वायु

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बिगड़े हालात, गाजियाबाद में 351, दिल्ली में 346 पर पहुंचा एक्यूआई

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज नौ रिकॉर्ड किया गया।

Lalit Maurya

  • दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो गई है, जहां गाजियाबाद का एक्यूआई 351 और दिल्ली का 346 पर पहुंच गया है।

  • गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है। दिल्ली में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 9 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 38 गुणा खराब है।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 345 दर्ज किया गया था, जो आज एक अंक के इजाफे के साथ बढ़कर 346 पर पहुंच गया।

  • 10 जनवरी 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 28.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 197 रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (349) दूसरे जबकि नोएडा (348) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 346 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है।

  • ग्रेटर नोएडा-नारनौल में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 338 और 322 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • टोंक (322) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सीकर (314), बूंदी (292), धारूहेड़ा (291) भी शामिल हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 10 जनवरी 2026 को देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 351 रिकॉर्ड किया गया। कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 347 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में चार अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।

रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।  

गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 9 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 38 गुणा खराब है।

कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 373 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 24 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 349 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता आज भी बेहद खराब बनी हुई है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 345 दर्ज किया गया था, जो आज एक अंक के इजाफे के साथ बढ़कर 346 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 600 फीसदी अधिक खराब है।       

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 जनवरी 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 28.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 71.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.1 अंकों की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी करीब सात फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 34.6 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 197 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (349) दूसरे जबकि नोएडा (348) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 346 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा-नारनौल में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 338 और 322 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

टोंक (322) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सीकर (314), बूंदी (292), धारूहेड़ा (291) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन (गुरुग्राम, नारनौल, धारूहेड़ा) और उत्तर प्रदेश के तीन (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, नारनौल, टोंक, सीकर, बूंदी, धारूहेड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, भीलवाड़ा, बुलंदशहर, मेरठ, बद्दी, चरखी दादरी, बागपत, मंडीखेड़ा, हापुड़, मुजफ्फरनगर, राजसमंद, आरा, धौलपुर, ग्वालियर, मानेसर, झालावाड़, मंडी गोबिंदगढ़, नागौर, सिंगरौली, उज्जैन, भोपाल, कानपुर, डूंगरपुर, चूरू, भरतपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, पाली, जालोर, हाजीपुर, करनाल, चंडीगढ़, कोल्लम, परभनी, बहादुरगढ़, कटनी, कुरुक्षेत्र, कोलकाता आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, दिल्ली, मंडीदीप, भिवाड़ी, आगरा, खुर्जा, बेगूसराय, फरीदाबाद, लखनऊ, तालचेर, बीकानेर, हावड़ा, कल्याण, कटक, पिंपरी-चिंचवाड़, अहमदाबाद, अंकलेश्वर, गांधीनगर, रतलाम, अलवर, औरंगाबाद (बिहार), अंगुल, बांसवाड़ा, हनुमानगढ़, भुवनेश्वर, श्री गंगानगर, वाराणसी, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बदलापुर, सहरसा, महाद, बारां, कुंजेमुरा, जलगांव, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, भिवंडी, भागलपुर, सवाई माधोपुर, फतेहाबाद, छपरा, मालेगांव, राजमहेंद्रवरम, तुमकुरु, मुंबई, रायरंगपुर, धनबाद, गया, जालंधर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), नांदेड़, विरार, बेंगलुरु, चंद्रपुर, चिक्कबल्लापुर, दुर्गापुर, पटियाला, लुधियाना, राउरकेला, बोइसर, ठाणे, अकोला, खन्ना, विशाखापत्तनम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 4.9 फीसदी यानी महज 12 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, डिंडीगुल, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, मदिकेरी, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, तंजावुर, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 70 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, भिवानी, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, धारवाड़, धुले, एलूर, फिरोजाबाद, हुबली, हैदराबाद, जलना, कन्नूर, करूर, कटिहार, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मदुरै, मैहर, मुंगेर, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, नवी मुंबई आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छपरा, चिक्कबल्लापुर, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धनबाद, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, खन्ना, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मालेगांव, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, पलवल, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सीवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 35 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आगरा, आरा, बद्दी, बागपत, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बुलंदशहर, बूंदी, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, ग्वालियर, हापुड़, जैसलमेर, झालावाड़, झुंझुनू, कानपुर, खुर्जा, कोटा, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, पाली, राजसमंद, सिंगरौली, उज्जैन शामिल हैं।

वहीं दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, नारनौल, नोएडा, सीकर, टोंक में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से महज 12 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 70 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 73 दर्ज किया गया था।

122 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद (351) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 360 पर पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में चार अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज भी गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है।   

कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 373 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 24 अंकों के सुधार के साथ गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 349 पर पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 345 दर्ज किया गया था। हालांकि आज एक अंक के इजाफे के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 346 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बेहद खराब है। दिल्ली की तरह ही कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 197 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 जनवरी को दिल्ली चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (349) दूसरे, जबकि नोएडा (348) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 233, गाजियाबाद में 351, गुवाहाटी में 127, गुरूग्राम में 349, नोएडा में 348, ग्रेटर नोएडा में 338 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 115 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 195, चेन्नई में 78, चंडीगढ़ में 192, हैदराबाद में 87, जयपुर में 190 और पटना में 157 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 12 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, डिंडीगुल, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, मदिकेरी, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, तंजावुर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, भिवानी, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, धारवाड़, धुले, एलूर, फिरोजाबाद, हुबली, हैदराबाद, जलना, कन्नूर, करूर, कटिहार, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मदुरै, मैहर, मुंगेर, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंपोर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायपुर, रामनाथपुरम, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तुमडीह, वापी, वृंदावन, यादगीर आदि 70 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

प्रदूषण में पहले स्थान पर गुरुग्राम, दिल्ली में भी बढ़कर 345 पर पहुंचा एक्यूआई