चेन्नई के अलवरपेठ के सिंग्नल पर दोपहर पौने एक बज रहे हैं, स्कूटी के पीछे कक्षा सात की छात्रा रुबी (बदला हुआ नाम) पूरे आरामतलबी से बैठे हुए अपनी कोर्स बुक को पढ़ने में तल्लीन है। यह नजारा किसी ठंडे इलाके का होता तो समझा जा सकता था लेकिन यहां का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस है और ऊपर से यहां की उमस के बीच रुबी का इस प्रकार से आराम से किताब पढ़ने पर डाउन टू अर्थ ने पूछ ही लिया कि इस शोर और उमस भरी गर्मी में वह कैसे अपने को आराम की स्थिति में पा रही हैं ? इस पर उन्होंने तपाक से कहा कि मेरी मां की स्कूटी अब इलेक्ट्रिक है और इसके चलते मुझे न तो इससे आवाज आ रही है और न ही बाइब्रेट हो रही है इसलिए मैं अराम से पढ़ पा रही हूं।
क्या पूर्व में भी ऐसे ही स्थिति थी, पूछने पर इस बार उनकी मां ने जवाब दिया कि नहीं पहले हमारे पास पेट्रोल वाली स्कूटी थी तब तो मैंने इसे कभी आराम से पढ़ते नहीं देखा। रुबी के हालात बता रहे हैं कि राज्य में दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
इसके लिए यदि आंकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि राज्य में 2025 में कुल वाहनों का पंजीकरण 1,74,477 था और इसमें अकेले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत से अधिक थी।
वहीं जून 2026 तक राज्य में 1,16,461 से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बिक चुके हैं। इस संबंध में चेन्नई के ऑटो मोबालइल विशेषज्ञ अजय नाहर बताते हैं कि तमिलनाडु में पिछले तीन वर्षों में ईवी के पंजीकरण में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है।
ध्यान रहे कि राज्य में कुल वाहनों का पंजीकरण 2023 में 90,305 से बढ़कर 2024 में 1,33,710 और 2025 में 1,74,477 हो गया हैं। यह राज्य में साल-दर-साल मजबूत वृद्धि दर को बताता है। 19 मार्च 2026 को लोकसभा में रखे गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में 2023 और 2025 के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने में चेन्नई, कोयंबटूर, चेंगलपट्टू, तिरुपुर और सलेम जैसे शहरी और औद्योगिक जिलों का कुल पंजीकरण में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
नाहर कहते हैं कि राज्य में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन (ईवी) बाजार में अपना दबदबा बनाए हुए हैं और राज्य भर में पंजीकृत वाहनों में इनका ही बड़ा हिस्सा है। चेन्नई में पंजीकरण 2023 में 13,630 से बढ़कर 2025 में 15,395 हो गया, जबकि कोयंबटूर में लगभग दोगुने होकर 7,737 से 14,265 हो गया।
वहीं तिरुपुर में भी इसी अवधि में 5,530 से बढ़कर 12,230 की भारी वृद्धि दर्ज की गई। दिंडीगुल, थेनी और तेनकासी जैसे छोटे जिलों में भी लगातार वृद्धि देखी गई है। इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। चेन्नई में इलेक्ट्रिक कारों का पंजीकरण 2023 में 1,943 से बढ़कर 2025 में 6,307 हो गया।
कोयंबटूर और चेंगलपट्टू में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जहां तीन वर्षों में इनकी संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। हालांकि कुल संख्या के मामले में ये अभी भी दोपहिया वाहनों से काफी पीछे हैं।
राज्य में सभी ईवी वाहन की श्रेणियों के पंजीकरण में लगातार वृद्धि यह दर्शाता है कि तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव गति पकड़ रहा है, जिसमें दोपहिया वाहन अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं और अन्य सेगमेंट धीरे-धीरे इसका अनुसरण कर रहे हैं।
तमिलनाडु अब ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर के लिए देश का एक बड़ा निवेश केद्र बनता जा रहा है। राज्य के उद्योग मंत्रालय के अनुसार अनुसार 2021 से अब तक तमिलनाडु में 12.16 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इसमें करीब 80 प्रतिशत एमओयू अलग-अलग चरणों में लागू किए गए हैं। इसके चलते ऑटो मैन्युफैक्चरिंग और ईवी इकोसिस्टम को बड़ी मजबूती मिल रही है। मंत्रालय के अनुसार तमिलनाडु में ईवी, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन मोबिलिटी भविष्य की इंडस्ट्री है। इसके लिए नीतिगत सपोर्ट भी दिया गया है। साथ ही बैटरी पैक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवी कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
तिपहिया वाहन
कामराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर आते ही इस बात का पता चल जाता है कि राज्य में ईवी वाहनों का अच्छा खासा दबदबा है। क्योंकि एयरपोर्ट के बाहर आते ही यहां किसी यात्री को टैक्सी नसीब नहीं होती बल्कि इसके लिए उसे इलेक्ट्रीक शटल पर बैठ कर आधे किलोमीटर दूर जाकर टेक्सी मिल पाती है। इस संबंध में शटल में यात्रियों को बैठाने का प्रबंध कर रहे डी रमेश ने डाउन टू अर्थ को बताया कि इससे कम से कम यात्रियों को एयरपोर्ट से बाहर आते ही धुएं का सामना नहीं करना पड़ता। ध्यान रहे कि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के मामलों में भी चेन्नई में जहां 2023 में 1,136 वाहन पंजीकृत थे वहीं 2025 में यह संख्या लगभग दोगुना हो गई है यानी 2,414। इसी प्रकार राज्य के अन्य शहरों में भी इसी पैटर्न पर तेजी देखी जा रही है।
चार्जिंग स्टेशन
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की कुल संख्या 1,780 है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के स्टेशन शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए आगामी वर्ष 2031 तक कुल 20,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
तमिलनाडु में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कुल संख्या 316 पर केवल एक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन है। यह प्रति चार्जर छह से 30 वाहनों के मानक से कहीं अधिक है। यह जानकारी गाइडेंस तमिलनाडु और इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसपोर्टेशन एंड डेवलपमेंट पॉलिसी (आईटीडीपी) द्वारा सार्वजनिक चार्जिंग अवसंरचना पर तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक में प्रति चार्जर 81 वाहनों के साथ सबसे कम है, जबकि उत्तर प्रदेश में प्रति चार्जिंग प्वाइंट 510 इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ यह अनुपात सबसे अधिक है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि तमिलनाडु द्वारा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में शुरुआती प्रयासों के बावजूद चार्जर्स की कमी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति को धीमा कर रही है। अगस्त 2025 तक राज्य में 4,47,469 पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहन थे, लेकिन केवल 1,413 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि “इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना जटिल है क्योंकि इसमें कई एजेंसियां शामिल होती हैं। कौन क्या करेगा और कैसे करेगा, इसे सरल बनाने के लिए दिशानिर्देश ही आगे बढ़ने का सही तरीका हैं। बहुत कम राज्यों में सभी हितधारकों को मार्गदर्शन देने के लिए इस तरह के दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।