वायु

दिल्ली-फरीदाबाद में गिरावट के साथ भोपाल में प्रदूषण से बिगड़े हालात, खराब हवा वाले शहरों में हुआ इजाफा

देश में साफ हवा वाले शहरों की संख्या बढ़कर 11 फीसदी के करीब पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ करीब 62 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं

Lalit Maurya

दिल्ली-फरीदाबाद जैसे शहरों को पीछे छोड़ टोंक-बर्नीहाट जैसे छोटे शहरों में प्रदूषण से हालात ज्यादा बिगड़ चुके हैं। टोंक में तो वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 319 तक पहुंच गया है।

इसी तरह बर्नीहाट में भी स्थिति 'बेहद खराब' बनी हुई है। वहीं दिल्ली-फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि दिल्ली में 61 अंकों के सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 285 तक पहुंच गया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में प्रदूषण से स्थिति 'खराब' बनी हुई है।

फरीदाबाद में कल से प्रदूषण के स्तर में 24 अंकों की गिरावट आई है, जिसके बाद वहां एक्यूआई गिरकर 151 पर पहुंच गया है। आज देश में टोंक की स्थिति सबसे खराब रही, वहीं कल दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा था, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 तक पहुंच गया है।

देश में दिल्ली की तरह ही छोटे बड़े 40 अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 'खराब' बने हुए हैं।

इन शहरों में आरा, बद्दी, बहादुरगढ़, बेगूसराय, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बोईसर, बुलन्दशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चित्तौड़गढ़, चुरू, दिल्ली, देवास, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरूग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, जलगांव, झुंझुनूं, कोटा, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नासिक, नोएडा, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, राजसमंद, सहरसा, सासाराम, सीकर, सिंगरौली शामिल हैं।

चिंता की बात यह है कि कल से देश में 'खराब' हवा वाले शहरों की गिनती में 17 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

दूसरी तरफ देश में रानीपेट की हवा सबसे साफ है, जहां सूचकांक 18 रिकॉर्ड किया गया है। इसी तरह देश के 26 अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता साफ बनी हुई है।

इन शहरों में कुंजेमुरा, मदिकेरी , मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, पालकालाइपेरुर, राजमहेंद्रवरम, शिलांग, शिवसागर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली आदि शामिल हैं। वहीं कल से तुलना करें तो देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 93 फीसदी का इजाफा हुआ है।

इसी तरह देश में अगरतला सहित 70 अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

इन शहरों में रामनगर, रामनाथपुरम, राउरकेला, रूपनगर, सलेम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपुर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम आदि शहर शामिल हैं।

कल के मुकाबले देखें तो देश में संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में करीब सात फीसदी की गिरावट आई है।

ताजा रुझानों के मुताबिक देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर मध्यम बना हुआ है। इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अम्बाला, अमरावती, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, दमोह, दौसा, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, डिंडीगुल, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, हनुमानगढ़, हापुड,

हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करूर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुरूक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मांडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रतलाम, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वातवा, विरार, वृंदावन, यमुनानगर शामिल हैं। 

राहत की बात यह रही कि देश में मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में नौ फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

कुल मिलाकर देखें तो देश में साफ हवा वाले शहरों की संख्या बढ़कर 11 फीसदी के करीब पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ करीब 62 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। वहीं 28 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर संतोषजनक बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक दिसंबर 2024 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 257 में से महज 27 शहरों में हवा 'बेहतर' (0-50 के बीच) रही। वहीं 71 शहरों में वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) है, गौरतलब है कि 30 नवंबर 2024 को यह आंकड़ा 76 दर्ज किया गया था। 116 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में टोंक (319) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां आज एक्यूआई 330 के करीब पहुंच गया। वहीं कल दिल्ली में हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 दर्ज किया गया था।

आंकड़ों पर गौर करें तो कल से प्रदूषण दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 61 अंकों की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी 'खराब' बनी हुई है। नवंबर में पिछले 30 दिनों से लगातार दिल्ली की हवा ‘जहरीली’ है, जो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

इसी तरह नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। देखा जाए तो कहीं न कहीं देश में प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव का दौर अभी भी जारी है। बता दें कि प्रदूषण के मामले में आज दिल्ली छठे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (315) दूसरे, जबकि हाजीपुर (299) तीसरे स्थान पर है।  

दिल्ली के अलावा फरीदाबाद में इंडेक्स 151, गाजियाबाद में 222, गुरुग्राम में 251, नोएडा में 215, ग्रेटर नोएडा में गिरकर 230 पर पहुंच गया है।

देश के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 167 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम’ स्तर को दर्शाता है। जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 207, चेन्नई में 24, चंडीगढ़ में 240, हैदराबाद में 84, जयपुर में 196 और पटना में 213 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 27 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती, अनंतपुर, बागलकोट, बठिंडा, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कामगलुरु, चित्तूर, हावेरी, कडपा, कलबुर्गी, कुंजेमुरा, मदिकेरी , मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, पालकालाइपेरुर, राजमहेंद्रवरम, रानीपेट, शिलांग, शिवसागर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, तिरुपति, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अंगुल, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेंगलुरु, भिलाई, भुवनेश्वर, बीदर, बिलासपुर, ब्यासनगर, चेंगलपट्टू, छाल, चिकबलपुर, कोयंबटूर, कटक, दावनगेरे, देहरादून, धौलपुर, एलूर, गडग, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, कन्नूर, करनाल, कारवार, काशीपुर, क्योंझर, कोहिमा, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, मैहर, मंगुराहा, नगांव, नागपट्टिनम, नाहरलगुन, नलबाड़ी, नयागढ़, पलवल, पुदुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रामनाथपुरम, राउरकेला, रूपनगर, सलेम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपुर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि 71 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

