गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक क्रमशः 425, 412 और 410 दर्ज किया गया।
शिलांग देश का सबसे साफ शहर है, जहां सूचकांक मात्र 14 है।
19 जनवरी 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 32.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 253 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नोएडा (412) दूसरे जबकि दिल्ली (410) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 379 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है।
पानीपत- धारूहेड़ा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 379 और 378 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (375) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (348), भिवाड़ी (344) और नारनौल (337) भी शामिल हैं।
आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत) और हरियाणा के पांच शहर (गुरुग्राम, पानीपत, धारूहेड़ा, भिवाड़ी, नारनौल) शामिल हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 19 जनवरी 2026 को एक बार फिर देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 425 रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 18 जनवरी को गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 458 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 33 अंकों का सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद वहां वायु गुणवत्ता अभी भी गंभीर बनी हुई है।
रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 29 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से भले ही प्रदूषण में गिरावट आई है, लेकिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी गंभीर बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 दर्ज किया गया था। हालांकि 19 जनवरी को 30 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में ग्रेप-4 लागू है। बता दें कि ग्रेप-4 को तभी लागू किया जाता है जब हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है और इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडराने लगता है। गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 19 जनवरी 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 32.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 7.8 फीसदी की गिरावट आई है। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 14.3 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 25 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 253 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नोएडा (412) दूसरे जबकि दिल्ली (410) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 379 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है। पानीपत- धारूहेड़ा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 379 और 378 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (375) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (348), भिवाड़ी (344) और नारनौल (337) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत) और हरियाणा के पांच शहर (गुरुग्राम, पानीपत, धारूहेड़ा, भिवाड़ी, नारनौल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, पानीपत, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, बागपत, भिवाड़ी, नारनौल, बालासोर, मेरठ, सिंगरौली, जींद, बीकानेर, मानेसर, तालचेर, आसनसोल, हापुड़, बुलंदशहर, चूरू, बारीपदा, टोंक, करनाल, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, मुजफ्फरनगर, सीकर, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, मंडीखेड़ा, जैसलमेर, कैथल, कोलकाता, अंगुल, ग्वालियर, हाजीपुर, नाहरलागुन, झुंझुनू, गुम्मिडीपूंडी, भिवानी, सिरसा, समस्तीपुर, जालंधर, बक्सर, वातवा, फतेहाबाद, राजगीर, जयपुर, नागपुर, यमुना नगर, बहादुरगढ़, नागौर, अंबाला, सहरसा, कोटा, राउरकेला, चरखी दादरी, धौलपुर, खुर्जा, सवाई माधोपुर, हल्दिया, दौसा, राजमहेंद्रवरम, बूंदी, मुरादाबाद, प्रयागराज, चित्तौड़गढ़, नलबाड़ी, पुणे, बैरकपुर, मुजफ्फरपुर, अररिया, कुड्डालोर, सोनीपत, सोलापुर, तुमकुरु, चंडीगढ़, पुडुचेरी, उज्जैन, पंपोर, पूर्णिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं गाजियाबाद, धनबाद, हावड़ा, दुर्गापुर, गुवाहाटी, लखनऊ, श्री गंगानगर, पटना, कानपुर, क्योंझर, ब्रजराजनगर, गांधीनगर, आगरा, पटियाला, गया, बद्दी, भागलपुर, अहमदाबाद, अलवर, बेगूसराय, वाराणसी, तुमडीह, औरंगाबाद (बिहार), अंकलेश्वर, बिलीपाड़ा, नयागढ़, कुंजेमुरा, सिलीगुड़ी, जालोर, कल्याण, अमरावती आंध्रप्रदेश), पलवल, अजमेर, अमृतसर, नांदेड़, चंद्रपुर, उल्हासनगर, रामनगर, आरा, प्रतापगढ़, धुले, खन्ना, लुधियाना, बारबिल, सागर, भिवंडी, परभनी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 3.7 फीसदी यानी महज 9 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, बेलगाम, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, मदिकेरी, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 80 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें देहरादून, देवास, धारवाड़, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदुरै, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 106 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बहादुरगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिवंडी, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, जयपुर, जालंधर, जालोर, जोधपुर, कल्याण, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, राउरकेला, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तिरुमाला, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, आसनसोल, बारीपदा, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बुलंदशहर, चूरू, धनबाद, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, जैसलमेर, झुंझुनू, कैथल, करनाल, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, मंडीखेड़ा, मुजफ्फरनगर, नाहरलागुन, समस्तीपुर, सीकर, सिरसा, तालचेर, टोंक, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
वहीं बागपत, बालासोर, भिवाड़ी, बीकानेर, ब्यासनगर, कटक, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, जींद, मानेसर, मेरठ, नारनौल, पानीपत, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है। इसी तरह देश में दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में स्थिति गंभीर है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से महज 9 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 80 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 18 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 64 दर्ज किया गया था।
106 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज भी गाजियाबाद (425) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। आंकड़ों के मुताबिक वहां कल से प्रदूषण में 33 अंकों का सुधार आया है। हालांकि गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी गंभीर बनी हुई है।
दिल्ली में भी आज स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि कल दिल्ली में एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था। मतलब कि कल से आज दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 2500 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है, जहां सूचकांक 253 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 19 जनवरी को गुरुग्राम चौथे स्थान पर है, वहीं नोएडा (412) दूसरे, जबकि दिल्ली (410) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 217, गाजियाबाद में 425, गुवाहाटी में 196, गुरूग्राम में 379, नोएडा में 412, ग्रेटर नोएडा में 375 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 85 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 193, चेन्नई में 118, चंडीगढ़ में 133, हैदराबाद में 80, जयपुर में 192 और पटना में 168 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 9 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेलगाम, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, मदिकेरी, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, देहरादून, देवास, धारवाड़, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदुरै, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनाथपुरम, रतलाम, ऋषिकेश, रूपनगर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 80 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
18 जनवरी को दिल्ली में दर्ज हुआ 2026 का सबसे प्रदूषित दिन, 440 तक पहुंचा एक्यूआई