके से मनाने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, ताकि न तो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचे और न ही पहले से ही बेहद खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति और बिगड़े।
एनजीटी ने ओडिशा के बौध में अवैध पटाखा गोदाम में विस्फोट के पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का ब्योरा मांगा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पूर्वी पीठ ने ओडिशा के बौध जिले में एक अवैध पटाखा गोदाम में हुए विस्फोट के मामले पर सुनवाई की। मिलेनियम पोस्ट में प्रकाशित खबर के मुताबिक, इस विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हुए थे।
एनजीटी ने 30 अक्टूबर, 2026 के अपने आदेश में कहा कि बौध के जिलाधिकारी एवं कलेक्टर ने घायलों को आई चोटों की प्रकृति, उनके इलाज पर हुए खर्च, आसपास के मकानों को पहुंचे नुकसान, उन मकानों के मालिकों को दिए गए मुआवजे और उनके अन्य संबंधित खर्चों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
अधिकरण ने यह भी कहा कि पटाखा गोदाम का संचालन करने वाले लोगों और मुआवजे के भुगतान के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों का पूरा विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह जानकारी हासिल करने के लिए बौध के कलेक्टर एवं जिलाधिकारी को अतिरिक्त जवाब दाखिल करना जरूरी है।
एनजीटी ने इस मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया। उसने कहा कि मृतक के परिजनों, घायलों और क्षतिग्रस्त मकानों के मालिकों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी ओडिशा सरकार पर भी बनती है या नहीं, इस पर विचार किया जाना आवश्यक है। हालांकि, राज्य सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को अभी तक इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। अधिकरण ने कहा कि उन्हें मामले में पक्षकार बनाना भी जरूरी है।