22 फरवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों ने देश में हवा की चिंताजनक तस्वीर पेश की है। विश्लेषण से पता चला है कि महज 5.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 60.3 फीसदी शहर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।
ओजोन के बढ़ते असर से श्री गंगानगर 304 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां 24 घंटे में 112 अंकों की भारी छलांग दर्ज की गई और प्रदूषण स्तर डब्ल्यूएचओ मानकों से 400 फीसदी ऊपर पहुंच गया।
ब्यासनगर और धारूहेड़ा में भी एक्यूआई 302 दर्ज हुआ, जबकि मंडीदीप 301 के साथ चौथे स्थान पर रहा।
दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर 229 पर पहुंच गया। इसके उलट मदिकेरी (18) समेत सिर्फ 13 शहरों में हवा ‘बेहतर’ रही। आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश के ज्यादातर शहरों में हवा अब भी सेहत के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
विश्लेषण के मुताबिक 22 फरवरी 2026 को देश में श्री गंगानगर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 304 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 21 फरवरी को श्री गंगानगर में एक्यूआई 192 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 112 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में कटक की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 301 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 15 अंकों के सुधार के साथ कटक में सूचकांक घटकर 286 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 213 दर्ज किया गया था, जो 22 फरवरी को 16 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 229 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 फरवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 34.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 18.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 13.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 0.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 35.3 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 189 (+13) दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ब्यासनगर (302) दूसरे जबकि धारूहेड़ा तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 301 अंकों के साथ मंडीदीप चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी-कटक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 292 और 286 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भिवाड़ी (280) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (270), नागपुर (261) और नंदेसरी (260) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (धारूहेड़ा, चरखी दादरी, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि धारूहेड़ा, मंडीदीप, चरखी दादरी, भिवाड़ी, गुरुग्राम, नागपुर, नंदेसरी, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, हापुड़, नाहरलागुन, उज्जैन, मानेसर, नोएडा, कोटा, बागपत, देहरादून, ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, सूरत, वातवा, बालासोर, कोलकाता, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, वडोदरा, फरीदाबाद, हावड़ा, पंचगांव, जयपुर, भोपाल, नागांव, मंडी गोबिंदगढ़, नारनौल, अहमदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, मेहसाणा, उल्हासनगर, करनाल, बर्नीहाट, भुवनेश्वर, कुरुक्षेत्र, इंदौर, आसनसोल, डूंगरपुर, गुवाहाटी, देवास, दुर्गापुर, ग्वालियर, हल्दिया, नवी मुंबई, बारीपदा, भीलवाड़ा, मुजफ्फरनगर, कटनी, सीकर, राजसमंद, मेरठ, सोनीपत, गांधीनगर, अमरावती (महाराष्ट्र), जलगांव, कल्याण, बूंदी, यमुना नगर, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, राउरकेला, जालंधर, जींद, कानपुर, मुंबई, प्रतापगढ़, चंडीगढ़, जबलपुर, खन्ना, रायपुर, पंचकुला, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, लखनऊ, नलबाड़ी, मुरादाबाद, मीरा-भायंदर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं टोंक, सिरसा, भावनगर, बारबिल, बद्दी, तालचेर, कुंजेमुरा, चंद्रपुर, पीथमपुर, नयागढ़, भिवंडी, पाली, रतलाम, ब्रजराजनगर, बेलापुर, दौसा, बोइसर, हाजीपुर, राजकोट, विरार, बदलापुर, जालोर, विशाखापत्तनम, खुर्जा, सिलीगुड़ी, धनबाद, नागौर, अलवर, हनुमानगढ़, महाड, जैसलमेर, ठाणे, चूरू, झुंझुनू, पटना, आगरा, धौलपुर, लुधियाना, अजमेर, अकोला, हिसार, तुमकुरु, तुमडीह, करौली, रायरंगपुर, मालेगांव आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 5.5 फीसदी यानी महज 13 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में दमोह, कोल्हापुर, मदिकेरी, मुंगेर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 81 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें छपरा, चित्तूर, धारवाड़, धुले, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोहिमा, कोरबा, लातूर, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नांदेड़, नासिक, पलवल, पंपोर, पानीपत, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, बेतिया, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, देवास, धनबाद, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोनीपत, तालचेर, ठाणे, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 23 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, चरखी दादरी, कटक, देहरादून, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, कोटा, मानेसर, नागपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नोएडा, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सूरत, उज्जैन, वातवा शामिल हैं। वहीं ब्यासनगर, धारूहेड़ा, मंडीदीप, श्री गंगानगर में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज 13 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 81 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 94 दर्ज किया गया था।
116 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 304 पर पहुंच गया। इससे पहले कल श्री गंगानगर में एक्यूआई 192 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 112 अंकों का इजाफा हुआ है।
कल कटक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 दर्ज किया गया था। वहीं आज 15 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 286 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में 22 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 213 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 229 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 16 अंकों का इजाफा हुआ है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 280 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 176 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 189 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 फरवरी को मंडीदीप चौथे स्थान पर है, वहीं ब्यासनगर (302) दूसरे, जबकि धारूहेड़ा (302) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 145, गाजियाबाद में 250, गुवाहाटी में 149, गुरूग्राम में 270, नोएडा में 215, ग्रेटर नोएडा में 210 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 121 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 107, चेन्नई में 76, चंडीगढ़ में 116, हैदराबाद में 80, जयपुर में 165 और पटना में 113 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 13 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दमोह, कोल्हापुर, मदिकेरी, मुंगेर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, बारां, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भिवानी, बिलासपुर, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, धारवाड़, धुले, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोहिमा, कोरबा, लातूर, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नांदेड़, नासिक, पलवल, पंपोर, पानीपत, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, वृंदावन, यादगीर आदि 81 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
कटक बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, बढ़ते ओजोन से 300 के पार पहुंचा एक्यूआई