बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना ओड़िशा, ब्यासनगर में 300 पर पहुंचा एक्यूआई

ब्यासनगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है

Lalit Maurya

  • ओडिशा में वायु प्रदूषण तेजी से गंभीर होता दिख रहा है। 05 मार्च 2026 को ब्यासनगर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 तक पहुंच गया और हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई।

  • विश्लेषण के मुताबिक शहर की हवा में ओजोन का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 400 फीसदी अधिक है।

  • वहीं देश के कई अन्य शहरों में भी हवा चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि दिल्ली और फरीदाबाद में पिछले 24 घंटों में प्रदूषण में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर भिलाई देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 29 रिकॉर्ड किया गया।

विश्लेषण के मुताबिक 05 मार्च 2026 को देश में ब्यासनगर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ब्यासनगर में एक्यूआई 289 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 13 अंकों का इजाफा हुआ है।

रुझानों में सामने आया है कि ब्यासनगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। ब्यासनगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में भिलाई की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 29 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ब्यासनगर की तुलना भिलाई से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में कटक की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 308 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 85 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 223 पर पहुंच गया है।   

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 161 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 142 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 19 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 800 फीसदी अधिक खराब है।         

इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 194 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 160 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 मार्च 2026 को 231 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज तीन फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 49 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 12.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 14.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 12.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 36.4 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंगुल (250) दूसरे जबकि चरखी दादरी (247) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 241 अंकों के साथ बहादुरगढ़ चौथे स्थान पर है। अगरतला-तालचेर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 239 और 234 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

कटक (223) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (217), बारीपदा (182) और भुवनेश्वर (180) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (ब्यासनगर, अंगुल, तालचेर, कटक, बारीपदा, भुवनेश्वर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, बहादुरगढ़, अगरतला, तालचेर, गुरुग्राम, बारीपदा, भुवनेश्वर, बर्नीहाट, बालासोर, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, नलबाड़ी, यमुना नगर, धारूहेड़ा, दिल्ली, मुजफ्फरनगर, बेंगलुरु, भिवानी, आसनसोल, लखनऊ, सोनीपत, नागांव, सांगली, कोलकाता, करनाल, काशीपुर, सोलापुर, किशनगंज, हल्दिया, वडोदरा, जींद, पानीपत, नाहरलागुन, मुरादाबाद, पटना, अररिया, पुणे, तिरुमाला, दुर्गापुर, चिक्काबल्लापुर, मुजफ्फरपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, सिरसा, सहरसा, बिलीपाड़ा, महाड, ग्रेटर नोएडा, नयागढ़, गाजियाबाद, श्री गंगानगर, भिवाड़ी, बुलंदशहर, क्योंझर, भरतपुर, नोएडा, टोंक, विशाखापत्तनम, नागौर, बद्दी, मंगुराहा, पाली, जालंधर, रायरंगपुर, उदयपुर, अलवर, ग्वालियर, सिंगरौली, बदलापुर, वातवा, बागपत, धुले, हनुमानगढ़, रतलाम, झुंझुनू, पिंपरी-चिंचवाड़, भावनगर, भीलवाड़ा, गया, खुर्जा, चूरू, पटियाला, लुधियाना आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के तीन फीसदी यानी महज सात शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, गंगटोक, कोरबा, मदिकेरी, पंचकुला, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 111 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें गांधीनगर, गोरखपुर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालौर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, परभनी, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 105 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अहमदनगर, अलवर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चूरू, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नयागढ़, नोएडा, पाली, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, तिरुमाला, टोंक, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के सात शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अगरतला, अंगुल, बहादुरगढ़, चरखी दादरी, कटक, गुरुग्राम, तालचेर शामिल हैं। वहीं ब्यासनगर में स्थिति बेहद खराब है, जहां एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 231 में से महज सात शहरों में हवा 'बेहतर' है। 111 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 मार्च को यह आंकड़ा 97 दर्ज किया गया था।

105 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज ब्यासनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 पर पहुंच गया। वहीं कल ब्यासनगर में एक्यूआई 289 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 13 अंकों का इजाफा हुआ है।

गौरतलब है कि कल देश में कटक की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 308 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 85 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 223 पर पहुंच गया। इसके साथ ही कटक में वायु गुणवत्ता आज ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।   

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 161 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 142 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 19 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 800 फीसदी अधिक खराब है।         

इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 194 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 160 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।       

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 मार्च को बहादुरगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं अंगुल (250) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (247) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 115, गाजियाबाद में 147, गुवाहाटी में 68, गुरूग्राम में 217, नोएडा में 137, ग्रेटर नोएडा में 152 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 82 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 137, चेन्नई में 87, चंडीगढ़ में 86, हैदराबाद में 82, जयपुर में 114 और पटना में 114 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें भिलाई, गंगटोक, कोरबा, मदिकेरी, पंचकुला, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बारां, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालौर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, परभनी, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 111 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

ओजोन की मार से बेहाल कटक, 308 अंकों के साथ बना देश का सबसे प्रदूषित शहर