सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं रहा वायु प्रदूषण; प्रतीकात्मक तस्वीर: विकास चौधरी/सीएसई  
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सिंगरौली में बढ़ते प्रदूषण से राहत नहीं, 335 एक्यूआई, दिल्ली-फरीदाबाद में आया सुधार

सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है

Lalit Maurya

  • 09 मार्च 2026 को देश के 233 शहरों में सबसे खराब वायु गुणवत्ता सिंगरौली में दर्ज की गई, जहां एक्यूआई 335 तक पहुंच गया। इस दौरान प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक रहा।

  • वहीं दिल्ली-फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन वायु गुणवत्ता अभी भी खराब बनी हुई है।

  • ट्रेंड बताता है कि सिंगरौली में पीएम2.5 के कणों का प्रभुत्व स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। देश के अधिकांश शहरों की हवा भी सुरक्षित नहीं है।

  • आंकड़ों के मुताबिक जहां 60.1 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता चिंताजनक है। वहीं 36.9 फीसदी में संतोषजनक और महज तीन फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • प्रदूषण के मामले में अन्य शीर्ष शहरों में बल्लभगढ़, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद शामिल हैं। इसके विपरीत शिलांग, आइजोल और पुदुचेरी जैसे सात शहरों में हवा साफ दर्ज की गई। आंकड़े साफ बताते हैं कि देश के ज्यादातर हिस्सों में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।

विश्लेषण के मुताबिक 09 मार्च 2026 को देश में एक बार फिर सिंगरौली सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 335 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल सिंगरौली में एक्यूआई 320 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 15 अंकों का इजाफा हुआ है।

रुझानों में सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 31 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 10.8 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 247 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 209 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 38 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 350 फीसदी अधिक खराब है।         

इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 230 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 208 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।  

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 09 मार्च 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज तीन फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 36.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 6.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 0.8 फीसदी की गिरावट आई है। खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 33.3 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (313) दूसरे जबकि भिवाड़ी (291) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 260 अंकों के साथ ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-देहरादून में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 257 और 250 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गाजियाबाद (246) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बहादुरगढ़ (241), मंडीदीप (236) और धारूहेड़ा (229) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (बल्लभगढ़, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, भिवाड़ी, गुरुग्राम, देहरादून, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, मंडीदीप, धारूहेड़ा, सहरसा, नोएडा, काशीपुर, मानेसर, हापुड़, नारनौल, किशनगंज, महाड, बद्दी, बागपत, हाजीपुर, पटना, तुमडीह, आरा, चित्तौड़गढ़, सांगली, बर्नीहाट, छपरा, मंगुराहा, ठाणे, अगरतला, कानपुर, मोतिहारी, बिहार शरीफ, जींद, सोनीपत, दमोह, रायबरेली, करनाल, उल्हासनगर, बक्सर, पंचगांव, खन्ना आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, फरीदाबाद, बुलंदशहर, लखनऊ, हनुमानगढ़, मेरठ, गया, कुरुक्षेत्र, जलगांव, राजकोट, खुर्जा, सीकर, कुंजेमुरा, सिलीगुड़ी, भागलपुर, जयपुर, बेंगलुरु, चंद्रपुर, रतलाम, कल्याण, भोपाल, झालावाड़, बीकानेर, ग्वालियर, मुरादाबाद, आगरा, मीरा-भायंदर, भिवंडी, क्योंझर, नयागढ़, जालंधर, कोटा, पाली, औरंगाबाद (बिहार), भीलवाड़ा, बिलीपाड़ा, जोधपुर, नागौर, सूरत, विरार, नवी मुंबई, जालोर, पुणे, टोंक, कैथल, वाराणसी, चंडीगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के तीन फीसदी यानी महज 7 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में आइजोल, बागलकोट, भिलाई, मुंगेर, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 86 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सतना, शिवमोगा, सिलचर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 124 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अंबाला, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, देवास, धनबाद, धौलपुर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मंगुराहा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायबरेली, राजगीर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, ठाणे, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विरार, यादगीर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, भिवाड़ी, देहरादून, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, काशीपुर, मंडीदीप, मानेसर, नोएडा, सहरसा शामिल हैं।

वहीं सिंगरौली, बल्लभगढ़ में स्थिति बेहद खराब है।  

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से महज सात शहरों में हवा 'बेहतर' है। 86 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 08 मार्च को यह आंकड़ा 81 दर्ज किया गया था।

124 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भी सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 335 पर पहुंच गया। वहीं कल सिंगरौली में एक्यूआई 320 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 15 अंकों का इजाफा हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 247 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 209 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 38 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 350 फीसदी अधिक खराब है।                

इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 230 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 208 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।         

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 09 मार्च को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (313) दूसरे, जबकि भिवाड़ी (291) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 132, गाजियाबाद में 246, गुवाहाटी में 113, गुरूग्राम में 257, नोएडा में 210, ग्रेटर नोएडा में 260 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 127 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 188, चेन्नई में 68, चंडीगढ़ में 108, हैदराबाद में 89, जयपुर में 146 और पटना में 168 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, भिलाई, मुंगेर, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेतिया, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सुआकाती, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि 86 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

236 में से 63 फीसदी शहरों में हवा चिंताजनक, सिंगरौली में 320 अंकों के साथ हालात सबसे खराब