फोटो: विकास चौधरी, सीएसई 
वायु

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से हाल खराब: गाजियाबाद में 376 पर पहुंचा एक्यूआई

दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 343 दर्ज किया गया था, जो आज 11 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 354 पर पहुंच गया है

Lalit Maurya

  • दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है, खासकर गाजियाबाद में जहां एक्यूआई 376 तक पहुंच गया है।

  • यह स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक खराब है।      नोएडा और दिल्ली में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • 16 जनवरी 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 1.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 30.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 67.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 16 जनवरी 2026 को देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 376 रिकॉर्ड किया गया। कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 321 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 55 अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि वहां अभी भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।         

रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में बागलकोट की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 46 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना बागलकोट से करें तो वहां स्थिति सात गुणा खराब है।

कल देश में नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 344 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 19 अंकों के उछाल के साथ नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 363 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब से खराब श्रेणी में है।  

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 343 दर्ज किया गया था, जो आज 11 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 354 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 2,100 फीसदी अधिक खराब है।     

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 16 जनवरी 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 1.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 30.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 67.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 33.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 9.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 19.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 23.7 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 14.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।  

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 245 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नोएडा (363) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (358) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 354 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-बल्लभगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 347 और 342 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

धारूहेड़ा (330) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बद्दी (316), भिवाड़ी (298), मेरठ (293) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ) और हरियाणा के तीन शहर (गुरुग्राम, बल्लभगढ़ धारूहेड़ा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, बद्दी, भिवाड़ी, मेरठ, बुलंदशहर, चरखी दादरी, नारनौल, मुजफ्फरनगर, तालचेर, देहरादून, मानेसर, फरीदाबाद, पानीपत, मंडी गोबिंदगढ़, बागपत, सिंगरौली, पंचकुला, गुम्मिडीपूंडी, यमुना नगर, चूरू, लखनऊ, करनाल, हिसार, बूंदी, कोटा, अंगुल, पीथमपुर, बालासोर, ग्वालियर, बीकानेर, कुरुक्षेत्र, सीकर, बहादुरगढ़, चंडीगढ़, हाजीपुर, कानपुर, सिवान, मुरादाबाद, हावड़ा, रोहतक, चित्तौड़गढ़, गुवाहाटी, कोलकाता, आसनसोल, जयपुर, जींद, विशाखापत्तनम, काशीपुर, बर्नीहाट, भीलवाड़ा, पटना, नाहरलागुन, उज्जैन, बेगूसराय, कटनी, प्रतापगढ़, जालोर, उल्हासनगर, पुणे, डूंगरपुर, नलबाड़ी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, मंडीदीप, खुर्जा, टोंक, सवाई माधोपुर, नागौर, श्री गंगानगर, आगरा, जैसलमेर, हनुमानगढ़, झुंझुनू, दौसा, बाड़मेर, बेलापुर, भिवंडी, क्योंझर, पटियाला, खन्ना, पाली, कुंजेमुरा, अजमेर, फतेहाबाद, जालंधर, वातवा, चंद्रपुर, धनबाद, रतलाम, मालेगांव, सिलीगुड़ी, बारां, सुआकाती, बोइसर, मंगुराहा, बदलापुर, नांदेड़, पलवल, औरंगाबाद (बिहार), कडप्पा, भरतपुर, लुधियाना, छपरा, अमृतसर, भागलपुर, नासिक, पुडुकोट्टई, सागर, ब्रजराजनगर, प्रयागराज आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 1.6 फीसदी यानी महज चार शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, कलबुर्गी, कोप्पल आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 75 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें धारवाड़, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, जलना, झांसी, कन्नूर, करौली, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, महाड, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मैसूर, नयागढ़, ऊटी, परभनी, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनाथपुरम, रूपनगर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 129 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंगुल, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छपरा, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, देवास, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुकोट्टई, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तिरुमाला, तुमकुरु, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 29 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, बूंदी, चरखी दादरी, चूरू, कटक, देहरादून, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, हिसार, करनाल, खुर्जा, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, पंचकुला, पानीपत, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, तालचेर, टोंक, यमुना नगर शामिल हैं।

वहीं बद्दी, बल्लभगढ़, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, नोएडा में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से महज चार शहरों में हवा 'बेहतर' है। 75 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 15 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 83 दर्ज किया गया था।

129 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद (376) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 380 के करीब पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 55 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके बावजूद अभी भी गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है।        

कल देश में नोएडा की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 344 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 19 अंकों के उछाल के साथ नॉएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 363 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता आज भी बेहद खराब है।  

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 343 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 11 अंकों के उछाल के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 354 पर पहुंच गया है। मतलब कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण के स्तर में उछाल आया है, जहां सूचकांक 245 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 16 जनवरी को दिल्ली चौथे स्थान पर है, वहीं नोएडा (363) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (358) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 196, गाजियाबाद में 376, गुवाहाटी में 177, गुरूग्राम में 347, नोएडा में 363, ग्रेटर नोएडा में 358 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 112 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 214, चेन्नई में 97, चंडीगढ़ में 186, हैदराबाद में 82, जयपुर में 174 और पटना में 162 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन चार शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, कलबुर्गी, कोप्पल शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, भिवानी, बिलासपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दावनगेरे, धारवाड़, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, जलना, झांसी, कन्नूर, करौली, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, महाड, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मैसूर, नयागढ़, ऊटी, परभनी, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनाथपुरम, रूपनगर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 75 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

प्रदूषित शहरों में टॉप पर नोएडा, मानकों से 21 गुणा अधिक प्रदूषण