कार्बोनिल्स का खतरा: ये रसायन फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्त में प्रवेश कर हृदय स्वास्थ्य प्रभावित करते हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
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इंडोर ओजोन के कारण खून के गाढ़ा होने के आसार हैं, जानें कैसे?

इंडोर ओजोन और त्वचा व घर की चीजों से बनने वाले रसायन हमारे दिल और रक्त को प्रभावित करते हैं

Dayanidhi

  • घर के अंदर ओजोन त्वचा, तेल, और पेंट से प्रतिक्रिया करता है, जिससे हानिकारक कार्बोनिल यौगिक बनते हैं।

  • कार्बोनिल्स का खतरा: ये रसायन फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्त में प्रवेश कर हृदय स्वास्थ्य प्रभावित करते हैं।

  • अध्ययन में पाया गया कि इंडोर कार्बोनिल्स बाहर की हवा से 15 गुना अधिक मात्रा में मौजूद थे।

  • स्वास्थ्य प्रभाव: लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में आने से लाल रक्त कोशिकाएं बढ़ती हैं, रक्त गाढ़ा होता है।

  • सुरक्षा उपाय: वेंटिलेशन बढ़ाएं, तैलीय पदार्थ और ओजोन जनरेटर कम इस्तेमाल करें, ताकि इंडोर हवा सुरक्षित और स्वच्छ रहे।

हमारे आस-पास की हवा में ओजोन नाम की गैस पाई जाती है। यह गैस दो तरह से हमारी जिंदगी में मौजूद होती है। ऊपर की हवा में ओजोन हमारे लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी सुरक्षा करता है। लेकिन नीचे यानी जमीन के पास की ओजोन एक प्रदूषक गैस के रूप में काम करती है और यह हमारी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है।

बाहरी वातावरण में ओजोन को लंबे समय से फेफड़ों, गले और नाक के लिए हानिकारक माना गया है। यह गैस क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी बीमारियों का कारण बनती है। 2021 के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में ओजोन के कारण लगभग 88 लाख डिसएबिलिटी-एडजस्टेड लाइफ-इयर्स प्रभावित हुए।

लेकिन हमारी दिनचर्या को देखें तो हम लगभग 90 फीसदी समय घर या किसी बंद जगह में बिताते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग ओजोन के प्रभाव से बाहर नहीं बल्कि अंदर के वातावरण में प्रभावित होते हैं। हाल के अध्ययन में यह पता चला है कि इंडोर ओजोन हमारी सेहत पर और भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

ओजोन और इंडोर रसायन

हमारी त्वचा लगातार एक तैलीय पदार्थ सीबम छोड़ती है। इसमें असंतृप्त फैटी एसिड, स्क्वालेन और कोलेस्ट्रॉल मौजूद होते हैं। जब ओजोन इस तेल से संपर्क करता है, तो यह ओजोनोलाइसिस नामक रासायनिक प्रतिक्रिया करता है। इस प्रक्रिया में तेल के अणुओं के बीच के डबल बॉन्ड टूटते हैं और नए रसायन बनते हैं, जिन्हें कार्बोनिल यौगिक (एल्डिहाइड और कीटोन) कहते हैं।

ये कार्बोनिल यौगिक हवा में लंबे समय तक रहते हैं और फेफड़ों में गहरे प्रवेश कर सकते हैं। इससे यह हमारे रक्त में जा सकते हैं और हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं ओजोन खुद अपनी उच्च प्रतिक्रिया के कारण फेफड़ों के ऊपरी हिस्से में ही रुक जाता है और गहराई तक नहीं जाता।

तिब्बत का ल्हासा अध्ययन

तिब्बत के ल्हासा में एक अध्ययन में 110 स्वस्थ कॉलेज छात्रों पर शोध किया गया। छात्रों के हॉस्टल के कमरों में सात प्रकार के कार्बोनिल यौगिकों की मात्रा मापी गई। इसके लिए उनके बिस्तरों के पास लगभग पांच फीट की ऊंचाई पर विशेष नलिकाएं लगाईं गईं। इस अध्ययन को गर्मी और पतझड़ के मौसम में चार बार दोहराया गया।

एसीएस ईएस एंड टी एयर नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि इंडोर कार्बोनिल्स की मात्रा बाहर के मुकाबले 15 गुना ज्यादा थी। इन यौगिकों के लगातार संपर्क में आने से छात्रों के लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या, हीमोग्लोबिन और हेमाटोक्रिट बढ़ गए। इससे रक्त गाढ़ा हो जाता है और हृदय को काम करने में कठिनाई होती है।

ल्हासा में रहने वाले तिब्बती लोग पहले से ही ऊंचाई के कारण कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में रहते हैं। इस वजह से उनका शरीर अधिक लाल रक्त कोशिकाएं बनाता है। ओजोन-उत्पन्न कार्बोनिल्स इसके साथ मिलकर क्रॉनिक माउंटेन सिकनेस जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

क्या कहता है अध्ययन?

यह अध्ययन हमें बताता है कि इंडोर हवा की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी बाहरी हवा की। केवल बाहरी प्रदूषक पर ध्यान देने से स्वास्थ्य जोखिम का पूरा आकलन नहीं हो सकता।

इंडोर ओजोन से बचाव के लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं-

  • कमरे में अच्छी वेंटिलेशन रखें।

  • इंडोर तैलीय पदार्थों और कुकिंग ऑयल्स का कम इस्तेमाल करें।

  • एयर प्यूरीफायर और ओजोन जनरेटर से बचें।

  • ओजोन केवल बाहरी प्रदूषक नहीं है।

घर के अंदर यह हमारे शरीर में ऐसे रसायन बना सकता है जो दिल और रक्त पर असर डालते हैं। इस अध्ययन ने साफ किया कि स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करते समय इंडोर हवा की रसायन विज्ञान और प्रदूषक पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है।