वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में पंजीकृत सभी मोटर वाहनों में बिजली से चलने वाले वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल, ईवी) की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत रही। यह जानकारी सरकार के वाहन पोर्टल के आंकड़ों के डाउन टू अर्थ द्वारा किए गए विश्लेषण से सामने आई है।
लेकिन आंकड़े यह भी बताते हैं कि कई राज्यों में इन वाहनों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा आधार बिजली से चलने वाले रिक्शे यानी बैटरी रिक्शा हैं। ये रिक्शे कम लागत वाले सार्वजनिक परिवहन का साधन हैं और बड़ी संख्या में कम आय वाले लोगों को आजीविका भी उपलब्ध करा रहे हैं।
इन राज्यों में बढ़ रहे हैं बैटरी रिक्शा
पिछले वित्त वर्ष में बिजली से चलने वाले वाहनों के पंजीकरण में सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहे असम की तस्वीर बिजली से चलने वाले रिक्शों को अलग करने पर काफी बदल जाती है। इन रिक्शों को हटाने पर राज्य में बिजली से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत रह जाती है। जिन राज्यों का विश्लेषण किया गया, उनमें यह सबसे बड़ी गिरावट थी।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025-26 के दौरान असम में 50,000 से अधिक बिजली से चलने वाले रिक्शों का पंजीकरण हुआ, जबकि इसी अवधि में राज्य में कुल 5 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ। यानी उस वर्ष राज्य में पंजीकृत लगभग हर 10 में से एक वाहन बिजली से चलने वाला रिक्शा था।
ऐसा ही रुझान पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिला, जहां बिजली से चलने वाले रिक्शों को अलग करने पर बिजली से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई। उत्तर प्रदेश में यह 10 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत, बिहार में 8 प्रतिशत से 4 प्रतिशत और दिल्ली में 13 प्रतिशत से 9 प्रतिशत पर आ गई।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तर प्रदेश में देश में सबसे अधिक, 2 लाख से ज्यादा बिजली से चलने वाले रिक्शों का पंजीकरण हुआ। इसी अवधि में राज्य में कुल लगभग 40 लाख वाहनों का पंजीकरण हुआ था।
इसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान रहा, जहां 13 लाख से अधिक कुल वाहनों में लगभग 90,000 बिजली से चलने वाले रिक्शे पंजीकृत हुए। बिहार में 15 लाख से अधिक कुल वाहनों में 60,000 से ज्यादा, असम में 5 लाख से अधिक कुल वाहनों में 50,000 से ज्यादा और दिल्ली में 8 लाख कुल वाहनों में 30,000 से अधिक बिजली से चलने वाले रिक्शों का पंजीकरण हुआ।
इन पांचों राज्यों में मिलाकर वर्ष 2025-26 के दौरान बिजली से चलने वाले लगभग 4.5 लाख रिक्शों का पंजीकरण हुआ। यह उस वर्ष देश में पंजीकृत ऐसे सभी रिक्शों का लगभग 80 प्रतिशत है।
इन राज्यों में है संतुलित तस्वीर
इसके विपरीत, कुछ राज्यों में बिजली से चलने वाले वाहनों का विस्तार केवल रिक्शों तक सीमित नहीं रहा। वहां दोपहिया, कार, बस और अन्य तिपहिया वाहनों सहित विभिन्न श्रेणियों में इन वाहनों का पंजीकरण अपेक्षाकृत संतुलित रहा।
त्रिपुरा इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है। वहां बैटरी रिक्शों को अलग करने पर बिजली से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी केवल 18 प्रतिशत से घटकर 17 प्रतिशत हुई। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में बिजली से चलने वाले 800 से भी कम रिक्शों का पंजीकरण हुआ, जो उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और दिल्ली की तुलना में बहुत कम है।
ऐसा ही रुझान केरल, कर्नाटक, गोवा और ओडिशा में भी देखने को मिला, जहां बैटरी रिक्शों को अलग करने के बाद भी बिजली से चलने वाले वाहनों की कुल हिस्सेदारी में बहुत मामूली बदलाव आया। वर्ष 2025-26 के दौरान गोवा में केवल 10, कर्नाटक में 337, केरल में 77 और ओडिशा में 3,756 बैटरी रिक्शों का पंजीकरण हुआ।
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो बैटरी रिक्शों को कुल आंकड़ों से अलग करने पर बिजली से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह जाती है। यानी राष्ट्रीय स्तर पर इन रिक्शों का योगदान महत्वपूर्ण है, लेकिन उनका प्रभाव पूरे देश में समान रूप से नहीं फैला है। यह मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा राज्यों तक ही सीमित है।