दिल्ली-फरीदाबाद जैसे शहरों को पीछे छोड़ टोंक-बर्नीहाट जैसे छोटे शहरों में प्रदूषण से हालात ज्यादा बिगड़ चुके हैं। टोंक में तो वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 319 तक पहुंच गया है।

इसी तरह बर्नीहाट में भी स्थिति 'बेहद खराब' बनी हुई है। वहीं दिल्ली-फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि दिल्ली में 61 अंकों के सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 285 तक पहुंच गया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में प्रदूषण से स्थिति 'खराब' बनी हुई है।

फरीदाबाद में कल से प्रदूषण के स्तर में 24 अंकों की गिरावट आई है, जिसके बाद वहां एक्यूआई गिरकर 151 पर पहुंच गया है। आज देश में टोंक की स्थिति सबसे खराब रही, वहीं कल दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा था, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 तक पहुंच गया है।

देश में दिल्ली की तरह ही छोटे बड़े 40 अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 'खराब' बने हुए हैं।

इन शहरों में आरा, बद्दी, बहादुरगढ़, बेगूसराय, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बोईसर, बुलन्दशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चित्तौड़गढ़, चुरू, दिल्ली, देवास, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरूग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, जलगांव, झुंझुनूं, कोटा, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नासिक, नोएडा, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, राजसमंद, सहरसा, सासाराम, सीकर, सिंगरौली शामिल हैं।

चिंता की बात यह है कि कल से देश में 'खराब' हवा वाले शहरों की गिनती में 17 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।

दूसरी तरफ देश में रानीपेट की हवा सबसे साफ है, जहां सूचकांक 18 रिकॉर्ड किया गया है। इसी तरह देश के 26 अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता साफ बनी हुई है।

इन शहरों में कुंजेमुरा, मदिकेरी , मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, पालकालाइपेरुर, राजमहेंद्रवरम, शिलांग, शिवसागर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली आदि शामिल हैं। वहीं कल से तुलना करें तो देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 93 फीसदी का इजाफा हुआ है।

इसी तरह देश में अगरतला सहित 70 अन्य शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

इन शहरों में रामनगर, रामनाथपुरम, राउरकेला, रूपनगर, सलेम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपुर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम आदि शहर शामिल हैं।

कल के मुकाबले देखें तो देश में संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में करीब सात फीसदी की गिरावट आई है।

ताजा रुझानों के मुताबिक देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर मध्यम बना हुआ है। इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अम्बाला, अमरावती, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, दमोह, दौसा, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, डिंडीगुल, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, हनुमानगढ़, हापुड,

हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करूर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुरूक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मांडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रतलाम, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वातवा, विरार, वृंदावन, यमुनानगर शामिल हैं। 

राहत की बात यह रही कि देश में मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में नौ फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

कुल मिलाकर देखें तो देश में साफ हवा वाले शहरों की संख्या बढ़कर 11 फीसदी के करीब पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ करीब 62 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। वहीं 28 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर संतोषजनक बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक दिसंबर 2024 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 257 में से महज 27 शहरों में हवा 'बेहतर' (0-50 के बीच) रही। वहीं 71 शहरों में वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) है, गौरतलब है कि 30 नवंबर 2024 को यह आंकड़ा 76 दर्ज किया गया था। 116 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में टोंक (319) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां आज एक्यूआई 330 के करीब पहुंच गया। वहीं कल दिल्ली में हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 दर्ज किया गया था।

आंकड़ों पर गौर करें तो कल से प्रदूषण दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 61 अंकों की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी 'खराब' बनी हुई है। नवंबर में पिछले 30 दिनों से लगातार दिल्ली की हवा ‘जहरीली’ है, जो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

इसी तरह नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। देखा जाए तो कहीं न कहीं देश में प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव का दौर अभी भी जारी है। बता दें कि प्रदूषण के मामले में आज दिल्ली छठे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (315) दूसरे, जबकि हाजीपुर (299) तीसरे स्थान पर है।  

दिल्ली के अलावा फरीदाबाद में इंडेक्स 151, गाजियाबाद में 222, गुरुग्राम में 251, नोएडा में 215, ग्रेटर नोएडा में गिरकर 230 पर पहुंच गया है।

देश के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 167 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम’ स्तर को दर्शाता है। जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 207, चेन्नई में 24, चंडीगढ़ में 240, हैदराबाद में 84, जयपुर में 196 और पटना में 213 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 27 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती, अनंतपुर, बागलकोट, बठिंडा, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कामगलुरु, चित्तूर, हावेरी, कडपा, कलबुर्गी, कुंजेमुरा, मदिकेरी , मदुरै, मिलुपारा, मैसूर, पालकालाइपेरुर, राजमहेंद्रवरम, रानीपेट, शिलांग, शिवसागर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, तिरुपति, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अंगुल, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेंगलुरु, भिलाई, भुवनेश्वर, बीदर, बिलासपुर, ब्यासनगर, चेंगलपट्टू, छाल, चिकबलपुर, कोयंबटूर, कटक, दावनगेरे, देहरादून, धौलपुर, एलूर, गडग, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, कन्नूर, करनाल, कारवार, काशीपुर, क्योंझर, कोहिमा, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, मैहर, मंगुराहा, नगांव, नागपट्टिनम, नाहरलगुन, नलबाड़ी, नयागढ़, पलवल, पुदुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रामनाथपुरम, राउरकेला, रूपनगर, सलेम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपुर, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि 71 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।