नोएडा में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जहां एक्यूआई 344 दर्ज किया गया। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 21 गुना अधिक है। पीएम2.5 के महीन कणों की अधिकता से लोग बीमार हो सकते हैं। देश के अन्य शहरों में भी स्थिति चिंताजनक है, जबकि चामराजनगर की हवा सबसे साफ है।
विश्लेषण से पता चला है कि 15 जनवरी 2026 को देश में नोएडा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 344 रिकॉर्ड किया गया। कल नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 338 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में छह अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि वहां अभी भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
रुझानों में सामने आया है कि नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में चामराजनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 40 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में नोएडा की तुलना चामराजनगर से करें तो वहां स्थिति आठ गुणा खराब है।
कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 357 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 15 अंकों के सुधार के साथ ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 342 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब से खराब श्रेणी में है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 353 दर्ज किया गया था, जो आज 10 अंकों के सुधार के साथ घटकर 343 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 2,000 फीसदी अधिक खराब है।
गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 जनवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 34.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 36 फीसदी से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 8.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 9.5 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 36.4 फीसदी की कमी आई है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 235 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली (343) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (342) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 326 अंकों के साथ भिवाड़ी चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 321 और 320 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (318) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (291), धारूहेड़ा (286), नारनौल (286) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ) और हरियाणा (गुरुग्राम, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, नारनौल) के चार-चार शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नोएडा, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, गाजियाबाद, मेरठ, गुरुग्राम, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, नारनौल, कोटा, पानीपत, मानेसर, बद्दी, देहरादून, ग्वालियर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बागपत, भोपाल, भुवनेश्वर, टोंक, तालचेर, विशाखापत्तनम, बालासोर, फरीदाबाद, पीथमपुर, गुम्मिडीपूंडी, अंगुल, पंचकुला, बीकानेर, हापुड़, चूरू, जींद, भिवानी, धौलपुर, करनाल, कुरुक्षेत्र, झालावाड़, सीकर, नागपुर, नाहरलागुन, बहादुरगढ़, जयपुर, कानपुर, हाजीपुर, बूंदी, कोलकाता, हिसार, सिवान, सिंगरौली, मंडीखेड़ा, चंडीगढ़, जालोर, बर्नीहाट, पटना, प्रतापगढ़, बेतिया, नलबाड़ी, पुणे, आसनसोल, भीलवाड़ा, पाली आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, श्री गंगानगर, गुवाहाटी, जैसलमेर, खुर्जा, हावड़ा, लखनऊ, सवाई माधोपुर, झुंझुनू, आगरा, नागौर, हनुमानगढ़, जोधपुर, मंडी गोबिंदगढ़, चित्तौड़गढ़, परभनी, तुमकुरु, राउरकेला, फतेहाबाद, चंद्रपुर, महाड, क्योंझर, पटियाला, अमृतसर, बाड़मेर, धनबाद, अलवर, सिलीगुड़ी, बेलापुर, जालंधर, मंगुराहा, बिलीपाड़ा, बारबिल, भिवंडी, छपरा, रतलाम, अहमदाबाद, भरतपुर, बेगूसराय, नांदेड़, पलवल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), दुर्गापुर, खन्ना, लुधियाना, अजमेर, बारां, दौसा, कल्याण, धुले, मालेगांव, नयागढ़, उदयपुर, ब्रजराजनगर, अकोला, डूंगरपुर, प्रयागराज, उल्हासनगर, कुंजेमुरा, सागर, बरेली, जलगांव, पिंपरी-चिंचवाड़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.5 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, कोप्पल, शिवमोगा आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 83 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, धारवाड़, डिंडीगुल, एलूर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, करौली, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, मदिकेरी, मदुरै, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अररिया, आसनसोल, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छपरा, चित्तौड़गढ़, दौसा, देवास, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, पाली, पलवल, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, सिवान, सुआकाती, तिरुमाला, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 38 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बद्दी, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, चूरू, कटक, देहरादून, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हापुड़, हावड़ा, जैसलमेर, जींद, करनाल, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, पंचकुला, पानीपत, पीथमपुर, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
वहीं भिवाड़ी, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मेरठ, नोएडा में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 83 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 61 दर्ज किया गया था।
108 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज नोएडा (344) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 350 के करीब पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में छह अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि इसके बावजूद अभी भी नोएडा में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है।
कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 357 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 15 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 342 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता आज भी बेहद खराब है।
गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 353 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 10 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 343 पर पहुंच गया है। मतलब कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है, जहां आज सूचकांक 235 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 जनवरी को भिवाड़ी चौथे स्थान पर है, वहीं दिल्ली (343) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (342) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 251, गाजियाबाद में 321, गुवाहाटी में 213, गुरूग्राम में 318, नोएडा में 344, ग्रेटर नोएडा में 342 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 101 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 198, चेन्नई में 99, चंडीगढ़ में 165, हैदराबाद में 86, जयपुर में 185 और पटना में 152 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कलबुर्गी, कोप्पल, शिवमोगा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बांसवाड़ा, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, धारवाड़, डिंडीगुल, एलूर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, करौली, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, मदिकेरी, मदुरै, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रामनाथपुरम, रूपनगर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुपति, तुमडीह, वाराणसी, वातवा, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 83 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
प्रदूषित शहरों में दूसरे पायदान पर दिल्ली, 357 अंकों के साथ ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे खराब